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सेक्शन 377 के SC के फैसले के बाद पांच महीने के भीतर मुंबई में पहला गे मैरिज रिसेप्शन आयोजित हुआ

Kumar Vibhanshu

Image Credits: Mumbai Mirror

February 11, 2019

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पिछले साल 6 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिसासिक फैसले में सेक्शन 377 में आंशिक  बदलाव करते हुए समलैंगिकता को अपराधमुक्त घोषित किया. तब से पूरा देश प्यार की जीत का जश्न मना रहा है और इसे “आज़ादी (स्वतंत्रता) आंदोलन” कह रहा है. फैसले के लगभग पांच महीने बाद, मुंबई ने पिछले सप्ताह कांतामर्ग के अनंत होटल में अपने पहले समलैंगिक विवाह का आयोजन किया.

मुंबई मिरर के अनुसार, भारत के पहले एलजीबीटी क्वायर रेनबो वॉइसेस के संस्थापक 43 वर्षीय विनोद फिलिप, 47 वर्षीय उनके फ्रांसीसी पति, विंसेंट इलायर ने मुंबई में उनके स्वागत समारोह की मेजबानी की क्योंकि दंपति ने दावा किया कि शहर ने उन्हें अपनी सेक्सुआलिटी को सबके सामने स्वीकार करने के लिए  काफी सशक्त बनाया है. 



प्रेम का एहसास 


विनोद, जो चेन्नई के मूल निवासी हैं,  जुलाई 2016 में एक डेटिंग ऐप के माध्यम से पेरिस में विंसेंट से मिले. दोनों ने एक-दूसरे के साथ रहना पसंद किया और अगले छह महीनों के लिए एक साथ कई यात्राओं पर निकले. लेकिन जब विन्सेंट कुछ समय के लिए थाईलैंड गए तब दोनों को अपने प्यार की गहराई का एहसास हुआ.

2018 में, दोनों ने अपने प्यार को औपचारिक बनाने का फैसला किया. इसके तुरंत बाद, दोनों विनोद के परिवार से मिलने चेन्नई आए. यहां तक ​​कि विनोद के परिवार को उनकी सेक्सुआलिटी  के बारे में पता था, फिर भी दंपति को अभी भी यकीन नहीं था कि परिवार इस खबर पर क्या प्रतिक्रिया देगी. हालांकि, जैसा कि वे कहते हैं, प्यार किसी का भी दिल जीत सकता है, विनोद के परिवार ने भी खुशी से दोनों को स्वीकार किया और विंसेंट को भी घर का हिस्सा बना लिया है.

दोनों ने पिछले साल पेरिस में शादी की लेकिन लंबे समय से दोनों भारत में एक रिसेप्शन आयोजित करना चाहते थे. जब उनसे पूछा गया कि वे अपने शादी के रिसेप्शन के लिए मुंबई को क्यों चुनते हैं तो विनोद ने कहा कि यह मुंबई ही है जिसने उन्हें गले लगाया और 2014 में दुनिया के सामने आने की ताकत दी. उन्होंने कहा कि मुंबई स्थित एलजीबीटी राइट्स एनजीओ हमसफर ट्रस्ट ने उनकी मदद की.



समलैंगिक होना समाज को बताना आसान नहीं था

हमारे समाज में बहुत लंबे समय से समलैंगिकता स्वीकार्य नहीं है और उसे सामाजिक कलंक  मानते है, कई लोगों को अपने दोस्तों और परिवार वालों के बीच यह बात बताने में संघर्ष का सामना करना पड़ता है.

विनोद के लिए, दूसरों की तरह अपनी सेक्सुआलिटी के बारे में बताना आना आसान नहीं था. विन्सेंट ने कहा, विनोद के लिए बाहर निकलना उनके ‘बहुत रूढ़िवादी ईसाई परिवार’ को देखते हुए काफी मुश्किल था. उन्होंने कहा कि शुरू में, विनोद का परिवार उनके बेटे के समलैंगिक होने के खुलासे से सदमे में थे , लेकिन समय के साथ वे इसे समझ गए. दूसरी ओर, विंसेंट के परिवार ने लंबे समय से उनकी सेक्सुआलिटी को स्वीकार कर लिया था.

दंपति ने मुंबई में अनंत होटल को शादी के रिसेप्शन के लिए बुक किया था क्योंकि उस समय जब विनोद शहर में होते और भांडुप में रहते थे तब वे अनंत होटल काफी आया करते थे.



होटल के कर्मचारियों ने उन्हें खुश किया

रिसेप्शन की तैयारी के दौरान, दोनों ने होटल में खुलासा नहीं किया कि यह एक समलैंगिक वेडिंग रिसेप्शन था. हालांकि, होटल के एथोरिटीज को इसके बारे में पता चलने के बाद, उनकी प्रतिक्रिया काफी खुशनुमा थी और उन्होंने युगल को सहज बनाने के लिए अपने तरीके से सारे प्रयत्न किये.

दंपति ने कहा कि होटल के कर्मचारियों ने उन्हें वास्तव में खुश किया और किसी भी अन्य विवाहित जोड़े की तरह उनसे व्यवहार किया, जिससे यह उनके और उनके मेहमानों के लिए एक यादगार पार्टी बन गई.

हमसफ़र ट्रस्ट के संस्थापक, अशोक रो, भारत के सबसे मुख्य समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता में से एक, जो बहादुरी से न केवल खुद के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए न्याय और स्वतंत्रता की मांग करते हुए कई अन्य लोगों के लिए खड़े थे, इस रिसेप्शन की सराहना करते हुए इसे “समलैंगिक विवाह को परिवार और दोस्तों की तरफ से आकर्षक मान्यता” कहा. उन्होंने कहा, “मैं उनके लिए एक अद्भुत सहजीवन की कामना करता हूं.”  एक्टिविस्ट ने आगे कहा कि शहर ने 1984 में अनौपचारिक रूप से पहली बार एक समलैंगिक वेडिंग रिसेप्शन आयोजित किया था.


 

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