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आनंद तेलतुम्बडे – IIM अहमदाबाद के पूर्व छात्र होने से लेकर “अर्बन नक्सल” होने के कारण अवैध रूप से गिरफ्तार होने की कहानी

तर्कसंगत

February 13, 2019

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2 जनवरी को, मैनेजमेंट प्रोफेशनल, अध्यापक, लेखक और कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बडे को “अवैध रूप से” महारास्ट्र की पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था. भीमा कोरेगांव में हिंसा उकसाने के लिए और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने के लिए, मुख्य आरोपी के रूप में नामित किए गए कार्यकर्ता को उसी दिन पुणे सत्र अदालत द्वारा रिहाई के आदेश के बाद गिरफ्तारी को अवैध करार दिया गया था.

पिछले महीने 14 जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने तेलतुम्बडे के खिलाफ दायर FIR को खारिज करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से चार सप्ताह की सुरक्षा प्रदान की है. अदालत ने उन्हें पुणे की निचली अदालत से नियमित ज़मानत प्राप्त करने के लिए 11 फरवरी तक का समय दिया था. लेकिन महाराष्ट्र पुलिस ने शनिवार को 3:30 बजे मुंबई हवाई अड्डे से प्रसिद्ध विद्वान को गिरफ्तार किया, जो सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना थी.

इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में तेलतुम्बडे को चार सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया है. वकील लारा जेसानी ने कहा कि पुलिस ने उन्हें सजा सुनाए जाने से पहले उन्हें गिरफ्तार करके उनके अधिकारों का उल्लंघन किया है.

 

भीमा कोरेगांव मामला

तेलतुम्बडे की गिरफ्तारी के तार 1 जनवरी, 2018 को हुई हिंसा से जुड़े हैं. 31 दिसंबर 2017 को, भीमा कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ से एक दिन पहले पुणे में मानवाधिकार संगठनों द्वारा एल्गार परिषद का आयोजन किया गया था. यह दिन इसलिए मनाया जाता है क्योंकि उसी दिन 1 जनवरी, 1818 को, ब्रिटिश और पेशवा (उच्च जाति) ने भीमा कोरेगाँव, पुणे, महाराष्ट्र के एक गाँव में एक लड़ाई लड़ी थी, जिसमें ब्रिटिश सैनिकों ने दल में दलित दल की वजह से पेशवाओं पर जीत हासिल की थी.

पिछले साल भीमा कोरेगांव की घटना के दौरान, हिंसा भड़क उठी थी जिसमें एक की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे. पुलिस ने दावा किया कि एल्गर परिषद के संगठन में “माओवादी तत्वों” की कथित रूप से आपस में मिले हुये थे, जहां भड़काऊ टिप्पणी की गई थी, जिसके कारण हिंसा को प्रोत्साहन मिला था.

 

कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी

इसके बाद 28 अगस्त को, महाराष्ट्र पुलिस ने पूरे देश में कई छापे मारे. मुंबई, दिल्ली, रांची, गोवा और हैदराबाद में प्रमुख कार्यकर्ताओं, वकीलों और लेखकों के घरों पर पुणे पुलिस ने छापा मारा था. दिन के अंत तक, कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें “अर्बन नक्सलियों” के रूप में ब्रांडेड किया गया. कथित तौर पर, IPC में आतंक विरोधी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और धारा 153A, 505(1)(b), 117, 120(b) और 34 के तहत तलाशी और हिरासत की गई. अब तेलतुम्बडे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जाने वाले दसवें व्यक्ति है, पुलिस ने आरोप लगाया कि तेलतुंबडे और गिरफ्तार किए गए अन्य लोग पीएम मोदी को मारने की साजिश रच रहे थे और भीमा कोरेगांव के दौरे पर आए दलितों की भीड़ के बीच हिंसा भड़का दी थी.

जबकि तेलतुंबडे को भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपियों में से मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया था, रिपोर्टों में कहा गया है कि वह वैचारिक मतभेदों के कारण एल्गर परिषद के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए थे. अदालत के आदेश के तुरंत बाद, तेलतुम्बडे ने “द वायर” से बात की, उन्होंने कहा राज्य इसे बहुत स्पष्ट कर रहा है, वे किसी भी विरोधी आवाज की अनुमति नहीं देने वाले हैं. उन्हें चुनौती देने वाला कोई भी व्यक्ति, सलाखों के पीछे होगा. इस देश में अब कोई कानून नहीं है.

 

“अर्बन नक्सल” तेलतुम्बडे एक प्रसिद्ध विद्वान, कार्यकर्ता और वकील हैं

अन्य कार्यकर्ताओं की तरह जिन्हें गिरफ्तार किया गया था, तेलतुम्बडे एक शिक्षाविद, लेखक और कार्यकर्ता हैं. वह दशकों से दबे और पिछड़े लोगों के लिए काम कर रहे है. एक भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं , जो पिछले दो वर्षों से गोवा प्रबंधन संस्थान में डेटा एनालिटिक्स पढ़ा रहे हैं.

तेलतुंबडे अपने कॉलेज के दिनों से ही सक्रियता से काम कर रहे हैं, उसके अलावा वह एक शानदार छात्र रहे हैं. आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए करने के बाद, उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से साइबरनेटिक्स मॉडलिंग में पीएचडी की और अमेरिका की साइबरनेटिक सोसाइटी से इसी विषय में फेलोशिप की.

इसके बाद उन्होंने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के कार्यकारी निदेशक के रूप में काम किया, जिसके बाद वह पेट्रोनेट इंडिया लिमिटेड के MD और CEO बन गए. पुणे में रहने वाले सार्वजनिक बुद्धिमान व्यक्ति ने तब देश के प्रमुख बी-स्कूलों में पढ़ाना शुरू किया. इस समय के दौरान, तेलतुम्बडे अपने लेखन के माध्यम से सरकार की जन-विरोधी नीतियों के बारे में आलोचनात्मक रहे हैं.

उन्होंने कई पुस्तकें लिखी हैं- पास्ट, प्रेजेंट एंड फ्यूचर, महाद: द मेकिंग ऑफ द फर्स्ट दलित रिवोल्ट, द पर्सिस्टेंस ऑफ कास्ट: द खैरलांजी मर्डर्स एंड इंडियाज हिडन अपर्थेइड. अपनी हाली ही की पुस्तक रिपब्लिक ऑफ कास्ट में, तेलतुम्बडे ने भारत में प्रचलित कई सामाजिक मुद्दों के बारे में लिखा है, “नवउदारवादी हिंदुत्व के समय में असमानता”. वह लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन का भी हिस्सा रहे हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए समिति के महासचिव भी रहे हैं.

गिरफ्तारी पर, आनंद ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी बुद्धिमानो और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले लोगों के खिलाफ एक बड़ी साजिश का हिस्सा है. उन्होंने कहा, “यह शहरी नक्सल का चेहरा है? मैं छात्र दिनों से एक कार्यकर्ता रहा हूँ. यह कुछ साथियों की गिरफ्तारी का सवाल नहीं है. इसका मतलब यह है कि यह किसी के साथ भी हो सकता है.

 

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