सप्रेक

मिलिए इस 17 साल के लड़के से जो खिलौनों के माध्यम से 10000 से अधिक बच्चों को खुशियां बाँट रहे हैं

तर्कसंगत

February 13, 2019

SHARES

हम सभी अपने सभी पसंदीदा खिलौनों के साथ बड़े हुए हैं. वो फिर एक बार्बी हो या एक फैंसी इलेक्ट्रिक कार हो जो एक रिमोट बटन के क्लिक पर चलती है, हमारे अंदर के बच्चे के लिए, वे चीजें हमारी दुनिया थी. हम में से बहुत से लोगों के लिए ये एक वास्तविकता हो सकती है, पर भारत के कई बच्चों के लिए यह उनकी वास्तविकता से बहुत दूर है.


हालांकि, कोलकाता के एक 17 वर्षीय हाई-स्कूल स्टूडेंट देश भर के हजारों बच्चों चेहरे पर मुस्कान लाकर उनके लिए उम्मीद का पात्र बन गए हैं. आर्यमन लखोटिया किसी अन्य 17 वर्षीय की तरह ही एक किशोर है, जो अपनी आगामी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त है. लेकिन, इसके साथ वो प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के गौरवशाली विजेता भी हैं.

 

 

टॉय जॉय की शुरुआत कैसे हुई?

उनके संगठन, टॉय जॉय के माध्यम से, 17 वर्षीय किशोर अपने भाइयों के साथ  हजारों खिलौने, किताबें और कपड़े एकत्र कर रहे हैं और इन सुविधा से वंचित बच्चों को बाँट रहे हैं. तर्कसंगत से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं उस समय 14 साल का था जब मैंने अपनी बहन और कुछ अन्य चचेरे भाइयों के साथ इस पहल की शुरुआत की थी. मैं अपने चचेरे भाई के जन्मदिन के समारोह में जयपुर में था और उसे बहुत सारे खिलौने मिले थे जो हम सभी के पास पहले से थे. मेरी दादी थी जिसने हमें लोगों को देने के महत्व का एहसास कराया और इसलिए, हमने इसे शुरू किया.” लखोटिया अपनी दादी आशा लखोटिया के प्रति बेहद आभारी हैं, जिन्होंने पहली बार भाई – बहनों में दूसरों की मदद करना और अच्छे काम करना सिखाया था. 

 

 

स्टूडेंट के द्वारा चलाये जाने वाला ये आर्गेनाईजेशन सात शहरों में चल रहा है और दो नए शहरों में शुरू करने की योजना बनायीं जा रही है. सोशल मीडिया की शक्ति का उपयोग करते हुए, इन लोगों ने अपने संचालन को अन्य शहरों में पहुँचाया है जहां वे शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हो सकते हैं. उन्होंने कहा, “हमने सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए किया और बड़ी संख्या में लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है .” इसके बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा कि जो लोग डोनेट करने के इच्छुक हैं, वे टॉय जॉय से संपर्क कर सकते है फिर उस शहर का फ्रेंचाइजी वालंटियर्स डोनर्स से संपर्क करेगा. उन्होंने कहा, “हम पहले उन खिलौनों को साफ करने की कोशिश करते हैं जो हमें दी जाती हैं और फिर उन्हें एनजीओ को भेजते हैं या बच्चों में सीधे बाँटते हैं.” बच्चों में मुस्कुराहट बाँटने के अलावा, आर्गेनाईजेशन ने बड़ों के साथ भी इसी तरह की सेवाओं को फैलाना शुरू कर दिया है. लखोटिया का कहना है कि संगठन अब तक 15,000 से अधिक बच्चों तक खुशियां बाँटने में सफल रहा है.



प्रधानमंत्री पुरस्कार जीतना

भारत सरकार ने उनके योगदान को मान्यता दी और हाल ही में उन्हें सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रधान मंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित किया, जो उन्हें स्वयं राष्ट्रपति द्वारा दिया गया था. उन्होंने कहा, “मैंने पुरस्कार के लिए अपने संगठन को ऑनलाइन रजिस्टर किया था, तब मुझे पता नहीं था कि क्या होगा.”

 

 

उनके स्कूल, सेंट जेम्स ‘ने भी उनकी पहल का भरपूर समर्थन किया है.  सामाजिक कार्यों और पढ़ाई को संतुलित करना कैसे सीखा? उस बारे में, उन्होंने कहा, “जब मैंने 10 वीं कक्षा में इसे शुरू किया था, तो यह मुश्किल हुआ करता था, लेकिन अब, मैंने इससे निपटना और इसे संतुलित करना सीख लिया है.” लखोटिया की अब योजना है कि 2019 के नवंबर में एडल्ट बनते ही संगठन को रजिस्टर करें.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...