पर्यावरण

इस आदमी की पहल ने चार वर्षों में हिमालय से 4,00,000 किलोग्राम कचरे को साफ किया है

तर्कसंगत

February 14, 2019

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हीलिंग हिमालयाज़ फाउंडेशन, हिमालय की चोटियों को साफ़ करने के लिए ट्रेकिंग अभियान का आयोजन करता है. हालांकि, पहाड़ों की रक्षा एवं हिमालयाज़ फाउंडेशन से जुड़ने के लिए इन ट्रेक मार्गों से गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा इकट्ठा करना होगा, जिसके लिए आपको दस्ताने और जूट के बोरे साथ लेकर जाना होगा.

इसके संस्थापक प्रदीप सांगवान का मानना है कि ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘हाईवे’, ‘3 इडियट्स’ जैसी बॉलीवुड फिल्मों में पर्वतारोहण के रोमांच को देखते हुए, अधिक से अधिक युवा हिमालय में ट्रेकिंग पर निकल रहे हैं. ट्रेकिंग क्लब और ट्रैवल एजेंसियां हर जगह फल-फूल रही हैं,  जो सुन्दर सनसेट पॉइंट या कुहासे में छिपी झरनों को खोजने का रोमांच देती हैं.

हालांकि वास्तविकता कैलेंडर की तस्वीरों से हकीकत बहुत अलग है,  क्यूंकि असल में प्लास्टिक के कचरे का ढेर हिमालय पर बढ़ता जा रहा है.

तर्कसंगत के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में 33 वर्षीय सांगवान बताते हैं, कि हिमालय की शांति के लिए कितना गैर-जिम्मेदार पर्यटन विनाशकारी है, और 2014 से पहाड़ों को साफ रखने के लिए उन्होंने मिशन कैसे शुरू किया.

 

“मुझे इसे शुरू करने के लिए सब कुछ खोना पड़ा”

एक सख्त अनुशासनात्मक परिवार में जन्मे और पले-बढ़े,  सांगवान से अपेक्षा की गई थी कि वे अपने पिता को फॉलो करें और सेना में शामिल हों. अपने कॉलेज के दिनों के दौरान,  उन्होंने ट्रेकिंग एक शौक के रूप में शुरू किया और थोड़ा लंबे समय के बाद उन्होंने पहाड़ों में अपनी ज़्यादा जरुरत पाई.

ग्रेजुएट होने के बाद, अपने परिवार की अस्वीकृति के कारण, वह स्थायी रूप से ट्रेकिंग के अपने जुनून को जीने के लिए मनाली में रहने चले गए. अपना खर्च निकलने के लिए, उन्होंने मनाली में एक होमस्टे बिज़नेस शुरू किया.

सांगवान ने बताया, पहले कुछ वर्षों के भीतर, उन्होंने यह देखना शुरू किया कि पर्वतीय पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, प्लास्टिक कचरा भी उन जगहों पर बढ़ने लगी, प्लास्टिक पहाड़ की सड़कों के किनारे और सुरम्य झीलों में जमा होने लगा है. “एक समय तो ऐसा था की लोगों को ट्रैकिंग का रास्ता भी बताने की ज़रूरत नहीं होती थी और लोग कचरे को फॉलो करते करते ऊपर तक पहुँच जाते थे, इस चीज़ ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया.”

उन्होंने कहा, “यदि आप स्थानीय चरवाहों को देखते हैं; वह ज्यादातर अशिक्षित हैं, लेकिन वह बहुत टिकाऊ तरीके से रहते हैं. वह पहाड़ों को अपना भगवान मानते हैं. हम शहरी लोगों के विपरीत, इन ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों से भरा जीवन जीना पड़ता है. वे पर्यावरण के हर कण की रक्षा के लिए हद से भी आगे जाने को तैयार रहते हैं. मैंने उनके पहाड़ों को फिर से सुंदर बनाने का दृढ़ संकल्प लिया था.

 

 

2014 में, प्रदीप सांगवान ने अपने स्वच्छता अभियान अकेले ही शुरु की. जब भी वह ट्रेकिंग के लिए जाते, वह रास्ते में जमा किये हुए कचरे को लेकर अपने साथ वापस आ जाते. स्थानीय लोग उनके इस मेहनत को देखकर कचरे को रिसाइकिलिंग प्लांट्स पर ले जाने के लिए कुछ कम पैसे ले कर उन्हें प्रोत्साहित किया करते थे. लेकिन, इसके अलावा, उन्हें और कोई सपोर्ट नहीं मिला. वह याद करते हुए बताते हैं, “हकीकत तो यह है कि मेरे अपने परिवार ने मेरी पढ़ाई पर खर्च करने पर सवाल उठाया,  उनका कहना था कि वह अंत में अगर एक कूड़ा उठाने वाले बनने ही जा रहे थे तो पढ़ाई क्यों की?

दो साल तक उन्होंने इस काम को पूरी तरह से अपने दम पर किया जिसने उनका ध्यान उनके होमस्टे बिज़नेस से हटा दिया. महीनों तक दुविधा में रहने के बाद, उन्होंने आखिरकार पहाड़ों के प्राकृतिक वातावरण को पहले जैसा करने के लिए अपना जीवन पूरी तरह से समर्पित करने का मन बना लिया. उन्हें मनाली में अपनी जीप बेच दी, अपने होमस्टे बिज़नेस और अपने कुछ मूल्यवान संपत्ति को गिर्वी रखा. फिर भी, वह अपने उद्देश्य से एक इंच भी पीछे नहीं हुए.
2016 में, उन्होंने द हीलिंग हिमालय फाउंडेशन का शुभारंभ किया, जो साथ काम करने के लिए समान विचारधारा वाले व्यक्तियों की तलाश करता है.

 

 

हीलिंग हिमालय: कलेक्ट, रीसायकल और रिस्टोर

हीलिंग हिमालय समुदाय में ऐसे वालंटियर्स शामिल हैं जो प्रदीप और उनकी कोर टीम में शामिल होने के लिए खीरगंगा, चंद्रताल, मणिमहेश, श्रीखंड महादेव, जोगिनी फॉल्स, हम्प्टा पास और अन्य लोकप्रिय ट्रेकिंग और धार्मिक रास्तों पर जाते हैं.

 

 

पूरी प्रक्रिया कुछ महीनों में काम करती है जब प्लास्टिक के कचरे जैसे फेका हुआ टेंट, बोतल, प्लेट, बैग आदि को जूट के थैलों में एकत्र किया जाता है और नीचे के गांव में लाया जाता है. ग्रामीणों की मदद से, इस कूड़े को हिमाचल में दो रीसाइक्लिंग प्लांटों में पहुंचाया जाता है,  जहां पर कचरे से बिजली पैदा की जाती है. सरकार ने आसपास के गांवों में इस बिजली को पहुँचाने का काम किया है, जिससे स्थायी ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है. संक्षेप में, प्रदीप सांगवान और उनकी युवा ब्रिगेड के अथक प्रयास से हर कोई जो दूर गांवों में है; को फेके हुए कूड़े की वजह से रोशन कर रहे है. वह बताते हैं, “की अब तक उन्होंने लगभग 400,000 किलो गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का संग्रह किया है.”

 

 

चंद्रताल में, टीम ने स्थानीय शिविर मालिकों के साथ सम्बन्ध स्थापित किया, उनसे पर्यावरण की दृष्टि से हानिकारक पर्यटक गतिविधियों पर रोक लगाने का आग्रह किया. दो साल के लिये कैंप फायर, डीजल जनरेटर का उपयोग करने, तेज संगीत बजाने या किसी विशेष क्षेत्र में 15 से अधिक शिविरों को रखने पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं. इसके साथ ही साथ सौर पैनलों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है.

 

 

नकथान और कई अन्य गांवों में, हीलिंग हिमालय ने आने वाले मौसमी पर्यटकों और ग्रामीणों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए महिला समूहों (महिला मंडल) को एकीकृत किया है. उन्होंने बताया कि, “अब हम नियमों को बनाए रखने के लिए इन क्षेत्रों का कभी-कभी दौरा करते हैं और जागरूकता अभियान की गति को जाँचते है कि वह जोरों पर है की नहीं.”

 

 

आत्मनिर्भरता पहाड़ों को साफ करने की कुंजी है

सांगवान कहते है कि, आज लोग पहाड़ों में झुंड में घूम रहे हैं लेकिन एक बड़ी गंदगी को पीछे छोड़ रहे हैं. पहाड़ की ताजी हवा द्वारा साँस लेने के बजाय, वह वातावरण के चारों ओर ज़ोर-ज़ोर से संगीत बजाते हुए शराब पीना, धूम्रपान करना और चिकन बिरयानी खाना चाहते हैं.” उन्होंने कहा कि खीरगंगा या मणिमहेश जैसे लोकप्रिय तीर्थयात्रा के मार्ग सबसे ज्यादा प्रदूषित हैं, क्योंकि अधिकांश तीर्थयात्री पर्यावरण के प्रति अति-संवेदनशील हैं. “तीर्थयात्रा मार्ग पर ट्रेकिंग मार्गों की तुलना में अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है.”

 

 

उन्होंने गर्व के साथ कहा, खीरगंगा में, हमने अधिकारियों को इस खतरे को उजागर किया. अब इस मार्ग में स्थायी शिविरों पर प्रतिबंध लगाने के लिए उच्च न्यायालय, वन विभाग और एनजीटी एक साथ आए हैं. अब आपको अपना स्वयं का तंबू लेकर जाना है, अपना भोजन पकाना है, रात्रि विश्राम करना है और अगले दिन स्थान को साफ करना है.”

 

 

उन्होंने जोर दिया कि जब तक पर्यटक पहाड़ों से प्यार करना नहीं सीखते, वे स्वच्छता के महत्व को नहीं समझेंगे.

प्रदीप सांगवान हीलिंग हिमालय की भविष्य की योजनाओं को लागू करते हुए साझा किया कि, इस साल हमने महीने में दो बार शिमला शहर में सफाई अभियान शुरू किया है. हम सोलर एनर्जी, वर्षा के जल का रख रखाव और अन्य पर्यावरण के अनुकूल उपायों के बारे में ग्रामीणों को शिक्षित करना जारी रखते हैं. हम दो प्लास्टिक प्रोसेसिंग प्लांट्स के साथ भी कुछ योजनाये बना रहे हैं, जो अधिक गाँवों को बिजली पहुंचाएंगे करेंगे और रीसायकल प्लास्टिक से वस्त्र और दैनिक आपूर्ति बनाएंगे”.

 

तर्कसंगत, प्रदीप सांगवान के अथक और निस्वार्थ प्रयासों की सराहना करता है.

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