पर्यावरण

तमिलनाडु प्लास्टिक बैन: कुछ ने नये तरीकों के साथ इसका स्वागत किया, तो कुछ ने इसका विरोध किया.

तर्कसंगत

February 14, 2019

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प्लास्टिक जो मानव जाति के लिए वरदान और अभिशाप दोनों है, ने हमें इस पर निर्भर बना दिया है. हम प्लास्टिक के उपयोग के इतने आदी हो गए हैं, कि हम इसके उपयोग को कम करना भी नहीं चाहते हैं या शायद दूसरे उपायो की तलाश में हैं. कई अध्ययनों से पता चला है कि प्लास्टिक पर्यावरणीय मुद्दों के लिए गंभीर रूप से घातक है. इसे ध्यान में रखते हुए, कुछ राज्य प्लास्टिक प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं. इस साल से, तमिलनाडु सरकार ने राज्य में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया है. जहां छोटे व्यवसाय के मालिक इससे प्रभावित हुए हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो प्रतिबंध से लाभान्वित हो रहे हैं. इसी समय, कई लोग प्लास्टिक पदार्थ को बदलने के लिए दुसरे/नये विचारों के साथ भी आए हैं.

 

तमिलनाडु का प्लास्टिक पर प्रतिबंध

प्रतिबंध के बारे में बात करते हुए, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, एडप्पाड़ी पलनीस्वामी ने कहा कि प्रतिबंध मुख्य रूप से प्लास्टिक कैरी बैग पर होगा, इसमें प्लास्टिक प्लेट, कप, प्लास्टिक के झंडे और छोटे प्लास्टिक पाउच भी शामिल होंगे जो पानी की पैकेजिंग में उपयोग किए जाते हैं. कुछ अन्य चीजें हैं जिन पर प्रतिबंध भी लागू होगा. मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि राज्य में पूरी तरह से प्रतिबंध संभव नहीं होगा. उन्होंने कहा, “दूध, दही, तेल और दवाओं की पैकिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ प्लास्टिक पदार्थ पर प्रतिबंध से छूट दी गई है”.

प्रतिबंध के तुरंत बाद, कई प्लास्टिक व्यापारियों ने प्लास्टिक प्रतिबन्ध के खिलाफ विरोध करने के लिए अपनी दुकानों को बंद कर दिया था; प्लास्टिक के लिए हमेशा चलने वाला व कम लागत वाले विकल्प को खोजने के लिए उन्होंने और अधिक समय की मांग की. चेन्नई के जॉर्ज टाउन में, प्लास्टिक व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं और प्रतिबंध के खिलाफ पोस्टर लगा दिए थे. उन्होंने यह भी दावा किया, कि अगर सरकार ने प्रतिबंध नहीं हटाया तो उनका एसोसिएशन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएगा.

द न्यूज मिनट द्वारा एक रिपोर्ट में दुकान मालिकों में से एक ने कहा, “हम केवल उन्हें अपने प्रतिबंध को संशोधित करने के लिए कह रहे हैं. यह सच है कि उन्होंने हमें छह महीने का एडवांस/अग्रिम नोटिस दिया था, लेकिन इस अवधि के दौरान, सरकार ने दूसरे विकल्पों के लिए नयी घोषणा या प्रावधान क्यों नहीं बनाये”.

तमिलनाडु में, जबकि व्यवसाय के मालिक दावा कर रहे हैं कि प्रतिबंध से उनके व्यापार पर असर पड़ेगा, वही कुछ ही लोग हैं जो इसे पसंद कर रहे हैं.

 

तमिलनाडु के गाँव ने इस फैसले का स्वागत किया है

तमिलनाडु में प्रतिबंध के बाद, कई लोग प्लास्टिक की वस्तुओं के विकल्प के रूप में – सुपारी, केले के पत्ते और मन्थराई के पत्तों का उपयोग कर रहे हैं.

तमिलनाडु के चिन्नाचेरी गाँव में, कई महिलाएँ लगभग तीन दशकों से मन्थराई के पत्तों की सिलाई कर रही हैं. द हिंदू अख़बार के मुताबिक, 1 जनवरी को प्रतिबंध के बाद पत्तों की मांग काफी बढ़ गई है. मांग ने रोजगार भी बढ़ा दिया है और श्रमिकों की मजदूरी भी.

यह व्यवसाय ज्यादातर बूढी/वृद्ध महिलाएं करती है, यह एक पुराना काम है. हालाँकि, कुछ वर्षों से यह व्यापार बहुत निचले स्तर पर चल रहा था, अब इसमें अचानक बहुत वृद्धि देखी जा रही है.

जो महिलाएं स्वयं सहायता समूह/ सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) में काम करती हैं, वह ये प्लेटें बनाती हैं. वर्तमान में, गाँव की आधी महिलाएँ प्लेटों की सिलाई कर रही हैं. द हिंदू से बात करते हुए; पी. महेश्वरी, जो SHG का लेखा झोखा रखते है, उन्होंने बताया कि पत्तियों की मांग पहले बहुत कम थी, हालांकि, दिसंबर महीने के बाद से मांग में भारी वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा, ” थोक व्यापारी हमसे खरीद कर अरकोट, अरनी, वेल्लोर, चेन्नई और कांचीपुरम में पत्ते बेचते हैं. यह मुख्य रूप से होटलों में बिरयानी परोसने के लिए और किराने की दुकानों में उपयोग किया जाता है. पहले 100 पत्तियों की कीमत 100 रुपये थी. अब, वे समान मात्रा को 130 रुपये में खरीदने के लिए तैयार हैं”.

उन्होंने बताया की अब मजदूरी में भी वृद्धि हुई है. पहले प्रत्येक कार्यकर्ता को एक किलो पत्ते की प्लेट बनाने के लिए 65 रुपये मिलते थे. अब यह बढ़कर 75-80 रुपये प्रति किलो हो गयी है.

पत्तियों को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और असम से लाया जाता है. गाँव की महिलाएँ इन पत्तियों से प्लेट बनाती हैं और फिर उन्हें थोक बाजार में बेच देती है.

 

विकल्प

हम आमतौर पर प्लास्टिक का उपयोग एक बार इस्तेमाल होने वाले जैसे कि डिस्पोजेबल कॉफी कप, या जब हम अपने पसंदीदा कैफे से एक कप कैफेचिनो ले जाते हैं, या नारियल पानी पीने के लिये पाइप, या लंच में प्लास्टिक के चम्मच के साथ भोजन, सबसे ज्यादा उपयोग करते हैं. प्रतिबंध के बाद कई छोटे विक्रेताओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, इससे निपटने के लिए, कुछ विक्रेताओं ने कई दिलचस्प विचार रखे हैं. राज्य में कुछ नारियल पानी विक्रेताओं ने पीने के लिये प्लास्टिक के पाइप को बदलने के लिए नये सरल तरीके खोजे हैं. मदुराइ जिले के मारवांकुलम बस स्टॉप पर एक नारियल पानी वाला, नारियल पानी पीने के लिए पपीते के डंठल का उपयोग कर रहा है.

पपीते के डंठल जो अंदर से खोखले हो जाते हैं, उन्हें सुखाये जाने के बाद किसी वस्तु को पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. सूखने के बाद डंठल सख्त हो जाता है और यह झुकता नहीं है और आसानी से नारियल पानी पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

दुकानदार मालिकों ने ग्राहकों को प्लास्टिक बैग देना भी बंद कर दिया है. उन्होंने प्लास्टिक प्लेटों को अरेका नट लीफ प्लेट्स के साथ बदल दिया है और अर्चना वाली वस्तुओ के लिए स्टेनलेस स्टील के कटोरे का उपयोग कर रहे हैं.

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