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बैंगलोर: बच्चों को उनका बचपन वापस देने के लिए और एक खेल के मैदान के लिए लड़ाई

Kumar Vibhanshu

February 17, 2019

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सत्ता में रहने वाले लोगों के खिलाफ लड़ना, उन लोगो के लिए हमेशा एक चुनौती रही है जिन्होंने ऐसा करने की हिम्मत दिखाई है. इस तरह की लड़ाईयां हमेशा कठिन होती हैं लेकिन एक हीरो इन्हीं कारणों से हीरो बनता है. वे हार मानने में विश्वास नहीं रखते हैं.

बैंगलोर के पश्चिम भाग के नंदिनी लेआउट में रामकृष्ण नगर खेल का मैदान कई स्कूलों के बच्चों के खेलने की जगह रहा है. बड़े लोग उस भावना को समझते हैं जो अक्सर खेल के मैदानों से जुड़ी होती है. स्कूल के दिनों में और स्कूल के बाद ये नरम हरी घास हमारी साथी रही हैं और ये पेड़-पक्षी हमारे दोस्त रहे हैं. यह कहना कोई बड़ी बात नहीं होगी कि ये खेल के मैदान हमारा दूसरा घर रहा है. आराम, प्यार और देखभाल की एक जगह जहाँ हम प्रकृति के साथ रहते हैं.

लेकिन रामकृष्ण नगर खेल का मैदान, जो लगभग 40 साल पुराना है, अब वैसा नहीं दिखता. इसकी हरी घास बड़े-बड़े गड्डो में बदल गयी है. यह कीचड़ और गंदगी से भरा गया है. अब बच्चे यहाँ खेलने नहीं आते हैं. ऐसा लगता है जैसे बसंत ने भी अपने बगीचे को जैसे छोड़ दिया हो.

खेल के मैदान का क्या हुआ ?

रामकृष्ण नगर खेल का मैदान बैंगलोर विकास प्राधिकरण की संपत्ति है. वर्ष 2017 में सरकार ने इसे तीन भागों में बेच दिया. पहला भाग सांसद बी.एन. चंद्रप्पा को दे दिया, दूसरा भाग टुमकुर की एक डेयरी को और तीसरा भाग महालक्ष्मीपुरा ब्राह्मण सभा जो एक धार्मिक संगठन, को दे दिया गया है. हालांकि इस संपत्ति की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये है, लेकिन इसे 60 लाख कम पर बेचा गया है.

 

 

चेतन अहिम्सा, जो एक सैंडलवुड अभिनेता और बेंगलुरु के निवासी हैं, उन लोगो में से एक हैं जिन्होंने चुप बैठना सही नहीं समझा.

चेतन ने तर्कसंगत से बताया “जो लोग विरोध कर रहे हैं वे इस पार्क में खेलकर बड़े हुये हैं. हम जब भी इसे देखते हैं ये हमें हमारे बचपन की याद दिलता है. सिर्फ इसलिए कि ये बड़े लोग हैं और इसके पास शक्ति हैं ये बच्चों से उनके खेलने की जगह नहीं छीन सकते हैं और वास्तव में तो बच्चों का यहाँ खेलने का अधिकार है. इस परेशानी की वजह से उन बच्चों के सामाजिक जीवन, शारीरिक गतिविधियों और मानसिक सुख-शांति में बहुत दिक्कत हुई है. बड़ी संख्या में बच्चें यहाँ रोज खेलने आते थे. यह मैदान उनके लिए राहत और खुशी की जगह थी पर सत्ता के लालची लोगो की जरूरतों ने ऐसे कई मैदानों पर कब्ज़ा रखा है इसीलिए हमने बच्चों के अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला किया है.”

रामकृष्ण नगर प्ले ग्राउंड प्रोटेक्शन कमेटी पिछले डेढ़ साल से बच्चों को खेल के मैदान को लौटाने के लिए लड़ रही है. इस कमेटी में चेतन अहिम्सा, लोकेश बहुजन के साथ और भी बहुत लोग हैं

 

 

लोकेश बहुजन ने हमें बताया “हमने शहरी विकास मंत्री, स्थानीय सांसदों और विधायकों से बात की है. हमने बैंगलोर विकास प्राधिकरण के अधिकारीयों के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया है. हमने कई लोगों को इकट्ठा किया और उन्हें बताया कि क्या सही है और क्या गलत. कई बच्चे भी हमारे इस विरोध का हिस्सा रहे हैं. पार्क में गंदगी है और इसके चारों ओर खड्डे भी बन गये हैं जिससे बच्चे खेल नहीं पा रहे हैं. आखिरकार लोग इतने असंवेदनशील कैसे हो सकते हैं? हम खाली बैठे प्रकृति और बचपन को बर्बाद होता नहीं देख सकते. यह एक लंबी लड़ाई होगी, जिसमें बहुत सी मुश्किलें आयेंगी लेकिन जब तक हम अपने प्रयासों में सफल नहीं हो जाते हम डटे रहेंगे.”

 

 

इन लोगो ने कसम खाई है जब तक बाग़ में बसंत वापस ना आ जाये हम लड़ते रहेंगे. पिछले एक साल से ये लोगों ने इस जगह के लिए लड़ रहे हैं. वास्तव में तो बच्चों से उनका बचपन छीनने के बजाय अपनी जरूरतों को पूरा करने के और भी रास्ते हैं.

तर्कसंगत चेतन, लोकेश और उनके समूह को इस निस्वार्थ प्रयास के लिए समर्थन देता है और उनकी सराहना करता है.

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