सप्रेक

#सेवासेशादी – एक शादी जिसमें मेहमान थे 150 गरीब बच्चे

तर्कसंगत

February 17, 2019

SHARES

भारत जैसे देश जहाँ शादी सिर्फ दो परिवारों का एक साथ होना नहीं है बल्कि एक मान सम्मान की बात है. दिल्ली के इस जोड़े ने शादी की शान-ओ-शौकत और दिखावे की सीमाओं को तोड़ते हुये एक अनोखी पहल की है.  

एक राजनीतिक सलाहकार सागर विश्नोई और एक फैशन डिजाइनर रिची सूद ने एक सामान्य से हॉल में शादी की है जहाँ मेहमान कम उम्र के 150 बच्चे थे और उनका उपहार 1.5 लाख रुपये जुटाना था जिससे पढ़ने वाली 14 लड़कियों की मदद हो सके.

“मैंने कभी भी समाज और रिश्तेदारों को खुश करने के लिए पार्टी पर पैसा खर्च करने में विश्वास नहीं रखा बल्कि उस पैसे को अपनी उच्च शिक्षा के लिए या किसी जरुरतमंद की सहायता करने में विश्वास रखा है” सागर विश्नोई ने तर्कसंगत से बात करते हुए बताया.

 

 

उन लोगों की मदद करना जिनके पास खुशहाल जीवन नहीं है

सागर एक धनी और समृद्ध परिवार से आते हैं और खुद को सौभाग्य-शाली समझते हैं. वह मानते हैं कि समाज के लिए कुछ करना उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी है. “मैंने हमारी शादी पर इन बच्चों के साथ ख़ुशियाँ मनाने के लिए रिची से पूछा और वह मान गई. हम दोनों ने फैसला किया कि अपनी शादी को बहुत धूमधाम से मनाने के बजाय, हम इसे केवल कुछ लोगों के साथ एक सरल तरीके से करेंगे, जो हमारे लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं. हालाँकि उनके माता-पिता इस फैसले से खुश नहीं थे, लेकिन बाद में वे सहमत भी हुये और इस नेक काम में उनकी सहायता भी करी.

 

 

इस दंपति ने Bucket List नाम की एक NGO से संपर्क किया जो बच्चों के लिए काम करती है. सागर ने बताया ” जब हमने NGO को बताया कि हम इन बच्चों को अपनी शादी में बुलाना चाहते हैं यह सुनते ही वे बहुत खुश हुए और तुरंत सहयोग करने के लिए राजी हो गए. हम उन्हें एक शादी के माहौल का अनुभव देना चाहते थे जो शायद उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा.”

शादी के अलावे भी ये पति पत्नी विभिन्न योगदानों से NGO की मदद करते हैं.

 

शादी की तैयारी वाले और खाना पकाने वाले दोस्त और परिवार ही थे 

 

 

सागर ने फेसबुक पर अपनी शादी का निमंत्रण पढ़ते हुये बताया “यह एक शादी ऐसा समारोह होगा जहां बच्चे और संगठनों के बूढ़े लोग हमारे मेहमान होंगे. हम उन्हें खाना खिलाएंगे, उनके साथ मस्ती-मजे करेंगे जैसे फेस पेंटिंग, मेहंदी, नाचना, गाना इत्यादि. इसलिए मैं आपको (मेरे फेसबुक परिवार) को आमंत्रित करता हूं कि आप सब आयें और इन बच्चों के साथ मौज-मस्ती करें. शादी के लिए मेरे दोस्त दूर-दूर से आए आये थे उनमें से कई दोस्त तो शादी से एक दिन पहले ही दिल्ली की सर्दियों में सुबह-सुबह पहुंचे थे. कई लोग अपनी मर्जी से आगे आये और बच्चों के साथ मस्ती की.”

 

 

14 छात्राओं के लिए जुटाये 1.5 लाख रुपये

लंगर के अलावा इन दोनों ने कई स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर 14 छात्राओं के लिए पैसे जुटाने में मदद की है. सागर ने हमें बताया कि वे अपने एक दोस्त अनुराग की मदद कर रहे हैं जिन्हे 14 लड़कियों कि पढ़ाई के लिए लगभग 1.5 लाख रुपये की आवश्यकता है. अनुराग एक  “शिक्षा के अधिकार” के कार्यकर्ता हैं और दिल्ली सरकार के साथ काम कर रहे हैं.

उन्होंने अपने फेसबुक के परिवार से निवेदन किया कि वे उनके लिए उपहार न लायें बल्कि इन बच्चों के लिए उतने ही रुपयों से सहायता करें. “हमने इंटरनेट के माध्यम से और दिल्ली के शिक्षा मंत्री की मदद से 52,000 रुपये जुटाये हैं बाकी पैसे दिल्ली में एक कोचिंग सेंटर ‘कैरियर लॉन्चर’ के संस्थापक सत्य देव ने दिए हैं.

सागर ने बताया “शादी समारोह के बाद खाना भी बर्बाद नहीं हुआ. इस जोड़े ने बचे हुए खाने को FEEDING INDIA को दे दिया, एक NGO जो शादी से बचा हुआ खाना इकठ्ठा करते हैं और इसे गरीबों में बाँट देते हैं. हमारी शादी में लगभग 40-50 लोगों के लिए पर्याप्त खाना बचा था.”

 

जैसा बाप वैसा बेटा

सागर अपने पिता हरी विश्नोई के साथ मिलकर एक NGO ‘शिक्षा सूत्र’ चलाते हैं जो 20 बच्चों की सहायता करती हैं. शिक्षा सूत्र हर साल 70 बच्चों के लिए किताबें, स्कूल की फीस और 30 बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस की व्यवस्था करने के लिए लगभग 1 लाख रुपये निवेश करती हैं. उनके पिता ने अपने छोटे से समाज में योगदान देने और इसे सशक्त बनाने के लिए अपने समुदाय के 17 सेवानिवृत्त दोस्तों के साथ मिलकर ‘क्लब 60’ की शुरुआत भी की है. अपने पिता से प्रेरित होकर ही सागर ने छोटे बच्चों की मदद करना जारी रखा है.

 

तर्कसंगत का तर्क 

भारत अपनी समृद्ध संस्कृति और शान-ओ-शौकत वाली शादी के लिए जाना जाता है पर भारत में शादी अब एक व्यवसाय बन गया है. अब वो दिन गुजर गये जब नये नये शादीशुदा लोग बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के लिए पारिवारिक समारोह किया करते थे. द हिंदू की बिजनेस लाइन रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शादी से प्रति वर्ष 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एक लाख करोड़ का व्यवसाय होता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक औसतन भारतीय अपने पूरे जीवन की कमाई का लगभग पांचवां हिस्सा शादी में खर्च कर देता है.

जहां एक ओर लोग बड़ी- बड़ी पार्टी करके समाज को खुश करने में लगे रहते हैं वहीं इस जोड़े ने धूम धड़ाके की बजाय शांत तरीके से शादी करने का फैसला किया. तर्कसंगत सागर विश्नोई और रिची सूद का समाज के प्रति ऐसे दृष्टिकोण और इन बच्चों को सशक्त बनाने के उनके प्रयासों की सराहना करता हैं.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...