पर्यावरण

अंग्रेजो के जमाने की एक झील को अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड ने दिया दूसरा जन्म

तर्कसंगत

February 18, 2019

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दुनिया को पानी की बड़ी कमी का सामना करना पड़ रहा है. लोग कहते हैं कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए लड़ा जायेगा. विशेषकर भारत एक ऐसी राह पर खड़ा है जहाँ उसे प्रमुख जल संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

हालांकि ऐसे कई व्यक्ति और समूह हैं जो इस स्थिति को सुधारने के लिए काम कर रहे हैं. भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की ओर से नियंत्रित अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड उन पुरानी जगहों, जैसे नहर, तालाब, झील और अनेक जलाशयों, का पुनर्निर्माण करा रहा है जहाँ पानी को इकठ्ठा होता है.

 

पुराने जलाशयों का पुनर्निर्माण

हरियाणा का शहर अंबाला एक निचला इलाका है. यह दो नदियों घग्गर और तंगरी के बीच बसा हुआ है जिससे इसे बाढ़ और जल-भराव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जुलाई 2010 में भारी बारिश के बाद पूरा अंबाला शहर जैसे रुक सा गया था. उस समय की रिपोर्ट के अनुसार अंबाला कैंट के रेलवे यार्ड सहित शहर के कई हिस्सों में पांच फीट तक पानी भर गया था.

 

 

वहीं दूसरी ओर देश के कई अन्य शहरों और कस्बों की तरह अंबाला को भी निचले जल स्तर का सामना पड़ता है. पिछले कई सालों में अंबाला छावनी के प्रमुख नालों को चौड़ा करके उन पर ईंटें बिछाई गयी हैं जिससे बारिश का पानी बाहर निकल जाता है और जमीनी स्तर पर पानी का भराव नहीं होता है.

 

 

‘Smart Cantonment Initiative’ की एक पहल के तहत अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड जल भराव और बाढ़ को कम करने के साथ-साथ जल संरक्षण और भूमिगत जल स्तरों को ठीक करने किए लिए पुराने जलाशयों का पुनर्निर्माण करा रहा है.

 

इंटीग्रेटेड वेस्टवॉटर मैनेजमेंट सिस्टम 

अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के CEO वरुण कालिया ने तर्कसंगत को बताया “Wastewater Management Scheme ने सामाजिक क्षेत्र में बहुत योगदान दिया. इस योजना के तीन भाग थे. पहला भाग था 3.5 एकड़ की कूड़ा-कचरा फेंकने वाली जमीन को झील में बदलना. दूसरा भाग था एक 8 एकड़ पुराने तालाब का पुनर्निर्माण करना जिसमें पानी इकठ्ठा हो सके, यहाँ की स्थानीय भाषा में इसे ‘डिग्गी’ कहा जाता है और तीसरा भाग था सामाजिक क्षेत्र के गंदे  पानी का ठीक करके डिग्गी झील में भेजना.

 

श्री कालिया ने तर्कसंगत को बताया “पहला भाग 2017 में अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के उद्घाटन के साथ ही पूरा हुआ था. वर्तमान में झील में लगभग 2 करोड़ लीटर बारिश और जमीन का पानी है. 8 एकड़ पानी इकठ्ठा करने के लिये तालाब का निर्माण किया गया और इसे एक सुंदर झील के रूप में परिवर्तित किया गया जिससे योजना का दूसरा भाग भी पूरा हो चुका है.”

 

 

कैंटोनमेंट बोर्ड की पूरी टीम झील के सफल उद्घाटन पर बहुत खुश थी जिसके बाद दूसरे भाग का काम शुरू हुआ. श्री कालिया ने बताया “दूसरे भाग के अंतर्गत तालाब के लिए जगह को खोजा गया. उसके बाद हमने नालियों को इस तरह से बनाया है जिससे उनका पानी सीधे तालाब में जा सके और पानी की कुल मात्रा बढ़ सके. पानी के भरने और निकलने के लिए कुल 8 नालियां बनाई गयी हैं. हमने पहले तालाब के सूखने का इंतज़ार किया और फिर इसे दोबारा बनाया. यह काम 2016 की सर्दियों से शुरू हुआ था और 2018 के मानसून से पहले हमने इसे पूरा कर दिया था. इसके बाद पहले से जो एक मेंड़ थी उसे मिटटी डालकर और भी चौड़ा किया गया जिससे लोगो को टहलने और भागने में आसानी हो. अंतिम भाग में बारिश के पानी का उपयोग करके उस हिस्से को बनाया जहाँ झील थी.”

 

 

श्री कालिया ने हमें आगे बताया “दिलचस्प बात यह है कि न केवल झील को अपितु इसके आसपास की जगह में एक सुन्दर पार्क भी बनाया गया है. हमने विशेष रूप से स्वास्थ्य को लेकर उत्साही लोगों के लिए मिट्टी का एक जॉगिंग ट्रैक और लोगो के टहलने के लिए फुटपाथ बनाया है. इसके साथ ही पार्किंग के लिए भी पर्याप्त जगह बनाई है. झील के बीच में एक छोटा सा परन्तु ठोस टीला बनाया है जो फुटपाथ से सीधा जुड़ा हुआ है जिस पर भविष्य में काम किया जायेगा.”टीम अब तीसरे भाग को पूरा करने के लिए काम कर रही है और निर्माण कार्य पहले से तेजी पर चल रहा है.

 

 

तर्कसंगत श्री कालिया और अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड की सराहना करता है. इस तरह के कदम आम जनता को भरोसा दिलाते हैं कि सरकार पर्यावरण के बारे में चिंतित है और इसकी सुरक्षा के लिए कदम उठा रही है.

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