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जानिए: राजस्थान सरकार ने  विरोध कर रहे गुर्जरों के लिए नौकरियों में 5% कोटा को मंजूरी दी

तर्कसंगत

Image Credits: Indian Express

February 18, 2019

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13 फ़रवरी को, अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने विधान सभा में गुर्जरों, और चार अन्य समुदायों को नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 5% कोटा देने का बिल पेश किया. राजस्थान में, चार अन्य समुदायों के साथ गुर्जर समुदाय  सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर लगातार 6 दिन से आंदोलन कर रहे है और अभी तक आंदोलन ख़त्म नहीं हुआ है .

“राज्य और देश में अशांति है. मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं, ”राजस्थान के सांसद जितेंद्र सिंह ने एनडीटीवी को बताया.

सोमवार, 11 फरवरी को, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग -11 को अवरुद्ध कर दिया था, जो जयपुर को आगरा से जोड़ता है. प्रदर्शनकारियों द्वारा रेलवे लाइनों को भी अवरुद्ध कर दिया गया. आंदोलन के कारण, कम से कम चार ट्रेनों को डायवर्ट किया गया, और एक को कल रद्द कर दिया गया. द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि 8 फरवरी, शुक्रवार को शुरू हुए आंदोलन ने अब तक 250 से अधिक ट्रेनों को प्रभावित किया है. रविवार, 10 फरवरी को जारी विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया. पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और तीन पुलिस वाहनों को आग लगा दी. पुलिस ने कहा कि भीड़ को अलग करने के लिए उन्हें टीयर गैस शैल दागने पड़े.

यह पहली बार नहीं है जब गुर्जर समुदाय 5% कोटा की मांग को लेकर धरना दे रहा है. तो सवाल यह है कि समुदाय विरोध क्यों कर रहा है? तर्कसंगत गुर्जर विरोध का इतिहास बताता है.



उनकी मांग क्या है?

गुर्जर पारंपरिक रूप से देहाती समुदाय से आते हैं. गुर्जर राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और देश के कई हिस्सों में मौजूद हैं. राजस्थान की आबादी का लगभग 7% गुर्जरों का है. वे लगभग 21 राजस्थान जिलों में मौजूद हैं, और उन्हें भाजपा पार्टी समर्थक माना जाता है.

1994 तक, गुर्जर ओबीसी श्रेणी के तहत थे, लेकिन 2006 में, उन्होंने अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण में उनके समावेश की मांग शुरू कर दी. हालांकि, चोपड़ा कमिटी ने 209 पन्नों की अपनी लंबी रिपोर्ट में राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को कहा कि गुर्जरों को एसटी का दर्जा नहीं दिया जा सकता. लेकिन कमिटी ने नोकरियों से संबंधित एक प्रोत्साहन पैकेज, शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण और समुदाय के सदस्यों को छात्रवृत्ति की सिफारिश की.

2008 में, राजे सरकार ने गुर्जरों और चार अन्य समुदायों को 5% स्पेशल बैकवर्ड क्लास (एसबीसी) आरक्षण देने वाला एक बिल पेश किया. हालाँकि, दिसंबर 2010 में, राजस्थान HC ने इस कानून पर रोक लगा दी और राजस्थान सरकार से डेटा मांगा कि गुर्जरों को SBC श्रेणी के तहत आरक्षण क्यों दिया जाए?

बाद में, एसबीसी श्रेणी के तहत गुर्जरों को आरक्षण को राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा इस आधार पर पूरी तरह से खारिज कर दिया गया था कि यह हर राज्य के लिए 50% आरक्षण- सीमा से ज्यादा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित किया गया था.

इस दौरान राजस्थान में आरक्षण की मांग को लेकर कई विरोध प्रदर्शन हुए. 2012 में, नई अशोक गहलोत सरकार ने समुदाय को समान 5% आरक्षण की पेशकश की, लेकिन इसे भी HC ने उसी कारण से रोक दिया. वर्तमान में, राज्य में 50% आरक्षण है – SC को 16%, ST को 12%, OBC को 21% और गुर्जरों को 1%.



क्या यह पहली बार है जब गुर्जरों ने ट्रेन और ट्राफिक को रोक दिया है?

राजस्थान में, गुर्जर समुदाय ने विरोध प्रदर्शनों की एक श्रृंखला आयोजित की है. 2008 में विरोध प्रदर्शन, राज्य में हिंसक हो गया था. रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप विरोध प्रदर्शन पुलिस के हाथ से निकल गया. जवाबी कार्रवाई में, प्रदर्शनकारियों ने राजस्थान के भरतपुर जिले में एक पुलिसकर्मी को मार डाला और पुलिस वैन सहित सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की. विरोध प्रदर्शन के दौरान कम से कम 30 लोग मारे गए .24 मई 2008 को, स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए राजस्थान सरकार को भारतीय सेना की मदद लेनी पड़ी.

दिल्ली और मुंबई के बीच हजारों प्रदर्शनकारियों ने एक रेल मार्ग अवरुद्ध कर दिया. राजमार्ग भी अवरुद्ध हो गए थे, और राज्य अधिकारियों ने कई बसों को रद्द कर दिया था.2010 में, समुदाय के सदस्यों द्वारा कुछ विरोध प्रदर्शन भी किए गए थे, हालांकि, तब कोई हिंसा नहीं हुई थी मई 2015 में, इसी तरह के एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था और हजारों से अधिक गुर्जरों ने रेलवे ट्रैक पर अवरोध खड़े किये  ट्रेन यातायात को रोक दिया था.

गुर्जर समुदाय के नेता, कर्नल (retd.) किरोड़ी सिंह बैंसला 2006 से समुदाय का नेतृत्व कर रहे हैं.

 

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