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इस 22 वर्षीय IIT गोल्ड-मेडलिस्ट ने मोटी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी ताकि वह स्कूली छात्रों को जीवन में एक चेंजमेकर बना सके

तर्कसंगत

February 18, 2019

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नवंबर 2017 में, 12 साल के बच्चों के एक समूह – अंकिता, दिव्या, रश्वी, और स्वाति – जो की नेशनल पब्लिक स्कूल, कोरामंगला, बैंगलोर 7 वीं कक्षा के छात्र है; ने घरेलू पानी की अत्यधिक बर्बादी को कम करने के लिए ब्लूड्रॉप नामक एक संगठन की शुरुआत की. उन्होंने अमेज़न से एक 60रु का उपकरण खरीदा जो नल से पानी के बहाव को 40% तक कम कर देता है. वह अपने क्षेत्र में सभी लोगो के घर-घर एवं अपने पड़ोसियों के घरों में जाकर उन्हें प्रोत्साहित किया, डिवाइस दिया और खुद ही उनके नलो में लगा भी दिया. केवल 2 महीनों में, उन्होंने 40 से ज्यादा घरों में एरेटर लगा डाले और उससे एक महीने में उन सभी ने 81,000 लीटर से अधिक पानी की बचत कर रहे थे.

 

 

यह निश्चित है कि 12 साल के बच्चों के लिए यह काफी रोचक और सराहनीय रहा. लेकिन आप अंदाज़ा लगाओ कि यह 2017 में एनपीएस कोरमंगला से 7 वीं कक्षा के 90 छात्रों द्वारा शुरू की गई कुल 22 अलग-अलग चेंजमेकर अभियानों में से सिर्फ 1 था. साथ में ही स्कूल में बदमाशी से निपटने के अलावा, सड़कों पर गड्ढों को भरने के लिए डामर का एक सस्ता विकल्प, पर्यावरण के अनुकूल डिटर्जेंट बनाना जो जल के प्रदूषण का कारण नहीं है, इन सभी पहल का प्रभाव बहुत बड़ा था.

हालांकि, जहां शिक्षा प्रणाली में थ्योरेटिकल नॉलेज और परीक्षा की प्राथमिकता है, इस स्कूल में यह परिवर्तन कैसे हुआ. खैर, नए चेंजमेकर एजुकेशन सब्जेक्ट के लिए धन्यवाद – जो स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया जाने वाला एक पाठ्यक्रम है – जो उन्हें वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिये तैयार करता है. यह अनूठा पाठ्यक्रम बेटर प्लस एजुकेशन नामक एक NGO/ गैर-लाभकारी संगठन द्वारा डिजाइन और वितरित किया गया है.

 

लाभ से ज़ायदा असर पैदा करने की सोच 

राहुल अधिकारी बेटर प्लस एजुकेशन के संस्थापक, कहते हैं “कॉलेज के बाद से, मुझे सामाजिक उद्यमिता में दिलचस्पी थी”. “यही कारण है कि, जब मैं ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टार्टअप के साथ काम कर रहा था, तो उसी समय मैंने एक शिक्षक, प्रोग्राम मैनेजर, फंडरेज़र और हर दूसरी भूमिका में एनजीओ जैसे मेक अ डिफरेंस, पुर्कल यूथ डेवलपमेंट सोसाइटी में उपलब्ध अवसरों को अपनाया, जहाँ पर भी मैं किसी तरह का अपना योगदान दे सकता था. जल्द ही, मुझे यह एहसास हुआ कि प्रॉफिट वाला सेक्टर मेरे लिये नहीं बना है मुझे अब यहाँ नहीं होना चाहिए और मैंने अपने उद्यमी कौशल का उपयोग दूसरी जगहों पर किया, जहाँ पर मैं कुछ और प्रभावशील, महत्वपूर्ण कार्य कर सकता था. राहुल ने बताया की इसलिए, उन्होंने एक दिन अपनी अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी और एनजीओ की तलाश करना शुरू कर दिया, जहाँ पर वह अपना पूरा समय अपने काम को दे सके. हालाँकि मुझे सही जगह खोजने में कुछ समय लगा और यह 70% कम तनखाह के साथ लगा रहा, लेकिन यह बिल्कुल भी मेरे लिये मायने नहीं रखता था क्योंकि सामाजिक क्षेत्र में, मैं जो प्रभाव डाल रहा था, वह व्यापारिक दुनिया की तुलना में बहुत अधिक था.

 

 

यह शुरुआत की ही बात है जब वह एक NGO अशोक के साथ कार्य कर रहे थे, उन्हें इसी NGO ने बहुत प्रेरित किया और यही से उन्हें एक चेंजमेकर बनने की प्रेरणा भी मिली. जब वे भारत और श्रीलंका के कई हिस्सों की यात्रा कर रहे थे, तो दुनिया के कुछ प्रमुख सामाजिक उद्यमियों जो अशोक फेलो के रूप में चुने गये उनसे बातचीत करके उन्हें पता चला कि इनमें से अधिकांश सामाजिक उद्यमियों ने अपनी किशोरावस्था/टीनएजर्स में ही अपनी पहली सामजिक सेवा की पहल शुरू कर दी थी, इस प्रकार बहुत कम उम्र से ही वह सभी एक चेंजमेकर मानसिकता के साथ विकसित हुए थे. इसने उन्हें कम उम्र में सभी बच्चों में ऐसी चेंजमेकर मानसिकता पैदा करने की संभावना के बारे में गहराई से सोचने के लिए प्रेरित किया, ताकि हमारा समाज न केवल एक चेंजमेकर्स का गवाह बने, बल्कि हर एक बच्चे को बचपन से ही एक चेंजमेकर के रूप में तैयार किया जा सके.

 

 

इन्ही सवालों और विचारों ने एक वर्ष के रिसर्च और डेवलपमेंट साथ, बेटर प्लस एजुकेशन और उनके मजबूत साल भर चलने वाले चेंजमेकर एजुकेशन के पाठ्यक्रम को जन्म दिया. उन्होंने 2017 में नेशनल पब्लिक स्कूल, कोरमंगला से एक शरुआत करी और तेजी से उन्होंने 7 से अधिक स्कूलों में जिसमें भारत और श्रीलंका के आर्मी पब्लिक स्कूल, गाइडेंस इंटरनेशनल स्कूल, दी अमात्रा अकादमी, गवर्नमेंट हायर प्राइमरी स्कूलों सहित अन्य बड़े स्कूलों के साथ कार्य करने का मौका मिला. अपने दूसरे वर्ष के कार्यकाल में अक्टूबर 2018 तक उन्होंने 1100 से अधिक बच्चो को तैयार किया. यह पाठ्यक्रम युवा और जोश से भरे हुए वलिनटियर शिक्षकों के एक समूह द्वारा दिया जाता है, जिन्हें 1 साल की लंबी फैलोशिप के लिए चुना जाता है. यह फेलो सप्ताह में एक बार स्कूलों में जाते हैं और सत्रों का संचालन करते हैं.

 

चेंजमेकर एजुकेशन उतना ही महत्वपूर्ण है जैसे की पढ़ाई में मैथ और साइंस

चेंजमेकर एजुकेशन पाठ्यक्रम में स्कूलों के छोटे बच्चों को सहानुभूति, टीमवर्क, रचनात्मक समस्या को सुलझाने और सहयोगी नेतृत्व के 4 कोर चेंजमेकर कुशलताओ का निर्माण करने में मदद करता है, साथ में ही एक चेंजमेकर मानसिकता के साथ उन्हें तैयार किया जाता है जो वर्तमान शिक्षा प्रणाली में नहीं होता है. पाठ्यक्रम को दो भागों में विभाजित किया गया है. पहला भाग अनुभवात्मक, गतिविधि-आधारित सेशंस के माध्यम से इन कौशलों के निर्माण पर केंद्रित है. राहुल कहते हैं, “प्रायोगिक परिवर्तनकारी सेशंस, थ्योरी वाली कक्षाओं के विपरीत, छात्रों को चेंजमेकर स्किल्स के महत्व को समझने और आंतरिक रूप से अपनाने में मदद करते हैं”. “उदाहरण के लिए सहानुभूति विकसित करने के लिए, हमारे छात्रों को रोज़मर्रा के काम करने पड़ते हैं, जैसे पढ़ाई करना, घूमना फिरना आदि, एक दिन के लिये आँखों पर पट्टी बांधे रहना और यह अनुभव उन्हें एक अंधे व्यक्ति के दृष्टिकोण से जीवन और चुनौतियों को समझने में मदद करता है और उनकी मदद करने के लिए एक समाधान के साथ यह बच्चो को प्रेरणा देता है”.

 

 

दूसरे भाग में, छात्र टीम बनाते हैं और एक वास्तविक दुनिया की समस्या को हल करने के लिए एक पहल शुरू करते हैं जिसकी वह परवाह करते हैं. यह उन्हें कम उम्र में अपनी पहली उद्यमशीलता की पहल शुरू करने के लिए एक मंच प्रदान करता है और इस प्रक्रिया में परिवर्तन-निर्माण के मूल कौशल को विकसित करने में उनकी मदद करता है. उदाहरण के लिए, पिछले साल, उनकी एक पहल “प्रॉफिटेबल ई-वेस्ट” के माध्यम से सभी टीमों में से एक ने कॉर्पोरेट और घरों से 570 किलोग्राम से अधिक ई-वेस्ट एकत्र किया और इसे एक रिसाइकलर को रु21,000 में बेच दिया और यह पैसा उन बच्चो में NGO को दान कर दिया. इस पहल का नेतृत्व करने वाले चार छात्रों में से एक, आकर्ष ने कहा, “यह वास्तव में यह एक शक्तिशाली अनुभव था जिसने हमें कम उम्र में भी बड़े पैमाने पर बदलाव लाने के लिए हमारी क्षमताओं पर विश्वास करने में मदद की”.

 

 

श्रीमती पूर्णिमा नेशनल पब्लिक स्कूल की एक शिक्षक और कोऑर्डिनेटर कहती हैं, “पाठ्यक्रम का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि छात्रों को हर निर्णय लेने के लिए पूर्ण स्वतंत्रता दी जाती है. वह उस समस्या को चुनते हैं जिसे वह हल करना चाहते हैं, वह इसे कैसे हल करना चाहते हैं, आदि. यह 100% ओनरशिप है जो वास्तव में उनमें एक चेंजमेकर मानसिकता को विकसित करता है”.

 

 

पाठ्यक्रम में एक अतभुत 360डिग्री मूल्यांकन भी शामिल है जो सहानुभूति, टीम वर्क, रचनात्मक समस्या को सुलझाने और प्रत्येक छात्र में सहयोगी नेतृत्व की भावनाओ को माध्यम से हर बच्चे का सेल्फ असेसमेंट, शिक्षक-आधारित ऑब्जरवेशन असेसमेंट और एक दूसरे के साथ किये गये व्यवहार का असेसमेंट के कौशल को मापता है जो पूरे साल चलता है. प्रत्येक छात्र को अंत में एक विस्तृत व्यक्तिगत रिपोर्ट दी जाती है जो उन्हें उनके कौशल क्षेत्रों की पहचान करने में और कौशल क्षेत्र जिनमे सुधार की आवश्यकता होती है, उनकी पूर्ण रूप से मदद करता है. कई छात्रों के माता-पिता ने सूचित किया है कि इससे उनके बच्चों को अधिक आत्म-जागरूक बनने में मदद मिली है और उन कौशलों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत का भी पता चला है, जिन पर उन्हें सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

 

आगे होने वाले विशाल प्रभाव की रणनीति

 

टीम आने वाले शैक्षणिक वर्ष में और अधिक स्कूलों तक विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है. राहुल का कहना है कि प्रभाव बढ़ाने के लिए, अन्य संगठनों के साथ साझेदारी और कार्यक्रम को आसान बनाना एक महत्वपूर्ण कारक हैं. “हमने कोलंबो में पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए रोटरी क्लब में और भारत में सरकारी स्कूलों के लिए टीच फॉर इंडिया फैलो के साथ पहले ही साझेदारी कर ली है. उन्होंने बताया, हमने पाठ्यक्रम को अब “ऑनलाइन चेंजमेकर एजुकेटर रिप्लेसमेंट टूल-किट” के नाम से उपलब्ध करा दिया है, जिसका उपयोग दुनिया के किसी भी व्यक्ति को प्रशिक्षित करने और पाठ्यक्रम को वितरित करने के लिए किया जा सकता है”. चेंजमेकर पाठ्यक्रम को भी स्कूलों के लिए 3 साल के लंबे अंतराल में जल्द ही विस्तारित/बढ़ाया जाएगा.

 

 

पाठ्यक्रम के अलावा, बेटर प्लस एजुकेशन ने अंतर्राष्ट्रीय चेंजमेकर ओलंपियाड (ICO) नामक एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता भी शुरू की है. जहाँ पर अनुकूल रूप से विभिन्न स्कूलों के छात्र एक टीम बनाते हैं और एक सामाजिक पहल शुरू करते हैं और प्रतिस्पर्धा करते हैं. वर्तमान में, इसके दूसरे चरण में, वह भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में 12 से अधिक राज्यों के स्कूलों से अब तक की भागीदारी कर चुके है, जिसमे उन्होंने केवल एक वर्ष में 200 से अधिक छात्र चेंजमेकर पहल को जन्म दे रहे है.

राहुल कहते हैं, “ हमारा लक्ष्य है हमारे सभी कार्य सेल्फ-फाइनेंस हो, जिसके लिये हम अब संस्थानों और कॉरपोरेट्स से अनुदान राशि भी जुटा रहे हैं, जिसमे हम एक बड़ी टीम को नियुक्त करने और अपनी वृद्धि में तेजी लाने के लिए आगे बढ़ सके”.

 

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