मेरी कहानी

मेरी कहानी: मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं व्हीलचेयर पर गोल्ड मेडलिस्ट डेंटिस्ट बनूँगी

तर्कसंगत

February 18, 2019

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मेरा बचपन सामान्य था. मैंने अपनी बीडीएस परीक्षा में टॉप किया और चेन्नई में एक कॉन्फ्रेंस में एक पेपर प्रेजेंटेशन करने के लिए अपने रास्ते पर थी जब ड्राइवर को नींद आ गयी और एक खड़ी ट्रक को हमारी गाडी ने टक्कर मार दी. जब मैं उठी, मुझे लगा कि मुझे लकवा मार गया है. मुझे पता था कि मैं एक पैरापैलेजिक बन गयी हूँ.

पहले तो मुझे व्हीलचेयर से नफरत थी. मैंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. मैं उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहती थी. तब मुझे एहसास हुआ कि यही तो है जो मुझे अब चलाएगा और इसके बिना, मैं एक जगह फंस जाउंगी मेरी सोच सही नहीं थी. आज, मेरा व्हीलचेयर मेरा सबसे अच्छा दोस्त है.

इस हादसे के बाद, मैंने मनोविज्ञान और फैशन में एक कोर्स किया, ‘अब मेरे साथ क्या होगा” ऐसे सोच वाले लोगों पर ध्यान दिए बगैर मैं अपने काम में लगी रही … मुझे लगा कि मेरा डेंटिस्ट बनने का सपना कहीं अधूरा न रह जाए, लेकिन इन्हीं पहियों पर, मैंने एमडीएस परीक्षा में गोल्ड मैडल जीता. मैंने अपनी पसंद के विश्वविद्यालय में स्वीकृति हासिल करने के लिए अदालती लड़ाई लड़ी. मुझे मुस्कान डिजाइन करना बहुत पसंद है, इसलिए मैंने ऑर्थोडॉन्टिक्स का अध्ययन किया. मुझे फैशन और मॉडलिंग पसंद है, इसलिए मैंने 2014 में मिस इंडिया व्हीलचेयर में भाग लिया और जीती भी.

आज उन्नत तकनीक के साथ, मुझे उम्मीद है कि एक दिन रीढ़ की हड्डी की चोट का इलाज होगा. मुझे अपने हाथ से चलने वाली कार चलाना पसंद है, मेरा डेंटल क्लिनिक है और मैंने एक फाउंडेशन शुरू किया, एक डेंटल कॉलेज में लेक्चर भी देती हूँ और 10 देशों की यात्रा की है मैंने जीवन को प्यार करना सीखा है, चाहे यह जैसा भी हो और यही सही है.”

 

– राजलक्ष्मी एस. जे

कहानी: BeingYou तस्वीर: विश्वनाथ वेलु

 

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