मेरी कहानी

मेरी कहानी: मेरे शरीर की एक तरफ पर लकवा मार गया और मेरे माता-पिता मेरे भविष्य के बारे में चिंतित थे

तर्कसंगत

February 19, 2019

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आपके लिए शादी का क्या मतलब है.

 

वैसे भारत में शादियाँ दो से तीन दिन तक होती हैं और इसकी योजनाए बनाने में कई महीने लगते हैं. मेरे दोस्त और रिश्तेदार दो दिन पहले आ गये और मेरे भाई ने शादी से एक दिन पहले एक कॉकटेल पार्टी आयोजित की. हम 3 बजे सुबह तक गा रहे थे और नाच रहे थे, हालांकि मुझे सुबह बहुत जल्दी उठना भी था.

आभूषण, श्रृंगार और अपने बालों को सवारने, में मुझे तीन घंटे लगे लेकिन उसके बाद मैं तैयार थी. लेकिन जिस आदमी को मेरे साथ शादी करनी थी, उसकी बरात, दो घंटे लेट थी.

फिर जब हमने वरमाला (माला का आदान-प्रदान) शुरू किया तो यह सब वास्तविक लग रहा था. समारोह सुबह पाँच बजे समाप्त हुआ; फिर हम पति-पत्नी बन गए और मैं अपने शहर, मायके को छोड़कर ससुराल जाने वाली थी.

मेरी माँ ने कभी नहीं सोचा था कि मेरी शादी हो जाएगी. बचपन में ही मुझे एक भारी आघात पहुँचा, जिसने मेरे शरीर के एक तरफ को लकवा मार दिया. इसने हम सभी को झकझोर दिया था. उन्होंने मुझे नोर्मल माना लेकिन मेरे भविष्य को लेकर चिंतित थे. मैंने स्कूल के एक लड़के से साथ में डेट पर जाने को पूछा और मैं उसका जवाब कभी नहीं भूलूंगी उसके कहा “पहले नोर्मल तो हो जाओ”.

 

मैंने काम में अच्छा परफॉर्म किया, पुरुषों से अधिक कमाया, लेकिन कोई भी मुझसे शादी नहीं करना चाहता था.

जब मैं अंकुश से मिली तो मुझे उससे एक हफ्ते में ही प्यार हो गया और ये बात केवल मैं जानती थी. उसका परिवार शंकालु था, यह सोचकर कि मैं कमजोर हूँ और घर की देखभाल करने में असमर्थ हूँ. लेकिन वह यह कहते हुए अडिग रहा कि “मैं केवल उसे ही चाहता हूँ”.

उन्होंने भरोसा किया और अब हम दो साल से साथ में हैं.

मैं धन्य हूँ. वह मेरी खामियों को न देखते हुए मुझमें केवल सुंदरता देखता है, और उसके लिए मैं सामान्य हूँ. मुझे इसके अलावा और कुछ नहीं चाहिए.

 

कहानी: अदिति ग्रोवर गुप्ता

 

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