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एम्स की रिपोर्ट: शराब का सेवन करने वाले 16 करोड़ भारतीयों में से एक-तिहाई से ज्यादा एडिक्ट हैं, जिन्हें इलाज की जरूरत है

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Image Credits: indianexpress

February 19, 2019

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द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा किए गए एक सर्वे ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गंभीर नशीली दवाओं और शराब के दुरुपयोग पर प्रकाश डाला है. AIIMS, दिल्ली के अंतर्गत नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (NDDTC) द्वारा संचालित “मैगनीचयूड ऑफ़ सब्सटांस एब्यूज इन इंडिया” के आंकड़ों से पता चला है कि लगभग 5.7 करोड़ व्यक्ति शराब के आदि हैं (10-75 वर्षीय) और उन्हें तुरंत मेडिकल हेल्प की जरूरत है. हालांकि, चिंताजनक बात यह है कि पीने की समस्या वाले केवल 3% लोगों को उपचार प्राप्त होता है.

 

शराब की लत

सर्वेक्षण में कहा गया कि राष्ट्र में 16 करोड़ लोग ऐसे हैं जो शराब का सेवन करते हैं. साथ ही, भारत में लगभग छह करोड़ लोगों को शराब की लत है, जो दुनिया में 172 देशों की आबादी से अधिक है. इसमें कहा गया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में शराब की खपत काफी अधिक है. एक ताज़ी हालत बताने के लिए, देश के 1.6% महिलाओं की तुलना में 27.3% पुरुष शराब का सेवन करते हैं. सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़, पंजाब और त्रिपुरा में शराब उपभोक्ताओं की तादाद ज़्यादा है.

देश में शराब की खपत एकमात्र समस्या नहीं है, क्योंकि सर्वेक्षण के माध्यम से यह पता चला है कि देश में पर्याप्त संख्या में लोग विभिन्न दवाओं के भी आदी हैं. पिछले एक साल में लगभग 3.1 करोड़ भारतीयों ने भांग उत्पादों का सेवन किया है. हालांकि, इनमें से 72 लाख लोग को भांग उत्पाद की लत लग चुकी है और उन्हें उपचार की आवश्यकता है, लेकिन दुर्भाग्य से, 20 में से केवल एक व्यक्ति को ही अस्पताल में उपचार प्राप्त होता है, फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार.

 

शराब के अलावा अन्य दवाओं का सेवन

सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले एक साल में लगभग 3.1 करोड़ भारतीयों (2.8%) ने भांग के उत्पाद का इस्तेमाल किया है. भांग के अलावा, 2.2 करोड़ लोगों ने गांजा और 1.3 करोड़ लोगों ने चरस का सेवन किया. हालांकि यह आंकड़ा स्पष्ट है कि गांजा या चरस की संख्या भंग की तुलना में कम है, लेकिन निर्भरता के मामले में गांजा या चरस के नशेड़ी की संख्या पंजाब, छत्तीसगढ़, दिल्ली, पंजाब और सिक्किम में राष्ट्रीय औसत से अधिक है.

हेरोइन सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला पदार्थ है जिसके बाद फार्मास्युटिकल ओपिओइड आता है. लगभग 60 लाख भारतीय हेरोइन और ओपियोइड का उपयोग करते हैं. देश में कुल आबादी का 1% से भी कम लोगों द्वारा सेडेटिव और इनहेलेंट की कोशिश की जाती है. सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि देश में लगभग 8.5 लाख लोगों ने दवाओं का इंजेक्शन लगाया.

 

इलाज के साधन

नशीली दवाओं या अल्कोहल की लत के लिए उपचार के उपयोग के क्षेत्र में, देश के आंकड़े अच्छे नहीं है. 38 शराब के लत लगे लोगों में केवल एक व्यक्ति को उपचार प्राप्त होता है और 180 में से एक नशेड़ी का अस्पताल में इलाज होता है. नशा करने वालों के लिए, 20 में से केवल एक को नशीली दवाओं की लत के लिए अस्पताल में भर्ती या ड्रग एडिक्शन का इलाज़ होता है.

 

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