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यह फाउंडेशन आईआईटी दिल्ली के साथ, नेत्रहीन छात्रों के लिए टैक्टाइल डायग्राम और पाठ्यपुस्तकों का निर्माण करता है

तर्कसंगत

February 20, 2019

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दुनिया भर में मौजूद दृष्टिहीन लोगों की पूरी आबादी में से, भारत का योगदान सबसे ज्यादा है. इस जनसंख्या का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा 5 से 19 वर्ष के बच्चों का है. दृष्टिहीन लोगों के आसपास के सभी मुद्दों के बीच, सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक जिसे आमतौर पर अनदेखा किया जाता है, वह है सीखने में आने वाली समस्या. ऐसे सीखने वाले विषय जिनके लिए आरेखों, गणित, भूगोल या विज्ञान जैसे रेखांकन का उपयोग करना आवश्यक था उनके लिए वो सीखना कठिन था.

दृष्टि हानि के साथ शिक्षार्थियों के सामने आने वाली इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय  द्वारा प्रायोजित, IIT दिल्ली में Tactile ग्राफ़िक्स में सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (CoE) में किए गए शोध के चार साल बाद, Raised Lines Foundation को इनक्यूबेट किया गया. भारत की इस फाउंडेशन का मुख्य मिशन दृष्टि हानि के साथ प्रत्येक छात्र को स्पर्श रेखाचित्रों वाले पाठ्यपुस्तक प्रदान करना और उन्हें पसंद  विषयों का चयन करने के लिए सशक्त बनाना है, न कि उन्हें समस्या के कारण विषय का चयन करने के लिए मजबूर करना.

 

 

क्या आप नक्शे का उपयोग किए बिना भूगोल और ज्योमेट्री आकृतियों  के उपयोग के बिना गणित के अध्ययन की कल्पना कर सकते हैं? ग्राफ, डायग्राम आरेख और अन्य चित्र का उपयोग किए बिना विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों को सीखना उन छात्रों के सामने प्रमुख चुनौतियों में से एक है जो नेत्रहीन हैं या किसी भी तरह के दृष्टि हानि से पीड़ित हैं. यह अक्सर उन्हें उन विषयों को चुनने के लिए मजबूर करता है, जिनमे वे आगे बढ़ाने की इच्छा नहीं रखते हैं.

ऐसे छात्रों को विज्ञान और अन्य संबद्ध विषयों का अध्ययन करने में मदद करने के लिए, रेज़ेड लाइन्स फाउंडेशन ने एक तकनीक विकसित की है, जहाँ 3-डी प्रिंटिंग का उपयोग करके, टैक्टिल डायग्राम को सस्ती तरीके से उत्पादित किया जा सकता है. इस पहल के पीछे मुख्य उद्देश्य दृष्टिबाधित छात्रों को सीखने में सक्षम बनाना है जहां वे सिद्धांत आधारित विषय का अध्ययन करने के लिए मजबूर होने के बजाय अपनी पसंद का विषय चुनने की स्वतंत्रता रखेंगे. यह सीखने के नए क्षेत्रों और उनके लिए अन्य अवसरों को भी खोल देगा.

 

 

तर्कसंगत के साथ बात करते हुए, रिसर्च टीम के सदस्यों में से एक, पुलकित सपरा ने बताया “नेत्रहीनों के लिए गैर सरकारी संगठनों और अन्य संगठनों के साथ काम करते हुए, हमने देखा कि इनमें से अधिकांश छात्रों को सैद्धांतिक पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करके पढ़ाया जा रहा था. अधिकांश ब्रेल पाठ्यपुस्तकों में डायग्राम का अभाव था और शिक्षकों के लिए मानचित्र, ग्राफ़ से संबंधित कन्सेप्ट को समझाना और भी कठिन था. कम खर्च वाले टैक्टाइल ग्राफिक्स का परिचय नेत्रहीनों की शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाएगा.”



टैक्टाइल ग्राफिक्स क्या है?

टैक्टाइल ग्राफिक्स वे छवियां होती हैं, जिनमें उभरी हुई रेखाएं और बनावट शामिल होती हैं, जिन्हें दृश्य हानि वाले लोगों द्वारा स्पर्श की भावना का उपयोग करके कुछ चित्रमय जानकारी को समझने के लिए उपयोग किया जा सकता है. स्पर्शिक ग्राफिक्स का उपयोग स्वैलिंग पेपर या पीवीसी शीट्स जैसे भौतिक माध्यम पर एम्बॉसिंग या अन्य तकनीकों का उपयोग करके किया जाता है. यह तकनीक ब्रेल में पाठ्य सामग्री को अधिक सुगम बनाने के लिए टैक्टाइल  डायग्राम का उपयोग करने की अनुमति देती है.

विज्ञान या बारीकी से संबंधित विषयों की समझ के लिए ग्राफ डायग्राम या मैप की भूमिका महत्वपूर्ण है. वर्तमान स्थिति के अनुसार, भारत में नेत्रहीन छात्र के लिए उपलब्ध अधिकांश पाठ्य पुस्तक में केवल ब्रेल का उपयोग करते हुए सुलभ पाठ होते हैं जबकि सभी चित्र हटा दिए जाते हैं. परिणामस्वरूप, यह दृष्टिहीन बच्चों  को प्रभावित करता है और यह उन्हें उच्च अध्ययन के लिए एसटीईएम विषयों का चयन करने से रोकता है. वर्तमान संकट जो भारत में दृष्टिबाधित छात्रों को सीमित करता है, उसने टीम को एक ऐसे मॉडल के साथ आने के लिए प्रेरित किया जो बड़े पैमाने पर परिणाम ला सकता है.

 

“हमने कई विशेष शिक्षकों, नेत्रहीन लोगों के संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम किया है ताकि बड़े पैमाने पर टैक्टाइल डायग्राम के उत्पादन के लिए आने वाली समस्याओं की गहराई से समझ हासिल की जा सके. सभी पाठ्यपुस्तक प्रकाशकों के पास व्यक्तिगत टैक्टाइल डिजाइनर नहीं है. 3-डी प्रिंटर का उपयोग करके, हम विभिन्न विषयों पर कस्टमाइज्ड मैनुअल और डायग्राम का उत्पादन करने में सक्षम हैं, ” तर्कसंगत के साथ बात करते हुए टीम के अन्य सदस्य भैरु पात्रा ने बताया.


प्रारंभ में, इस परियोजना को 2015 में टैक्टाइल ग्राफिक्स (CoETG) में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में शुरू किया गया था और बाद में इसका नाम बदलकर रेज़ेड लाइन्स फाउंडेशन रखा गया. आईआईटी दिल्ली में फैकल्टी मेम्बर प्रो. एम. बालाकृष्णन और प्रो पीवीएम राव भी इस फाउंडेशन का एक हिस्सा हैं. अब तक, इसने कक्षा छठी से बारहवीं के लिए गणित, विज्ञान, अर्थशास्त्र और भूगोल का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए लगभग 70,000 स्पर्श रेखा चित्र और डिजाइन तैयार किए. वे ऐसे छात्रों के लिए स्कूल पाठ्य पुस्तकों का उत्पादन और डिजाइन करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. हाल ही में, उन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता पर एक मैनुअल डिजाइन किया था जिसे बहुत सराहा गया था.

 

 

अपनी  स्थापना के बाद से, इसने सफलतापूर्वक NCERT, राज्य शिक्षा बोर्डों, सर्व शिक्षा अभियान (MHRD), WSSCC (जल आपूर्ति और स्वच्छता सहयोग परिषद), और नेत्रहीन लोगों के लिए काम करने वाले अन्य संगठनों के साथ काम किया है. यहां तक ​​कि वे नेत्रहीनों के लिए आर्ट गैलरी, संग्रहालयों और प्रशिक्षण केंद्रों से डिजाइन करने के ऑर्डर भी प्राप्त कर रहे हैं. अभी के लिए, वे अधिक संगठनों तक पहुँचने की आशा कर रहे हैं ताकि , वे दृष्टिबाधित लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकते हैं.

 

 


तर्कसंगत नेत्रहीन छात्रों को उनकी शानदार सफलता के साथ उपलब्ध कराई गई शैक्षिक अंतर्दृष्टि का विस्तार करने की दिशा में काम करने के लिए रैसेड लाइन्स फाउंडेशन के सदस्यों की पहल को सलाम करता है.

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