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कोलकाता: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महिला ड्राइवर वाली पिंक कैब्स का उद्घाटन किया

तर्कसंगत

February 21, 2019

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 20 फरवरी को कोलकाता में महिलाओं के सफर को आसान और सुरक्षित करने के प्रयास में गुलाबी कैब सर्विस की शुरुआत की है. इसी तरह का एक प्रोजेक्ट हाल ही में बेंगलुरु में भी लॉन्च किया गया था.

Inauguration of several initiatives of the transport department

Inauguration of several initiatives of the transport department | পরিবহণ দপ্তরের একগুচ্ছ উদ্যোগের সূচনা

Posted by Mamata Banerjee on Wednesday, 20 February 2019

 

ममता बनर्जी ने गुलाबी कैब का उद्घाटन किया

डेक्कन हेराल्ड के अनुसार, राज्य के परिवहन विभाग के सूत्रों ने कहा है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में महिलाएं वर्कफोर्स में शामिल हो रही हैं, विशेष रूप से आईटी विभाग में. “इन गुलाबी टैक्सियों में केवल महिला ड्राइवर होंगी और महिला यात्रियों के लिए होंगी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश के अनुसार, राज्य सरकार की गातिधारा योजना के तहत पहल की गई है, ”एक वरिष्ठ परिवहन विभाग के अधिकारी ने कहा.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि 20 पिंक कैब्स, जिनमें से प्रत्येक को ‘गैटीधारा योजना’ के तहत 1 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिलेगी. कैब ड्राइवर न केवल अच्छे ड्राइवर होंगी बल्कि प्रशिक्षित मैकेनिक भी होंगी. महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ इस परियोजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वतंत्र होने में मदद करना है.

कथित तौर पर, ऐसे कैब जो ज्यादातर गुलाबी और सफेद रंग के होते हैं, एक जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और आपात स्थिति के दौरान पैनिक बटन के प्रावधानों से लैस होंगे. महिला कैबियों के लिए भी वर्दी पहनना आवश्यक है और यात्रियों में एक महिला शामिल होनी चाहिए. राज्य के परिवहन विभाग ने गातिधारा योजना के माध्यम से पश्चिम बंगाल के बेरोजगार युवाओं को ऐप-आधारित कैब सेवाओं को चलाकर सम्मानजनक ज़िन्दगी जीने में मदद की है.

ये सभी महिलाएं काफी गरीब और उपेक्षित हैं और बड़ी कठिनाइयों के बाद यहाँ तक पहुंची हैं, अखबार ने इनमें से एक तारा सरदार की कहानी बताई, जिन्होंने गुलाबी टैक्सी टैक्सी सेवा में शामिल होने से पहले घरों में साफ़ सफाई का काम किया करती थीं, उनका पति एक शराबी है और वह बार-बार नौकरी गंवाता रहता है, जिससे मजबूर होकर तारा को खुद से परिवार चलाने की जिम्मेदारी लेनी पड़ी. ऐसी ही अन्य महिलाओं की कहानियां थीं जो अब अपनी आजीविका कमाने का एक तरीका अपना चुकी हैं. अन्य साधन के उद्धघाटन में 20 इलेक्ट्रिक और 20 सीएनजी बसें थीं. इलेक्ट्रिक बीएस की कीमत 80 लाख रुपये है, जिसे केंद्र सरकार की साझेदारी की मदद से ख़रीदा गया है.

 

तर्कसंगत का तर्क

भारत में हर शहर में महिलाएं अक्सर कैब में अकेले यात्रा करते समय कई कारणों से असुरक्षित महसूस करती हैं. महिलाओं के खिलाफ हिंसा देश में एक बदसूरत वास्तविकता बन गई है, और यह कहने वाली बात नहीं कि अपराधियों में ज्यादातर पुरुष शामिल होते हैं. ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जिनमें महिलाओं का यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ कैब ड्राइवरों द्वारा अपहरण तक किया जा चूका है. जबकि हर कैब ड्राइवर बदमाश नहीं होता, मगर ऐसी घटनाओं ने महिलाओं को कैब में सवार होने के दौरान ज़्यादा सावधान होने को मजबूर भी कर दिया है. हाल ही में एक घटना में, पश्चिम बंगाल में एक महिला को चालक द्वारा अपहरण से बचने के लिए चलती कैब से कूदना पड़ा. तर्कसंगत को उम्मीद है कि देश के अन्य शहर भी ऐसी पहल करेंगे.

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