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फैक्ट चैक़: 15 राज्यों और 2 केंद्रीय शासित प्रदेशों में 551 नियमित थोक बाजारों की उपस्तिथि का सरकारी दावा 

तर्कसंगत

February 21, 2019

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भाजपा सरकार ने mygov.in पॉर्टल पर अपने 48 महीनों की उपलब्धियों से एक सूचनाचित्र (इन्फोग्रफिक) जारी किया जो कि अन्य पोर्टल e-NAM के बारे में दावा करता है. यह आलेख इन्हीं दावों के तथ्यों की जांच करता है.

 

e-NAM क्या है?

मार्च 2018 में लोकसभा में सरकार द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार “National Agriculture Market”(eNAM) अर्थात् (राष्ट्रीय कृषि बाज़ार) सम्पूर्ण भारत में संचालित, एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापारिक पोर्टल है जो मौजूदा कृषि उपज व्यावसायिक कमेटी मंडियों में कृषि उपज के विनमय को एक संयुक्त नेटवर्क में जोड़ता है.

सरकार आगे दावा करती है कि मार्च 2018 तक, 15 राज्यों और 2 केंद्रीय शासित प्रदेशों के 551 नियमित थोक बाजारों को इस eNAM पोर्टल से जोड़ा जा चुका है. e-NAM को 2016 में ही पायलट बेसिस पर जारी किया गया था.

eNAM की वेबसाइट ये भी दावा करती है कि विभिन्न कृषि उपज व्यावसायिक कमेटी मंडियों की अनेक जानकारियों और सेवाओं के लिए, यह पोर्टल एकएकल खिड़की“(Single Window) की तरह कार्य करती है. कृषि उपज के आगमन और मूल्य, विनमय ऑफर और आवेदन करने आदि सुविधाएँ शामिल हैं. ऐसे में जहाँ कृषि उपज का मंडियों से आवागमन जारी रहता है, वहीं ऑनलाइन मार्किट से प्रक्रिया शुल्क और जानकारियों में गूढ़ता नहीं रहती. 

मार्च 2012 में पिछली सरकार द्वारा लोकसभा में जवाब में कहा गया कि कृषि मंत्रालय ने APMC एक्ट का मॉडल तैयार किया है और इसे विभिन्न राज्यों तथा केंद्रीय शासित प्रदेशों को 2003 में अपनाने हेतु वितरित किया था. किसानों से सीधी मार्केटिंग और ख़रीद, कृषि अनुबंध, सहकारी और निज़ी बाज़ारों की स्थापना, कृषि उपज के लिए विशेष बाज़ार, कमीशन रोधी विनमय, लाइसेंस सिस्टम को बंद कर साधारण पंजीकरण करना, बाज़ारों के विकास हेतु  निजी एवं जनभागीदारी साझेदारी को बढ़ावा, मानकीकरण आदि प्रावधानों को सम्मिलित किया गया था. अब तक कुल 16 राज्यों ने APMC एक्ट मॉडल के आधार पर अपने सम्बंधित एक्ट में  बदलाव  किये हैं.

अन्य मुख्य गौर करने की बात यह है कि कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग ने 2013-14 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि मार्केटिंग रिसर्च एंड इनफार्मेशन नेटवर्क (MRIN ) : यह स्कीम मार्च 2000 में केंद्रीय सेक्टर की स्कीम की तरह किसानो और अन्य उपभोक्ताओं की सहूलियत हेतु कृषि उपज आगमन, मूल्य और जानकारियों को इकट्ठा करने और शोधित करने के उद्देश्य से जारी की गयी. लगभग 300 कृषि उपज के 2000 प्रकार और उनके मूल्यों को इस पोर्टल पे नियमित रूप से अपडेट किया जाता रहा है. लगभग 3200 से ज्यादा बाज़ार केंद्रीय AGMARKETNET पोर्टल से जुड़े हुए हैं और लगभग 2200 बाजार अपना डेटा यहाँ रिपोर्ट करते हैं.

दूसरे शब्दों में कहें तो कृषि उपज सम्बंधित विभिन्न जानकारियों और  मूल्यों आदि को UPA के समय में शुरू किया गया जबकि e -NAM वर्तमान सरकार द्वारा लांच की गयी.

 

कुल कितने नियमित बाज़ारो की e-NAM पर मौज़ूदगी है?

पहला दावा था कि e –ट्रेडिंग प्लेटफार्म 585 नियमित बाज़ारो से श्रेष्ठ मूल्य का निर्धारण करता है.

e – NAM की वेबसाइट पूरे भारत में फैली 585 मंडियों की सूची रखती है किन्तु ये साफ़ नहीं है कि इनमें से लगभग कितने इस ऑनलाइन व्यापार हेतु इस सिस्टम का नियमित उपयोग करते हैं. फिर भी ये 585 देश की कुल APMC बाज़ारो का 9 फीसद ही है. किसानो की दोगुनी आय पर, दलवाई कमिटी रिपोर्ट के भाग 4 के अनुसार देश में कुल 6615 APMC बाज़ार संचालित हैं.

 

लगभग कितने रूपयों का लेनदेन हुआ

दूसरा दावा है कि 41,591 करोड़ रुपयों का लेन देन 164.53 लाख टन कृषि उपज के लिए e-NAM से हुआ.

मार्च 2018 में लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, 90 कृषि उपज प्रकारों के लिए व्यापार योग्य मानक e-NAM पोर्टल पर तैयार किए गए. मार्च 2018 तक 1.63 करोड़ टन की कृषि उपज जिसका मूल्य 40,946 करोड़ है,  e-NAM पोर्टल पर बेची गई.

ऐसे में जहां संख्या ठीक है,  e-NAM पर विनमय हुई कृषि उपज, देश की कुल उपज का मात्र 10 फीसद ही है.

 

 

कितने किसान और विक्रेता इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं?

तीसरा दावा है कि 87.5 लाख से ज्यादा किसान और कृषि उपज विक्रेता पंजीकृत हैं. मार्च 2018 में लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, 85.41 किसान, 55.4 हज़ार कमिशन एजेंट और 1.04 लाख विक्रेता/ख़रीददार इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं.

ऐसे में जहां सांख्यिकी आंकड़े ठीक है, कुल पंजीकृत किसान, देश में कृषि पर निर्भर किसान परिवारों का मात्र 7 फीसदी है.

 

फेक्टली की अनुमति से प्रकाशित

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