मेरी कहानी

मेरी कहानी: देश में अच्छी नौकरियों की कमी के कारण पोस्ट ग्रेजुएट छात्र ने मजबूरी में Zomato के डिलीवरी बॉय के रूप में काम किया

तर्कसंगत

February 21, 2019

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हाल के दिनों में, हम सभी ने खबरों की सुर्खियों में देखा होगा कि जो लोग पीएचडी के स्कॉलर्स और ग्रेजुएट हैं वह भारी संख्या में कुछ नौकरियों के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिनके लिए वह सभी जरुरत से ज्यादा शिक्षित हैं. नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) के हाल ही में लीक हुए डेटा बताते हैं कि वर्तमान में आधे कर्मचारी बेरोजगार हैं और वह किसी भी आर्थिक गतिविधि में योगदान भी नहीं दे रहे हैं. नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने NSSO के आंकड़ों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि पर्याप्त संख्या में रोजगार दिए जा रहे हैं, लेकिन इस बात को स्वीकार किया जाता है कि शायद सरकार “उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन नहीं कर रही है”. नौकरी के बाजार में संकट से अनजान अधिकांश लोगों की तरह, कोलकाता निवासी शौविक दत्ता एक झटके में थे, जब उन्हें महसूस हुआ कि उनके खाने का ऑर्डर देने वाले व्यक्ति के पास कॉमर्स की पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री है. दत्ता ने इस घटना के बारे में और देश में उपलब्ध नौकरियों के संकट और गुणवत्ता के बारे में बात करने के लिए फेसबुक का सहारा लिया.

 

संभवतः जोमाटो से खाना ऑर्डर करने पर, मुझे केवल एक बार ही पछतावा हुआ.

यह उन सामान्य चेकआउटों में से एक था, जो मेरे डिलीवरी एजेंट के विवरण को अपडेट करने के बाद मुझे खाना आर्डर करने से रोक रहा था.

मेराज ने भी यही कहा था, और उसके नीचे पोस्ट ग्रेजुएट इन कॉमर्स लिखा था.

जल्द ही एक फोन आया, “साहब मैं आ गया हूँ”, मै खुद खाना लेने के लिए सामने के दरवाजे पर गया, जैसे ही मैंने देखा कि एक सौम्य मुस्कान के साथ एक व्यक्ति खड़ा है, तभी उसने मुझे पार्सल सौंप दिया.

फिर मेरे जीवन का सबसे शर्मनाक पल आया. जिसमे वह हाथ जोड़कर कांपती हुई आवाज में कहा- सर, कृपया मुझे रेटिंग दे दीजियेगा.

हमारी एक हल्की-फुल्की बातचीत हुई, जहां मुझे पता चला कि वह कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.कॉम ग्रेजुएट था और उसने फाइनेंस या निवेश बैंकिंग या कुछ इसी तरह में PGDM भी किया है.

हमने इस देश के लिए क्या किया है. हमने इस राज्य के लिये भी क्या किया है. जहां एक मास्टर ग्रेजुएट कर चुका छात्र, इस समय के ग्रेजुएट टीनएजर्स को खाना डिलीवर कर रहा है.

यह क्या संदेश देता है, दूसरो को.

इस देश को बदलने की जरूरत है. इस राज्य को भी बदलने की जरूरत है. नौकरियां बनाने/पैदा करने की जरूरत है, हम बहुत कठिन समय से गुजर रहे हैं.

इस देश को बदलना पड़ेगा .

 

Probably the only time i regret ordering food from ZomatoIt was one of those usual checkouts ordering food,when i was…

Posted by Shouvik Dutta on Wednesday, 6 February 2019

 

पढ़े लिखे लोगों को हम किस तरह की नौकरी दे रहे हैं ?

उपरोक्त मामले को ऐसे मामले के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए, जहां कोई डिलीवरी बॉय की नौकरी या कुछ नौकरियों में गरिमा की कमी को देखा जा रहा है. कोई भी नौकरी बड़ी या छोटी नहीं होती है, एक डिलीवरी बॉय को किसी भी सफेद कालर वाली जॉब करने वाले के बराबर में सम्मानित किया जाना चाहिए. यहां तक कि एक कंपनी के रूप में ज़ोमाटो, अपने डिलीवरी बॉय की प्रोफाइल देता है, इसलिए हम उन्हें एक व्यक्ति के रूप में जानते हैं, न कि जो सिर्फ हमारे खाने को पहुँचाने वाले अनजान शख़्स के तौर पर.

हालांकि, इसी के साथ किसी को यह भी समझना चाहिए कि कॉमर्स में पोस्ट-ग्रेजुएट के छात्र, इंजीनियर या एमबीए छात्र के को, उस जॉब के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. वह व्यक्ति डिग्री पाने के लिए अपना समय,पैसा मेहनत उसमें लगता है. यदि अपनी मर्ज़ी से कोई और काम करता है तो बात अलग है, मगर जो काम उसकी पसंद का नहीं है, और जिसे करने के लिए आपको केवल 12वीं  पास होना ही काफी है और नौकरी की कमी के कारण आप यह कर रहे इन हैं तो यह बात चिंताजनक है.

 

पोस्ट ग्रेजुएट केवल डिलीवरी बॉय का काम नहीं कर रहे 

दत्ता ने जो अनुभव किया वह कोई नयी बात नहीं है. वास्तव में, हाल ही में, लगभग 4,000 छात्रों ने जिसमे ज्यादातर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट और एमबीए के छात्र है जिन्होंने कथित तौर पर चेन्नई, तमिलनाडु में राज्य विधानसभा सचिवालय में 14 सेनेटरी वर्कर्स की नौकरी के लिए आवेदन भरा है.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, बड़ी संख्या में आवेदक केवल इंजीनियरिंग और एमबीए ग्रेजुएट के नहीं थे, बल्कि कॉमर्स, कला और विज्ञान के क्षेत्र से संबंधित थे. इसके अलावा, लगभग 3930 उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड भी भेजे गए थे. 14 खाली स्थानों में से, 10 सफाई कर्मचारी की भूमिका के लिए और 4 विधानसभा सचिवालय में सैनिटरी वर्कर्स के लिए नामित किए गए हैं. इस बीच, दोनों का वेतन 15,700 रुपये से 50,000 रुपये के स्लैब में तय किया गया था. जबकि कोई योग्यता का उल्लेख नहीं किया गया था, पदों में बस शारीरिक फिटनेस अनिवार्य थी.

एक और खबर के अनुसार  2018 के अगस्त में यूपी पुलिस के टेलीकॉम विंग में 54,230 ग्रेजुएट, 28,050 पोस्ट ग्रेजुएट और 3,740 पीएचडी धारकों ने मैसेंजर चपरासी के 62 पदों के लिए आवेदन किया है.

 

तर्कसंगत को उम्मीद है कि सरकार नौकरी की स्थिति का संज्ञान लेगी और इस समस्या से निपटने की दिशा में काम करेगी.

 

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