पर्यावरण

एक एनिमल राईट एक्टिविस्ट जिसने 2000 सांपों और जंगली जानवरों को बचाया, अब कुत्तों के लिए एक होटल चलाता है.

तर्कसंगत

February 22, 2019

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“मुझे चेन्नई में बाढ़ के समय सांपों को अपने घर में रखना पड़ता था क्योंकि सड़क और रोड बंद थीं. जब बाढ़ खत्म हो गयी तो मैंने सांपों को वन विभाग को दे दिया” 26 साल के श्रवण कृष्णन ने हमें बताया, जो अब कुत्तों के लिए एक होटल चलाते हैं.

श्रवण कृष्णन हमेशा से एक उम्दा क्रिकेटर बनना चाहते थे. एक युवा खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने कई राज्य स्तरीय मैचों में भी भाग लिया लेकिन  रीढ़ की हड्डी में चोट के बाद वो कभी क्रिकेट नहीं खेल पाये. उनका दिल टूट गया था सारे सपने लगभग बिखर चुके थे लेकिन श्रवण ने अपनी ऊर्जा को एक अच्छे उद्देश्य में लगाना उचित समझा और जानवरों की भलाई के लिये काम करना शुरू किया.

 

 

जब श्रवण छोटे थे तो आम बच्चों के तरह कार्टून की जगह नेशनल जियोग्राफिक देखते थे जिसमें उन्हें बहुत ख़ुशी और आनंद मिलता था. बचपन से ही उन्हें जानवरों से लगाव था और वे हमेशा उनकी देखभाल किया करते थे. अपनी रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के बाद उन्होंने क्रिकेट से जो पैसे कमाये थे उससे कुत्तों के लिए एक कमरा किराये पर लिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर जानवरों की तस्वीरें डालीं जिसकी उन्हें बहुत शानदार प्रतिक्रिया मिली. चूंकि कमरा छोटा था जिस वजह से सारे कुत्तों उसमें नहीं आ पाते थे. यहाँ जानवरों के लिये खुली जगह भी नहीं थी तब उन्होंने कुत्तों के लिए एक होटल खोलने का फैसला किया जहाँ उनके लिये खुली जगह हो और उनकी देखभाल भी अच्छे से हो सके. होटल में वातावरण स्थिर रखने के लिये कुत्ता घर है. यहाँ कुत्तों के लिये एक ग्रूमिंग पार्लर, स्विमिंग पूल, उन्हें ले जाने और वापस छोड़ने की सुविधा भी है.

 

 

तर्कसंगत से श्रवण ने बताया “चेन्नई एक अनूठा शहर है जहाँ बहुत सी हरे-भरी जगह हैं जैसे कि गुइंडी नेशनल पार्क, नानमंगलम रिजर्व फॉरेस्ट, थियोसोफिकल सोसायटी, मार्शलैंड्स और समुद्र तट. इस शहर के कई रूप हैं जहाँ घूमना हमेशा मज़ेदार होता है. इसी से उन्हें और अधिक खोज करने की प्रेरणा मिली और उन्होंने जंगली जानवरों के लिए काम करने की योजना बनाई.” उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों को बचाने से पहले यह जानना जरूरी है कि उन्हें संभाला कैसे जाये.

श्रवण वन विभाग के साथ काम करते हैं और अब तक 2000 सांपों को बचा चुके हैं. जरुरत पढ़ने पर वन विभाग भी उनसे संपर्क करता है. सिर्फ दो लोग से शुरूआत करने वाले श्रवण के साथ उनके 10 दोस्त भी जुड़ गये जो अब एक उत्साही टीम में परिवर्तित हो चुके हैं. उन्होंने कई जानवरों जैसे हिरण, कला हिरन, छिपकली, बंदर, जंगली बिल्ली और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को बचाया है.

 

 

श्रवण पिछले 11 वर्षों से Olive Ridley Sea प्रोग्राम का हिस्सा हैं जो कछुओं की प्रजातियों के लिये काम करती हैं और सैकड़ों जागरूकता शिविरों का आयोजन करती है. वह अब जंगली जानवरों के लिए एक बचाव केंद्र शुरू करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

वह अपनी बात रखते हुये कहते हैं कि “हम इंसान जानवरों और पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुँचा चुके हैं और अब इकोसिस्टम को बनाये रखने के लिए बाकी बची  प्रजातियों को बचाने का समय है. लोग सांप से डरते हैं और सोचते हैं कि सभी सांप जहरीले हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि सभी सांप खतरनाक नहीं होते हैं. सांपों के खतरनाक होने का यह विचार इतना गहरा है कि जब मैं उन सांपों को उठाते हूँ जो जहरीले नहीं हैं तो लोगों को लगता हैं कि मैं भगवान हूँ.

 

 

श्रवण ने चेन्नई बाढ़ के दौरान बहुत साँपों और जानवरों को बचाया. उन्होंने अपने घर में सांपों को रखा क्योंकि वहां कोई परिवहन नहीं था और जब बाढ़ खत्म हो गई तो उन्हें वन विभाग को सौंप दिया.

श्रवण बताते हैं कि सांपों को बचाते हुए उन्होंने सीखा कि सांप प्रतिक्रिया बहुत जल्दी करते हैं. उन्हें जल्द से जल्द सांपों को बचाना होता हैं क्यूंकि लोगों डर और गलत सोच विचार से साँपों मार देते हैं. वे मानते हैं कि लोग हर जानवर को खतरनाक समझते हैं चाहे वो उन्हें कोई भी हानि ना पहुंचाये.

 

 

वह खुश हैं कि लोग उनके काम की तारीफ करते हैं और उसे स्वीकारते हैं. उनके माता-पिता उनकी सबसे ताकत हैं और उनके हर फैसले में उनका साथ देते हैं.

श्रवण अब जानवरों की भलाई के लिये और इकोसिस्टम के संतुलन को बनाये रखने के लिए कार्यक्रम करते हैं साथ ही बच्चों को इसके प्रति शिक्षा भी देते हैं.

 

 

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