पर्यावरण

भारत का पहला हाथियों के लिये चिकित्सा केंद्र मथुरा, यूपी में खोला गया.

तर्कसंगत

Image Credits: wildlifesosindia

February 25, 2019

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उत्तर प्रदेश में, फराह ब्लॉक, मथुरा के चुरमुरा गांव में हाथियों के लिए एक विशेष अस्पताल खोला गया है. इस अनूठे अस्पताल में वायरलेस डिजिटल एक्स-रे, लेजर उपचार, डेंटल एक्स-रे, थर्मल इमेजिंग, अल्ट्रासोनोग्राफी, हाइड्रोथेरेपी और हाथियों को रोगों से बचाने के लिये ऐसी ही बहुत सी सुविधाएं हैं.

आगरा मंडल के कमिश्नर अनिल कुमार जी ने हाथी के लिये बने पहले अस्पताल का उद्घाटन किया था. अस्पताल पूरी तरह से निजी दान और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सी.एस.आर.) समर्थन के साथ बनाया गया है. एक एनजीओ – वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस. के बगल में हाथीयो के संरक्षण और देखभाल केंद्र (ईसीसीसी) बनाया गया है जिसे वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस. द्वारा ही संचालित किया जायेगा.

 

अस्पताल द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं

दी वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस. एलीफैंट हॉस्पिटल को घायल, बीमार या जराचिकित्सा हाथियों के इलाज के लिए बनाया गया है और हाथियों को उठाने के लिए एक मेडिकल होइस्ट से लैस किया गया है, जिसमें महत्वपूर्ण देखभाल, पैथोलॉजी प्रयोगशाला, डिजिटल वेयिंग स्केल, एलीफेंट रेस्ट्रेनिंग डिवाइस (ईआरडी) के साथ एक सुचारूरूप से अन्दर के उपचार के साथ सालो तक चिकित्सा प्रक्रिया की व्यवस्था है. एक अवलोकन स्थान से पशु चिकित्सा के छात्रों और इंटर्न/प्रशिक्षण के छात्र को सुरक्षित दूरी से हाथी के रोजमर्रा के उपचार और निरीक्षण करने के लिये तैयार करेगा.

भारत के पहला हाथीयो के अस्पताल लगभग बारह हजार वर्ग फीट के निर्मित क्षेत्र के साथ जंबो आकार का है. इसमें क्लोज सर्किट इंफ्रा-रेड सीसीटीवी कैमरों का उपयोग करके हाथीयो के उपचार की निगरानी एवं हाथियों की रात भर निगरानी की जाती है. वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा, हाथी की चिकित्सक देखभाल, मानवीय हाथी प्रबंधन और पशु चिकित्सा प्रक्रियाओं पर लोगो में उत्साह भरने के लिए; प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

एनजीओ वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने दी हिंदू से बात करते हुए कहा, “सुविधाए हमें बेहतर देखभाल करने की शक्ति देगी, और धीरे-धीरे हाथियों के मानवीय प्रबंधन के लिए एक स्थान के रूप में विकसित होगी”.

इसके अतिरिक्त, वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक गीता शेषमणि ने कहा कि यह अस्पताल हाथियों के मानवीय प्रबंधन के लिए भारत को मानचित्र में विद्वानों के/खोज वाले स्थान के रूप में रखेगा. उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम भारत में हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए एक आगे बढ़ने का प्रयास जैसे साबित होगा.

श्रीमती मेनका गांधी, केंद्रीय कैबिनेट महिला और बाल विकास मंत्री जी ने कहा, “यह बहुत गर्व की बात है कि भारत देश आखिरकार जिसे एक शानदार जानवरों की विरासत वाला देश कहा जाता है, वह कल्याण और देखभाल के लिए वह ध्यान आकर्षित कर रहा है जिसका वह हकदार हैं. मैं करुणा और पूरी निष्ठा के साथ, संकट में हाथियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए; इस अद्भुत अस्पताल की स्थापना के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस के साथ सहयोग करने के लिए यूपी के मुख्य वन्यजीव वार्डन और वन विभाग को बधाई देती हूं”.

 

पहला हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा 2010 में स्थापित किया गया था, जो एक गैर-लाभकारी संस्था है और अस्पताल की सुचारू रूप से कार्य करने के पीछे है. दी इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया कि एनजीओ वर्तमान में 20 हाथियों की देखभाल करता है, जिन्हें विशेष उपचार की जरूरत है.

 

हाथी के साथ अक्सर ख़राब व्यवहार किया जाता हैं

भारत में हाथियों को भगवान गणेश के अवतार के रूप में माना जाता है, जो हिंदू मान्यता के अनुसार, बाधाओं का निवारण, कला और विज्ञान के संरक्षक, बुद्धि और ज्ञान के स्वामी हैं. भारत की संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा हाथियों की राजसी उपस्थिति और ऐतिहासिक महत्व के लिए है. त्योहारों और धार्मिक यात्राओ में, ज्यादातर देश के दक्षिण में, अक्सर हाथी शामिल होते हैं. हालांकि, पशु अधिकार के कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके महावत अक्सर इन विशाल जानवरों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं. कई हाथी बिजली के झटको, जहर, अवैध शिकार और रेल दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं. रेउटर की रिपोर्ट के मुताबिक, कई घटनाओं में, हाथियों को बंदी बना लिया गया और उन्हें काबू में करने के लिए धातु के हुक से परेशान किया गया.

गीता शेषमणि ने कहा, “मुझे लगता है कि एक अस्पताल के निर्माण से हम इस तथ्य को बता रहे हैं कि हाथियों को किसी भी अन्य जानवर की तुलना में अधिक कल्याणकारी उपाय चाहिए”.

 

तर्कसंगत वाइल्डलाइफ एसओएस और उनके प्रयासों को सलाम करता है जो अपने आप में ही बहुत श्रेष्ठ/उत्कृष्ट है.

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