मेरी कहानी

मेरी कहानी: “मुझे कभी भी यह एहसास नहीं हुआ कि मेरा काम एक लड़की के लिए बहुत कठिन ‘माना जाता है”

तर्कसंगत

Image Credits: humansofbombay/facebook

February 25, 2019

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“मेरे माता-पिता भी पत्थर के खदान में काम किया करते थे, इसलिए मैंने उन्हें यह काम करते तब से देखा जब से मैं एक बच्ची थी. मैं शुरू से ही मजबूत रही हूँ क्योंकि मुझे इसी तरह पाला गया था. मेरे माता-पिता ने कभी मुझे लाड़-प्यार नहीं किया, और जब वे काम करते थे, तो मुझे अकेले छोड़ दिया जाता था. मैंने पत्थर पर घुटनो के बल चलना सीखा है और यहां तक ​​कि इन पत्थरों पर ही अपना पहला कदम रखा है. यही कारण है कि किसी ने मुझे काम करने का तरीका नहीं सिखाया, मैंने सिर्फ अपने माता-पिता को देखकर सीखा है. उन्होंने कभी भी मेरे साथ अलग व्यवहार नहीं किया या न ही मुझे एक लड़की की तरह पाला और इसलिए मुझे यह विश्वास रहा कि मैं किसी भी लड़के के बराबर काम कर सकती हूँ. मुझे कभी भी इस बात का एहसास नहीं हुआ कि लोगों ने इस काम को एक लड़की के लिए बहुत मुश्किल होने के कारण बहुत मुश्किल ’माना है. मुझे खदान से पत्थर निकालने में कोई समस्या नहीं थी. मुझे मेरा काम पसंद था मैं उस वक़्त भी खुश थी जब उन्होंने मेरी शादी पत्थर के खदान के एक मजदूर से की.

 

मैंने शादी के बाद भी काम करना जारी रखा और भले ही मैं इतने लंबे समय से ऐसा कर रही थी, लेकिन मुझे कभी कोई चोट नहीं लगी या कोई दर्द नहीं हुआ. मैंने कुछ साल पहले अपने पति को खो दिया था और मेरे बच्चे बड़े हो गए हैं – मेरी बेटी कहती है कि वह आगे पढ़ना चाहती है और एक कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करना चाहती है. लेकिन मुझे लगता है, भले ही बच्चे किताबों से बहुत कुछ सीख सकते हैं, लेकिन वे जो सबसे बड़ा सबक सीखते हैं, वह अपने माता-पिता को देखकर होता है – ठीक वैसे ही जैसे मैंने अपने माँ बाप से सीखा और मेरी बेटी ने मुझसे. मुझे गर्व है कि वह एक मजबूत और सुंदर युवा लड़की के रूप में बड़ी हुई है और मुझे पता है कि चाहे जो भी हो, वह कभी भी किसी महिला की शारीरिक या मानसिक शक्ति को कम नहीं समझेगी.”

 

कहानी: ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे

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