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शहीद मेजर की बीवी ने आर्मी परीक्षा पास की, 49 हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद सेना में सम्मिलित होंगी

तर्कसंगत

Image Credits: hindustantimes

February 25, 2019

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आर्मी के मेजर प्रसाद गणेश महादिक 2017 में भारत-चीन सीमा के पास एक आग दुर्घटना में मारे गए थे. अब, दो साल बाद, उनकी विधवा, गौरी प्रसाद महादिक उनकी इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना में शामिल हो रही हैं.

गौरी प्रसाद महादिक ने अपने दूसरे प्रयास में ‘विधवा ’श्रेणी में अपनी सेवा चयन बोर्ड परीक्षाओं को पास किया और चेन्नई में अकादमी में अपना 49 सप्ताह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल हों गई जो इस अप्रैल से शुरू होगी.

हिन्दुतान टाइम्स के अनुसार उन्होंने कहा, “मुझे युद्ध विधवाओं के लिए गैर-तकनीकी श्रेणी में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त किया जाएगा.”

We became friends on 22nd February, 2014, 5 years back and on this same day 5 years now, you gave me your presenceAND…

Posted by Gauri Prasad Mahadik on Friday, 22 February 2019

 

गौरवपूर्ण विरासत

भोपाल में 30 नवंबर से 4 दिसंबर, 2018 के बीच सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) की परीक्षाओं में शामिल होने वाले 16 उम्मीदवारों ने परीक्षा में टॉप किया। फेसबुक पर सेना में शामिल होने की अपनी खुशी को पोस्ट करते हुए, गौरी ने कहा, “5 साल पहले 22 फरवरी 2014 को हम दोस्त बन गए थे और इसी दिन 5 साल बाद, आप मेरी ज़िन्दगी में आये … मुझे 7 बिहार के मेजर प्रसाद गणेश महादिक की बीवी कहलाये जाने पर गर्व महसूस होता है.

“अब मार्च 2020 में मुझे लेफ्टिनेंट गौरी प्रसाद महादिक कहा जाएगा, मैं भी अपने पति की तरह वर्दी और सितारों को पहनूंगी, जो वास्तविक सितारों की तुलना में कई गुना ज़्यादा चमकते हैं,” उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है.

वह कहती हैं कि यह एक सुखद संयोग है क्योंकि उनके साक्षात्कार के दौरान उन्हें अपने पति के समान ही नंबर मिला- 28. गौरी एक योग्य कंपनी सचिव और वकील हैं. उनकी शादी 2015 में मेजर प्रसाद से हुई. उन्होनें अपने पति के शहीद होने के बाद वर्ली में अपनी लॉ फर्म छोड़ दी. उन्होनें खुद को परीक्षा के लिए तैयार करना शुरू कर दिया.

हिंदुस्तान टाइम्स ने गौरी के हवाले से कहा कि चेन्नई में ओटीए में प्रशिक्षण के बाद प्रसाद मार्च 2012 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे. वह बिहार रेजिमेंट की 7 वीं बटालियन में तैनात सबसे अच्छे अधिकारियों में से एक थे, ”गौरी ने कहा उन्हें संगी, खेल और एक समर्पित अधिकारी के रूप में याद किया जाता है.

 

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