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यह आईएएस कोच ब्रेल लिपि में पुस्तकों के साथ दृष्टिहीन यूपीएससी उम्मीदवारों को पढ़ाते हैं

तर्कसंगत

February 26, 2019

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वर्षों से, सरकारी सेवाओं में दृष्टिबाधित व्यक्तियों की संख्या बढ़ रही  है. हालांकि, उन्हें अभी भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो उपयुक्त बुनियादी ढांचे की पहुंच से लेकर उपयुक्त मटेरियल  सामग्रियों की अनुपलब्धता तक है उदाहरण के लिए, यूपीएससी की तैयारी करने वाला एक दृष्टिबाधित आकांक्षी केवल ब्रेल में पूरे पाठ्यक्रम का 20% ही प्राप्त कर सकता है. हैदराबाद के अकीला राघवेंद्र ने 2016 में जब दृष्टिबाधित यूपीएससी उम्मीदवारों की कोचिंग शुरू की थी, यह दुर्दशा को करीब से देखा.

“मान लीजिए कि अगर भूगोल में 4 मुख्य पुस्तकें हैं, तो एक आकांक्षी को विषय की पूरी समझ  के लिए सभी 4 पुस्तकों की अच्छी तरह से अध्ययन करने की आवश्यकता है. अफसोस की बात का है कि, उनमें से केवल 2 ब्रेल लिपि में उपलब्ध हैं. यदि नेत्रहीन छात्र अन्य 2 को पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें पूरी किताब पढ़ने के लिए किसी और पर निर्भर रहना होगा,” राघवेंद्र बताते हैं, जिन्होंने हाल ही में ब्रेल में यूपीएससी के लिए पहली व्यापक अध्ययन सामग्री प्रकाशित की है और  देश भर में दृष्टिबाधित सिविल सेवा के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए नए दरवाजे खोले है.

 

 

एक दुर्घटना में वह लगभग नेत्रहीन हो गये थे

अकेला राघवेंद्र के साथ एक भयानक दुर्घटना हुई, जिसके कारण उन्हें छह महीने तक बिस्तर पर आराम करना पड़ा.  कई सर्जरी के बाद, जब वह ठीक होने के रास्ते पर थे, तो एक डॉक्टर ने उन्हें बताया कि किसी चमत्कार से उनकी आंखों की रोशनी बच गई थी. इस सच से चौंक गए राघवेंद्र ने सोचा कि क्या होता अगर वह अंधे हो गये होते. इसने उन्हें भारत में उन सैकड़ों नेत्रहीन युवाओं के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया, जो सुलभ सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण उज्ज्वल भविष्य से वंचित थे.

अपनी युवावस्था में एक संपादक और लेखक के रूप में काम करते हुए, अकेला राघवेंद्र ने सिविल सेवा के उम्मीदवारों का मार्गदर्शन करने के लिए अपने करियर की दिशा बदल दी. उन्होंने 350 से अधिक सफल उम्मीदवारों का प्रशिक्षित  किया है जो अब शीर्ष स्तर के सरकारी अधिकारी हैं, जिनमें 40 से अधिक IAS अधिकारी शामिल हैं. 2010 से, राघवेंद्र यूपीएससी, स्नातक स्तर, बैंक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए दृष्टिबाधित और शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों को प्रशिक्षित कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरा सपना है कि मैं अपने नेत्रहीन छात्रों को शीर्ष रैंक के आईएएस अधिकारी बनता देखूं.”



नेत्रहीन और शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवारों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याएं

“अधिकांश उम्मीदवारों को पता नहीं है कि सेवा में कई नेत्रहीन और शारीरिक रूप से अक्षम ब्यूरोक्रेट्स हैं,” वे कहते हैं.


उनकी समस्याओं को तीन स्तर के  में सूचीबद्ध किया जा सकता है. पहले उनके पसंदीदा स्वरूप में अध्ययन सामग्री के  स्रोत का अभाव है. सामान्य विद्यार्थी बाजार में उपलब्ध यूपीएससी की बहुत सारी पुस्तकों की जानकारी संकलित करके तैयार करते है. इनमें से ज्यादातर किताबें कागज पर छपी हैं. एक नेत्रहीन उम्मीदवार के लिए पेपरबैक और अध्ययन सामग्री के ढेर के माध्यम से स्कैन करना और नोट्स लिखना असंभव है. अब तक, ब्रेल में एक भी पुस्तक नहीं लिखी गई है. ऑनलाइन व्याख्यान या तो ऑडियो-विजुअल प्रारूप में होते हैं या पर्याप्त प्रामाणिक नहीं होते हैं. राघवेंद्र की व्यापक पुस्तक, जिसका विवरण नीचे दिया गया है, उनके लिए काम को बहुत आसान बनाता है.

दूसरी शारीरिक रूप से अक्षम उम्मीदवारों के लिए, नियमित रूप से कोचिंग केंद्रों में भाग लेना संभव नहीं है, खासकर अगर दूरदराज के इलाकों से आते हैं. भारत में विकलांग-अनुकूल परिवहन अभी भी एक दुर्लभ चीज़ है.

अंत में, परीक्षा लिखने के लिए प्रोफेशनल राइटर को खोजना एक बड़ी चुनौती है. यूपीएससी को निस्संदेह भारत में सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है. चूँकि अधिकांश दृष्टिहीन और शारीरिक रूप से अक्षम उम्मीदवार अपनी परीक्षा नहीं दे सकते हैं, वे पूरी तरह से स्क्रिब पर निर्भर हैं. लेकिन योग्य स्क्रिब मिलना मुश्किल है जो छात्रों के उत्तरों का सही से लिख पाए.



ब्रेल और ऑडियो-बुक प्रोजेक्ट

2016 में यूएसए की अपनी यात्रा के दौरान, राघवेंद्र ने वहां कई विशेष संस्थानों का दौरा किया. “मैं यह देखकर चकित था कि वे नेत्रहीन और शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों को इतनी सारी सुविधाएं दे रहे थे,” उन्होंने कहा, “इससे मुझे भारतीय छात्रों के लिए तुरंत कुछ करने की प्रेरणा मिली.

अक्टूबर 2016 में शुरूआत हुई राघवेंद्र ने अपने छात्रों सागर और शिवप्रकाश की मदद के लिए पंजीकरण किया, जो दोनों नेत्रहीन सरकारी अधिकारी हैं, जो अब सिविल सेवाओं की तैयारी कर रहे हैं. साथ में, उन्होंने UPSC के लिए लगभग 30-35 महत्वपूर्ण पुस्तकों को ऑडीओबूक फॉर्मेट में तैयार किया .

जल्द ही उन्होंने ब्रेल में पुस्तक का अनुवाद किया और उसी की 10 मास्टर कॉपी तैयार कीं. यह प्रोजेक्ट फरवरी 2018 के आसपास पूरी हुई थी. यह सराहनीय  है कि उन्होने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी बचत से पांच लाख से अधिक का योगदान दिया है.

 

 

“मेरी पुस्तक की ताकत यह है कि मैंने पूरे पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण विवरण को संश्लेषित किया है,” वे बताते हैं कि पहले से मौजूद ऑडियोबुक के विपरीत, उनकी पुस्तक छात्रों पर जानकारी का भारी बोझ नहीं डालती है. पुस्तक में पहले से ही सभी विषयों के मुख्य बिंदुओं का सावधानीपूर्वक संग्रह किया गया है.
“दो छात्रों और हमारे कई स्वयंसेवकों के फीडबैक को शामिल करने के बाद पुस्तक का अंतिम संस्करण प्रकाशित किया गया था. अतः पुस्तक को संपूर्ण माना जा सके. मैं एक परफेक्शनिस्ट हूं, जो आप कह सकते हैं. उन्होंने हँसते हुए कहा .

अब तक उन्होंने हैदराबाद में दृष्टिहीन छात्रों और प्रशिक्षकों के बीच कॉपी वितरित की हैं और इच्छा जताई है कि पुस्तक से अधिक उम्मीदवारों को लाभ मिले .

ऑडियोबुक उनकी वेबसाइट पर बिल्कुल मुफ्त में उपलब्ध हैं: http://online-ias.com/  केवल वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कर आप इसे भारत में कहीं से भी पढ़ सकते हैं. “अब किसी भी शारीरिक रूप से बाधा वाले किसी भी छात्र को किसी भी प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर में भाग लेने के लिए दूर की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं है” . उन्होंने इन उम्मीदवारों के लिए  दिनचर्या भी तैयार की है.



आम मुश्किलें 

राघवेंद्र बताते हैं, ”इस प्रोजेक्ट को अंजाम देने की यात्रा आसान नहीं थी. “मैंने कभी पैसे को समस्या नहीं माना. मैं इन युवाओं की मदद करने में अपनी बचत खर्च करने से कभी नहीं हिचकिचाता. हालाँकि, मुझे लोगों से बहुत कम नैतिक समर्थन और प्रोत्साहन मिला है.”

अब तक राघवेन्द्र ने 1500 से अधिक पन्नों  को ऑडियोबुक में सफलतापूर्वक परिवर्तित किया है. हालाँकि, उनका काम केवल आधा हुआ है क्योंकि और 1500 पेज अभी भी रिकॉर्ड किए जाने बाकी हैं. उनका संगठन सक्रिय रूप से स्पष्ट अभिव्यक्ति और उच्चारण वाली महिला शिक्षकों की तलाश कर रहा है जो ऑडियोबुक के लिए आवाज-कलाकारों के रूप में स्वयंसेवक बन सके. यदि आप उनके अद्भुत अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आप [email protected] या 9849311109 पर अकेला राघवेंद्र का संपर्क कर सकते हैं.



अकेला राघवेंद्र फाउंडेशन

मुख्य रूप से सेल्फ फंडेड अकेला राघवेंद्र फाउंडेशन उन छात्रों के बीच करियर मार्गदर्शन को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, समुदायों और समर्पित व्यक्तियों के साथ लाइफ बिल्डिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन करता है, जिनके पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर नहीं है.

प्रशिक्षित स्वयंसेवक कम आय वाले परिवारों के बेरोजगार ग्रामीण युवाओं के लिए स्किल और पेरोनालित्य डेवलपमेंट क्लास चलाते हैं. उन्होंने 100 से अधिक स्कूलों में सफलतापूर्वक अंग्रेजी, सोशल साइंस, वैज्ञानिक और पर्यावरण जागरूकता के लिए कक्षाएं आयोजित की हैं. अकेला फाउंडेशन अनाथ और नेत्रहीन बच्चों को शैक्षिक सहायता भी प्रदान करता है, साथ ही उनके घरवालों को कपड़े, किताबों और अन्य जरूरतों के लिए पैसे भी देता है.

संस्थापक खुद एक अच्छी कैरियर की उम्मीद के साथ  छात्रों को प्रोत्साहित करने वाले प्रेरक व्याख्यान देने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों की यात्रा करते हैं.

 

तर्कसंगत का तर्क

सिविल सेवा के उम्मीदवारों का पर्याप्त प्रतिशत नेत्रहीन या शारीरिक रूप से अक्षम हैं. पूरे भारत में हजारों कोचिंग संस्थान नियमित उम्मीदवारों को हर संभव मदद प्रदान करते हैं, लेकिन इन उम्मीदवारों की ज़िम्मेदारी में केवल अकेला राघवेंद्र ही सबसे आगे हैं जो नेत्रहीनों के लिए ब्यूरोक्रेसी में जाने की एक मात्र सीढ़ी है. तर्कसंगत उनकी अविश्वसनीय पहल को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि उनकी किताब कई आशावादियों की मदद करती है.

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