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पीएम मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन करते हुए कहा “युद्ध स्मारक हमें हमारे सैनिकों की वीरता की याद दिलाता रहेगा”

तर्कसंगत

Image Credits: Twitter/PM Modi

February 26, 2019

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25 फरवरी को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया, जो नई दिल्ली में इंडिया गेट परिसर में स्थित है. उन्होंने उन जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अपना जीवन कर्तव्य-पालन पर लगा दिया. “हमारे सशस्त्र बल दुनिया में सबसे मजबूत हैं. उन्होंने हमेशा देश के सामने हर चुनौती का सामना किया और अपनी पूरी ताकत से जवाब दिया है’ शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए, पीएम मोदी ने पत्थर की ओबिलिस्क के नीचे ज्योति जलाई.

 

 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय युद्ध स्मारक परिसर 40 एकड़ में फैला हुआ है. कॉम्प्लेक्स में एक केंद्रीय ओबिलिस्क, एक अनन्त लौ और छह कांस्य भित्ति चित्र शामिल हैं, जो भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध दिखा रहे हैं.

 

 

मेमोरियल में 21 परम वीर चक्र से सम्मनित शहीदों की मूर्तियों को खड़ा किया गया है, जिनमें सूबेदार मेजर (हनी कैप्टन) बाना सिंह (सेवानिवृत्त), सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव और सूबेदार संजय कुमार शामिल हैं. ये तीनों भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं. स्मारक की 16 दीवारों पर, 25,942 शहीद सैनिकों के नाम अंकित किए गए हैं.1947,1962, 1965,1971 और 1999 के युद्धों के दौरान शहीद हुए सैनिकों के अलावा, जिन्होंने श्रीलंका में पीस कीपिंग फोर्स ऑपरेशन के दौरान अपनी जान गवाई, उनके नामों का भी उल्लेख है.

स्मारक में चार संकेंद्रित मंडलियों वाला एक लेआउट भी है. ये चार वृत्त हैं अमर चक्र (अमरत्व का वृत्त), वीरता चक्र (शौर्य का वृत्त), त्याग चक्र (बलिदान का वृत्त) और रक्षक चक्र (सुरक्षा का वृत्त).

स्मारक के बारे में, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह हमें और आने वाली पीढ़ियों को “सैनिकों की वीरता और उनकी समर्पित सेवा” के बारे में याद दिलाएगा. पीएम मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि देशवासियों के लिए, स्मारक का दौरा करना एक पवित्र स्थान की तीर्थ यात्रा जैसा होगा. उन्होंने यह भी कहा कि वह हमेशा इस तथ्य से हैरान थे कि ऐसा स्मारक पहले मौजूद नहीं था.

 

मेमोरियल पहली बार 1960 में प्रस्तावित किया गया था

जैसा कि द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि स्मारक 176 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. दिलचस्प बात यह है कि इस तरह के स्मारक का प्रस्ताव पहली बार 1960 में किया गया था. बाद के वर्षों में, इसके लिए कई बार मांग की गई थी. 2012 में, तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि स्मारक इंडिया गेट पर बनाया जाएगा. हालाँकि, उस समय दिल्ली की सीएम शीला दीक्षित और कार्यकर्ताओं ने इस स्मारक के लिए प्रस्तावित स्थल का विरोध किया. इसके साथ ही कैबिनेट नोट को पेश करने की कोशिश को नाकाम कर दिया गया.

अक्टूबर 2015 में, कैबिनेट ने 500 करोड़ की परियोजना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी. दिसंबर में, सी हेक्सागोन में निर्माण को मंजूरी दी गई थी. 2016 में स्मारक के डिजाइन पर निर्णय लेने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था और मार्च 2017 में, WeBe Design Ltd के योगेश चंद्रहासन द्वारा डिजाइन को चुना गया था. विजेता को तय करने के लिए सौंपा गया जूरी का नेतृत्व वास्तुकार और योजनाकार क्रिस्टोफर बेनिंगर द्वारा किया गया था. अंत में, फरवरी 2018 में, एनसीसी लिमिटेड, हैदराबाद ने निर्माण शुरू किया.

 

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