पर्यावरण

[वीडियो] लीजिये #झोला चैलेंज और प्लास्टिक को कहिये अलविदा

तर्कसंगत

February 27, 2019

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भारत बहुत तेज दर से आगे बढ़ रहा है और आने वाले सालों में एक बड़ी आर्थिक शक्ति बन सकता है. हालाँकि निस्संदेह यह एक ऐसे देश के लिए अच्छी खबर है जिसे दुनिया ने तीसरी श्रेणी का दर्जा दिया है. लेकिन तेजी से होते इस आर्थिक विकास के साथ यह भी समझना होगा कि बर्बादी की पीढ़ियां भी बदल रही हैं. देश में प्लास्टिक कचरे की मात्रा का होना सबसे बड़ी चिंता का विषय है. प्लास्टइंडिया फाउंडेशन के अनुसार, साल 2017 – 18 में भारत में 1.65 करोड़ मिलियन टन प्लास्टिक की खपत हुई है जो एक डरावनी संख्या है.

वैसे तो प्लास्टिक के कई हानिकारक रूप हैं लेकिन दुनिया जिस एक प्लास्टिक से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहा है वह है- प्लास्टिक बैग. यह सच है कि प्लास्टिक बैग से सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है लेकिन ये महासागरों, लैंडफिल, पर्यावरण और जलमार्ग में ज्यादातर पाए जाते हैं. प्लास्टिक बैग सड़ते या गलते  नहीं हैं बल्कि छोटे-छोटे माइक्रोप्लास्टिक में टूट जाते हैं. यह जानकर हैरानी होती है कि दुनिया भर के दुकानदार लगभग 50000 करोड़ रुपये के सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल करते हैं. एक बड़ी बात ये है कि एक व्यक्ति 150 प्लास्टिक बैग एक साल उपयोग करता है. आप सोच सकते हैं कि यह कैसे संभव है लेकिन यह एक कड़वा सच है.

हालाँकि प्लास्टिक से जुड़ी समस्याएं अपमानजनक हैं लेकिन छोटे-छोटे कदमों से इस मुद्दे को दुनिया से खत्म कर सकते हैं. 2019 में भारत सरकार ने ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की मदद  #JHOLA _CHALLENGE नाम से एक पहल शुरू की जिसका उद्देश्य एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक बैग को कम करना है.

 

#Jhola_Challenge क्या है?

शहरी और आवास मंत्रालय-भारत ने प्लास्टिक बैग के उपयोग को रोकने के लिए यह पहल की है. इसके अनुसार लोगों को सात दिनों के लिए प्लास्टिक की थैलियों के जगह झोलों का उपयोग करने का अनुरोध करती है. वैसे लोगों को आश्चर्य होता है कि झोला क्या है? यह कपड़े से बन एक थैला होता है जिसे पुराने ज़माने में इस्तेमाल किया जाता था. अब इसका मतलब साफ है कि यदि लोग खुद अपने झोलों का इस्तेमाल करते हैं तो प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग अपने आप ही कम हो जायेगा.

 

#Jhola_Challenge में कोई कैसे भाग ले सकता है?

यह पहल धरती माता को बचाने के लिए शुरू की गई है इसलिए इसे लेने में कोई बुराई नहीं है. आप कैसे भाग ले सकते हैं:-

  1.       लिंक का उपयोग करके साइन अप करें: # JholaChallenge.
  2.       झोला मोड को सक्रिय करें.
  3.       झोला अंक अर्जित करने के लिए झोला सेल्फी अपलोड करें.
  4.       झोला चैलेंज के लिए 5 दोस्तों को नाम भरें.

जिसे झोला चैलेंजर्स में सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उसे झोला चैंपियन माना जायेगा.

आप अपनी तस्वीर को अपने झोला पावर के निशान के रूप में फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर एक झोला के साथ अपलोड कर सकते हैं और हाँ  #JholaChallenge लिखना ना भूलें. ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की सोशल मीडिया टीम हैशटैग की निगरानी कर रही है और आपके पोस्ट को लाइक या रीट्वीट करेंगी

लोगों ने पहले ही चुनौती लेना शुरू कर दिया है क्या आपने चुनौती ली है अगर नहीं तो किसका इंतज़ार है?

 

 

#Jhola_Challenge का लक्ष्य

झोला अभियान का मुख्य उद्देश्य 10 लाख से ज्यादा प्लास्टिक बैग को खत्म करना और उनकी जगह कपडे के झोलो का उपयोग कराना है. यह देश में प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने में मदद करेगा. झोला चैलेंजर्स की सबसे अधिक संख्या वाले शहर को झोला चैंपियन शहर का खिताब दिया जायेगा

इस खिताब को जीतने में अपने शहर की मदद करें क्योंकि इस चुनौती के लिए देश भर के लोग पहले ही अपना नाम दर्ज करा चुके हैं.

 

 

#Jhola_Challenge का असर

एक शोध के अनुसार, किसी भी नयी आदत अपनाने में 21 दिन लगते हैं. यह अनुमान है कि 7 दिनों में, 4000 से अधिक शहरों में रहने वाले 40 करोड़ से ज्यादा शहरी लोग दुनिया को देखने के तरीके को बदल सकते हैं. ज्यादा झोलों के उपयोग का मतलब है कम प्लास्टिक का उपयोग. हम सब मिलकर दुनिया से प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करके एक उदाहरण स्थापित कर सकते हैं.

तो आगे आयें, लोगो और अपने दोस्तों को इसके बारे में बताकर एक बेहतर भविष्य के लिए कदम उठायें.

यह लेख  शहरी और आवास मंत्रालय , भारत सरकार के सहयोग से लिखा गया है

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