पर्यावरण

भूमि संते: बेंगलुरु में एक बाजार है, जिसमे किसानों और उपभोक्ताओं के बीच की दूरी को खत्म करने का प्रयास किया गया है

तर्कसंगत

February 27, 2019

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निर्माता और उपभोक्ता हर महीने के पहले शनिवार को यहां मिलते हैं. वे बातचीत करते हैं, एक साथ चलते हैं और एक दूसरे के साथ कहानियां साझा करते हैं. यह किसान-उपभोक्ताओ का संपर्क भूमि संते में होता है, जिसकी शुरुआत “भूमि नेटवर्क” द्वारा की गई थी, जो एक NGO है, जो सरजापुर, बैंगलोर में एक स्थायी और पारिस्थितिक विकास के लिए काम कर रहा है.

 

पृथ्वी ही हमारा घर है 

यह नवीन/उत्कृष्ट पहल भूमि नेटवर्क की संस्थापक और ट्रस्टी सीता अनंथासिवन के दिमाग की उपज है. उन्हें प्रकृति आकर्षक लगती है. एक आईआईएम-अहमदाबाद ग्रेजुएट, वह कभी भी ज्यादा सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरियों के लिए इच्छुक नहीं थी, लेकिन वह हमेशा प्रकृति के करीब रहना चाहती थी.

भूमि संते कर्नाटक के बैंगलोर के सरजापुर क्षेत्र और आस पास के जैविक, स्थानीय किसानों को अपने साथ जोड़ता है. उपभोक्ता किसानों से ताजी सब्जियां, तेल, गुड़ और नारियल खरीद सकते हैं. लेकिन जैसे एक सामान्य लेनदेन में होता है, जहां कोई विक्रेता से उत्पाद खरीदता है और यहां, किसानों के साथ सीधे बातचीत करने का उन्हें एक मौका मिलता है.

 

 

ये बाजार सरजापुर के भूमि कॉलेज में लगती है, जो सैकड़ों पेड़ों और तितलियों और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का घर है. कॉलेज की स्थापना 2010 में सीता अनंथासिवन द्वारा की गई थी और यह इकोलॉजी और सस्टेनेबल लिविंग में लॉन्ग टर्म और शार्ट टर्म कोर्स करवाता है.

हमारा उद्देश्य उपभोक्ताओं और उत्पादकों के बीच दूरी को खत्म करना और बच्चों को शामिल करना है. उपभोक्ता अपने बच्चों को ला सकते हैं, और वह भी सीख सकते हैं. बच्चे हमारे भविष्य हैं. “तर्कसंगत के साथ भूमि नेटवर्क के मीडिया और संचार प्रमुख आदिल बाशा ने कहा, हम लोगों को एक साथ आने और स्थानीय इको-प्रोजेक्ट्स में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. ताकि सभी शहर तथा आसपास के लोग इस पहल में भाग लेते रहे.

किसान बाजार, बच्चों के समझने के लिए एक अच्छी जगह है और यह सभी को एक साथ आने के लिए प्रोत्साहित करता है. यह न केवल उपभोग के बारे में है, बल्कि यह अनुभव करने और जुड़ने के बारे में भी है. इनमें 300 से अधिक लोग भाग लेते हैं.

 

प्रेरणा

 

 

हमें बाजार से खाना मिलता है, “हम वास्तव में यह नहीं जानते हैं कि हम जो खाना खाते हैं वह कहाँ से आता है, यह कैसे उगाया जाता है, या इसमें शामिल लोग कौन हैं”. लेकिन जो मानव भोजन का उत्पादन करता है, वह उपभोक्ता से जुड़ा नहीं होता है. भूमि संते  में निर्माता और उपभोक्ता दोनों आमने सामने आते हैं, वह बातचीत करते हैं.” आदिल ने कहा, “हमने दूरी की पैमाने में कटौती की”.

आयोजक भूमि विकास, अपशिष्ट/बेकार वस्तुओ का रीसायकल, छात्रों के लिए मिट्टी के ईंट निर्माण पर भी वर्कशॉप आयोजित करते हैं.

आदिल ने कहा, “हम चाहते हैं कि बहुत अधिक किसान इसमें आए. अन्य लोगों के लिए भी इसी तरह की परियोजनाओं का संचालन करना हमारे लिए एक प्रेरणा है. हमारे कस्बों और शहरों में ऐसे बाजार जरुर होनी चाहिए”.

 

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