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[वीडियो]10 साल के बच्चे भी यहां शराब पीते हैं – 120 लोगों की मौत के बाद परिवारों ने मुद्दे को उठाया

तर्कसंगत

March 6, 2019

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की एक महिला ने बताया “यहां 10 साल के लड़के भी शराब पीते हैं. यह सरकार ही है जो अवैध शराब की बिक्री पर रोक सकती है और कोई नहीं.” 7 फरवरी को भारत के दो राज्यों उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में अवैध शराब पीने से 120 से अधिक लोगों की मौत गई. हरिद्वार और सहारनपुर जिले के कई गाँवों में लोगों की कच्ची शराब पीने से मृत्यु हुई है. चलचित्र अभियान ने 9 फरवरी को सहारनपुर जिले में पीड़ितों के परिवार के मुलाकात की.

 

पीड़ितों का परिवार शोकाकुल है

 

 

रिपोर्ट में बताया गया है कि 120 लोगों को मारने वाली जहरीली शराब यूरिया, एसिड और अन्य हानिकारक रासायनिक पदार्थों से बनी थी. मरने वाले ज्यादातर लोग गरीब थे और दलित समुदाय से थे. सोनू कुमार उन पीड़ितों में से एक थे जिनकी जहरीली शराब पीने से मृत्यु हुई थी. सोनू की मां ने बताया कि सोनू शराब के नशे में घर लौटा था उसने रात का खाना भी खाया था. अगले दिन पूरे परिवार अपनी बहू के साथ डॉक्टर से मिलने चला गया और जब शाम को वापस आये तो सोनू की मृत्यु हो चुकी थी. उनकी मां ने आगे बताया कि हमारी देखभाल करने वाला कोई नहीं है और हमारा भविष्य भी अनिश्चित ही है. शराब पीने से गाँव के ही एक और व्यक्ति सुरेंद्र की भी मौत हुई है जो ठेके पर पेड़ काटते थे. उनकी पत्नी ने बताया “उस रात वो बहुत नशे में घर आये थे यहाँ तक कि उन्होंने रात का खाना भी नहीं खाया और सोने चले गये थे. अगले दिन जब मैं सो कर उठीं तो मेरे पति की मृत्यु हो चुकी थी.”

नरेंद्र चौहान की पत्नी ने उदास मन से हमें बताया कि उनके पति के साथ हुआ है वह उनके सबसे बुरे दुश्मनों के साथ भी नहीं होना चाहिये. उन्होंने बताया कि उनके पति एक शादी में गये थे और कुछ मेहमानों के साथ घर लौटे थे. उन्होंने आगे बताया कि महिलाओं को अपने पति के बारे बहुत कम जानकारी होती है. उनके चार बच्चे हैं और अब आय का कोई स्रोत नहीं है.

उनमें से एक ने कहा कि शराब पीने के बाद नरेंद्र कुछ भी नहीं देख पा रहा था और सिर में दर्द से चिल्ला रहा था. एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वे उन शराब की दुकानों को बंद करने की मांग रहे हैं जो इलाके में जहरीली शराब बेचती हैं.

 

सरकार, पुलिस और नौकरशाह जिम्मेदार

एक ग्रामीण ने बताया कि पुलिस भी इस घटना के बारे में जानती है लेकिन कार्रवाई नहीं कर रही है क्योंकि उन्हें हर महीने दुकानों से रिश्वत मिलती हैं. उन्होंने बताया “प्रशासन जानता है कि शराब की दुकान के पास शराब बेचने का कोई लाइसेंस नहीं है, लेकिन फिर भी उन्होंने इसे बंद नहीं कराया.” उन्होंने आगे सवाल किया कि एक गरीब आदमी यह कैसे जान सकता है कि वह जहरीली शराब पी रहा है.

महिलाओं ने एक सबसे बड़ी समस्या के बारे में बताते हुए कहा कि यहां के पुरुष जितना कमाते हैं उससे ज्यादा पैसा शराब पर खर्च करते हैं. उनका मानना है कि शराब पर पूरी तरह से रोक लगाना चाहिए. हालांकि यह कोई नयी मांग नहीं है और ना ही केवल उत्तर प्रदेश की है.

 

ग्रामीण भारत की समस्याएं शहरी भारत से अलग हैं और शराब जीवन को खत्म कर रही है

कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 2000 महिलाओं ने 30 जनवरी को विधान सभा तक मार्च किया और राज्य में शराब पर रोक लगाने की मांग उठाई.

यह मार्च ‘मद्यपान निषिद्ध आंदोलन’ के नेतृत्व आयोजित किया गया था जिसका नारा था ‘बियर बेड़ा नीर बेकु’ इस मार्च में ग्रामीण कुली कर्मिका संगठन, किसान संगठन, स्वराज इंडिया, स्वराज अभियान जैसे विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल थे.

आंदोलन की शुरुआत 19 जनवरी को चित्रदुर्ग जिले से हुई और 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके मात्र दस दिनों में यह बेंगलुरु पहुंच गया. द न्यूज मिनट के अनुसार, मार्च नौ गांवों में रुका जहां उन्होंने ग्रामीणों के साथ बातचीत कर उन्हें शराब से होने वाली हानि के बारे में बताया. आंदोलन में प्रदेश के 23 जिलों की महिलायें जुड़ीं हैं और हर दिन लगभग 20 किलोमीटर की दूरी करती हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया “अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक सर्वे किया जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों शामिल किया है. इस सर्वे ने देश में नशीली दवाओं और अल्कोहल के दुरुपयोग के बारे में बताया गया है.” AIIMS-दिल्ली के ‘नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर’ (NDDTC) द्वारा संचालित “Magnitude of Substance Abuse in India” के आंकड़ों से पता चला है कि 10-75 साल के लगभग 5.7 करोड़ व्यक्ति शराब पीने के आदि हैं और उन्हें जल्द ही इलाज की जरुरत है. आर्थिक तंगी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग सस्ती शराब पीते हैं. इस वजह से देश में शराब के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है. रिपोर्ट के अनुसार देश में बिकने वाली शराब में 30% हिस्सा देसी शराब का होता है.

 

तर्कसंगत का तर्क 

इस हादसे में 120 लोगों की जान चली गई और जनता या राजनेताओं किसी का भी इस पर ध्यान नहीं गया. ये मौतें मायने रखती हैं और सरकार को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्य में अवैध रूप से बिकने वाली शराब को बंद करने के लिए कार्रवाई करनी चाहिये. जो लोग हादसे में बच गये वे अंधे हो चुके हैं. अकेले हरिद्वार जिले में 43 लोगों की मौत हुई हैं और दर्जनों लोगों की आंखों की रोशनी चली गई. इस घटना ने केवल 120 पुरुषों की ही जान नहीं ली हैं बल्कि उनके परिवार को भी हमेशा के लिए दुःख में छोड़ दिया जो आर्थिक सहायता के लिए पुरुषों पर निर्भर थे.

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