सचेत

तेजी से मर रहे कीड़ों की वजह से पृथ्वी अपने छठी सबसे बड़ी सर्वनाश की ओर बढ़ रही है

तर्कसंगत

March 7, 2019

SHARES

आपने सुना ही होगा शाही बाघों, समुद्री कछुओं, अतभुत/सुंदर विशाल पांडायों, हाथियों, अपने सबसे करीबी ओरंगुटान, व्हाइट राइनोस की संख्या में तेजी से गिरावट के बारे में चिंतित हैं, लेकिन कीड़ो की संख्या में खतरनाक गिरावट “विनाशकारी परिणाम” साबित हो सकते हैं, पर इस बात पर ध्यान देना आसान नहीं है और यह ग्रह के पारिस्थितिक तंत्र के लिए और मानव जाति के अस्तित्व के लिए एक खतरे का निशान है.

 

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, जैविक संरक्षण पत्रिका में प्रकाशित कीट आबादी के बारे में पहली वैश्विक वैज्ञानिक समीक्षा के अनुसार, 40% से अधिक कीट प्रजातियां घट रही हैं और एक तिहाई लुप्तप्राय हैं. ग्रह छठे बड़े पैमाने पर विलुप्त होने (मानव गतिविधियों के कारण पहला) की शुरुआत में है, बड़े जानवरों की आबादी में पहले से ही भारी नुकसान के साथ अध्ययन करने के लिए यह आसान है. लेकिन कीड़े सबसे प्रचुर मात्रा में हैं जिनका श्रेय पूरी मानवता से 17 गुना अधिक है और उनके विलुप्त होने की दर स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों की तुलना में आठ गुना तेज है. प्रत्येक वर्ष उनकी कुल दर 2.5% तक घट रही है जो “चौंकाने वाली” है. सिडनी विश्वविद्यालय के फ्रांसिस्को सांचेज़-बाओ के अनुसार, समीक्षा के सह-लेखकों में से एक है उन्होंने बताया “यह बहुत तेजी से है, 10 साल में आपके पास एक चौथाई भाग कम हो जायेगा, 50 साल में केवल आधा भाग रह जायेगा और 100 साल में आपके पास कुछ नहीं होगा”.

 

हमारे ग्रह के पारिस्थितिक तंत्र को सही सलामत कार्य करने के लिए कीड़े बहुत “आवश्यक” हैं, जैसे कि कई पक्षियों, सरीसृप, उभयचर, मछली और पोषक तत्वों के परागकण और पुनरावर्तक जैसे प्राणियों के लिए भोजन.

जर्मनी और प्यूर्टो रिको में, कीट आबादी में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसकी रिपोर्ट्स कठोर रूप से जोर देती है कि संकट कुछ देशों तक सीमित नहीं है, यह विश्व स्तर पर है. प्यूर्टो रिको में, इस तरह के तेजी से गिरावट के प्रभाव पहले से ही देखे गए हैं जहां हाल ही के एक अध्ययन में 35 वर्षों में जमीन के कीड़ों में 98% गिरावट और भोजन के लिए कीटों पर निर्भर जानवरों की मौत का कारण बना.

बीजिंग में चाइना एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज में सांचेज-बाओ और क्रिस व्य्च्खुय्स द्वारा रिपोर्ट पेस की गई, जिसे कीट आबादी और उनकी गिरावट का आकलन करने के लिए 73 सर्वश्रेष्ठ अध्ययनों में से उनका चयन किया गया. इनमें से अधिकांश अध्ययन पश्चिमी यूरोप और अमेरिका में किए गए थे, जबकि कुछ ऑस्ट्रेलिया, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में भी किए गए थे, लेकिन कुछ अन्य में.

 

तितलियाँ और पतंगे सबसे बुरी स्थिति में हैं. 2000 और 2009 के बीच इंग्लैंड में खेती की गई भूमि पर व्यापक तितली प्रजातियों की संख्या 58% घट गई. यूनाइटेड किंगडम में कीट आबादी में सबसे बड़ी कमी देखी गई थी, हालांकि यह संभवतः अन्य देशों की तुलना में अधिक तीव्रता से अध्ययन किए जाने का परिणाम है. मधुमक्खियां भी प्रभावित हुई हैं, 1947 से अमेरिका में हनीबी कालोनियों की संख्या में 3.5 मिलियन की गिरावट आई है. बीटल की कई प्रजातियों में भी विशेष रूप से डंग बीटल की संख्या में गिरावट आई है. लेकिन अध्यन में बहुत बड़े अंतराल हैं, कई मक्खियों, चींटियों, एफिड्स, शील्ड बग्स और क्रिकेट के बारे में शायद ही कोई जानकारी उपलब्ध हो और विशेषज्ञों का कहना है कि यह मानने का कोई कारण नहीं है कि वह अध्ययन की गई प्रजातियों की तुलना में कुछ और बेहतर कर रहे हैं.

 

कम संख्या में प्रजातियां जो आसानी से परिवर्तनों के अनुकूल हो सकती हैं, संख्या में वृद्धि हो रही है, उदाहरण के लिए, कीटनाशकों की सहनशीलता के कारण अमेरिका में आम पूर्वी भौंरा है लेकिन यह कहीं भी दूसरी जगह या यहां तक कि उनकी गिरावट से भी मेल नहीं खाता है.

 

गिरावट के कारण

खेती के लिए कीटनाशक, उर्वरक और भारी भूमि का उपयोग इन सभी गिरावट का एक मुख्य कारण है. सांचेज-बायो ने कहा गिरावट का मुख्य कारण कृषि तीव्रता है. इसका मतलब यह है कि सभी पेड़ों और झाड़ियों का उन्मूलन जो आम तौर पर खेतों में उगाये जाते हैं, इसलिए बंजर, सूखे क्षेत्र हैं क्यूकी उन पर सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है”. 20वीं शताब्दी की शुरुआत में यह गिरावट शुरू हुई लेकिन पिछले 20 वर्षों में नियोनिकोतिनोइडस और फिप्रोनिल जैसे कीटनाशकों की एक नए वर्ग की शुरुआत हुई जो एक विशेष रूप से हानिकारक रही क्योंकि वह नियमित रूप से उपयोग किए जाते हैं और पर्यावरण में बने रहते हैं, “वह मिट्टी को बेकार करते हैं, जिससे सभी कीटों की मृत्यु हो जाती है. उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में, जहां तीव्र कृषि बहुत आम नहीं है, वह जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते हुए तापमान की गिरावट का एक मुख्य कारण है. उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मौजूद कीड़ों की प्रजातियों ने स्थिर परिस्थितियों के लिए खुद को अनुकूलित कर लिया है, जिनमें परिवर्तन होने की क्षमता बहुत कम है और इस तरह से बहुत कम बदलावों का प्रभाव भी हो सकता है जैसा कि प्यूर्टो रिको में देखा गया है.

 

अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल एह्र्लिच ने पहली बार यह गिरावट देखी है. उन्होंने स्टैनफोर्ड के जैस्पर रिज रिज़र्व पर 1960 में चेकर्सपॉट तितलियों का अध्ययन किया लेकिन 2000 तक वह सभी मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन के कारण चली गयी थी.

 

कहने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगभग हर एक वैज्ञानिक इस बात से सहमत है कि यह गिरावट एक बहुत ही गंभीर विश्व स्तरीय समस्या है. ससेक्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेव गॉल्सन ने कहा, “यह हम सभी के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय होना चाहिए, क्योंकि कीड़े सभी खाद्य वस्तुओ के महत्वपूर्ण हैं, कीट बड़ी संख्या में पौधों की प्रजातियों को परागण करते हैं, आत्मा को स्वस्थ रखते हैं, पोषक तत्वों को नियंत्रित करते हैं. उन्हें प्यार करो या उनसे घृणा करो, हम इंसान कीड़ो के बिना जीवित नहीं रह सकते”.

 

लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के एंटोमोलॉजी के प्रोफेसर (कीटों के अध्ययन से संबंधित प्राणी विज्ञान) के टिमोथी स्चोवाल्टर ने बिजनेस इनसाइडर को बताया, “परागणकर्ता हमारी विश्व स्तरीय खाद्य आपूर्ति की 35% मात्रा को खतरे में डालते हैं, यही वजह है कि यूरोपीय देशों में परागण रक्षकों की सुरक्षा और बहाली अनिवार्य है”.

 

नुकसान को वापस पहले जैसा करने या कम करने के लिए क्या किया जा सकता है ?

रिपोर्ट्स के अनुसार “जब तक हम भोजन पैदा करने के अपने तरीकों को नहीं बदलते हैं, तब तक कीड़े कुछ ही दशकों में विलुप्त होने के रास्ते पर चले जाएंगे. कम से कम जानकारी के लिए हम सभी यह जान ले, कि ग्रह के पारिस्थितिक तंत्र के लिए इसके नतीजे भयानक होंगे”. हमें खाद्य उत्पादन के तरीके में बदलाव करना चाहिए, सांचेज-बायो ने कहा कि जैविक खेतों में अधिक कीड़े हैं, इसलिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. कृषि में उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों की संख्या को कम किया जाना चाहिए क्योंकि कीटनाशकों के उपयोग से ज़मीन की उपजाव क्षमता मेंकुछ विशेष फर्क नहीं है. अध्ययन के लेखकों ने लिखा, “यह जरूरी है कि वर्तमान कीटनाशक का उपयोग, मुख्य रूप से कीटनाशक और कवकनाशी, एक न्यूनतम स्तर तक कम किये जाए”. इसके अलावा, कीटो की उपस्तिथि को पहले की तरह करने का प्रयास किया जाना चाहिए.

 

प्रमुख वैज्ञानिकों के अनुसार, जैविक खाद्य खरीदना वह कार्रवाई है जो हम इस विश्व स्तरीय गिरावट पर रोक लगाने के लिए कर सकते हैं. हम लॉ मेकर्स से यह भी निवेदन कर सकते हैं कि वह खेतों पर कीटनाशक के उपयोग को सीमित करने वाले कानून बनाएं. सबसे महत्वपूर्ण बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा सकती है तो वह यह है कि कीटनाशकों और उर्वरकों के लिए लोगो को भारी सब्सिडी देने में कटौती करनी चाहिए. हालांकि भारत के लिए यह डेटा उपलब्ध नहीं है लेकिन यह जग जाहिर/सबके सामने है कि भारत में कीटनाशकों और इनआर्गेनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ा है. इस प्रकार, उन किसानों को प्रोत्साहन प्रदान किया जाना चाहिए जो जैविक खेती कर रहे हैं.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...