पर्यावरण

सुंदरबन में एक द्वीप बढ़ते हुए समुद्री जल- स्तर के कारण गायब हो रहा है; निवासीयों के पास घर नहीं रहे

तर्कसंगत

March 9, 2019

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घोरमारा द्वीप, बंगाल की खाड़ी में सुंदरबन डेल्टा का एक हिस्सा, बढ़ते समुद्र के स्तर के कारण हर साल विस्तार में कम हो रहा है. सुंदरबन, दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन, भारत और बांग्लादेश दोनों का भाग है और बिजनेस इनसाइडर के अनुसार लुप्तप्राय बाघों, डॉल्फ़िन, मगरमच्छ और पक्षियों की 300 प्रजातियों का घर है.

एक समय में 7,000 लोगों का घर, कोलकाता से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस द्वीप में अब केवल 4,000 लोग रहते हैं. द्वीप के निवासी कहीं और जाने को तैयार हैं लेकिन वे आर्थिक रूप से इसके लिए तैयार नहीं है .

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में 4.6 वर्ग किलोमीटर के द्वीप का आकार लगभग आधा हो गया है. ईडी टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जादवपुर विश्वविद्यालय के ओशनोग्राफिक स्टडीज के स्कूल के तुहिन घोष ने कहा, “हर जगह नदी के किनारों की तेज कटाई हो रही है, मुख्य भूमि से विस्थापन होकर पानी में गायब हो रहा है.



द्वीप पर जीवन

पश्चिम बंगाल सरकार ने हजारों लोगों को पास के सागर द्वीप में स्थानांतरित कर दिया है. उच्च ज्वार और लगातार बाढ़ ने सरकार के लिए निवासियों को सहायता और खाद्य आपूर्ति प्रदान करना असंभव बना दिया है. जून 2016 में, घोरमारा पूरे एक सप्ताह तक पानी से बंद रहा.

घोरमारा निवासी रबीउल साहा ने 2016 में फ़र्स्टपोस्ट को बताया, “जिनके पास पैसा है वे समुद्र पार कर सकते हैं. जो लोग नहीं करते हैं, वे हमारी तरह डूब जाने की प्रतीक्षा करते हैं. यहां तक ​​कि अगर हम मुख्य भूमि पर पहुंचते हैं, तो हम  बिना कोई घर पहचान और समुदाय शरणार्थी बन कर रह जाते है. हम बस लड़ाई हार रहे हैं. ”साहा ने फ़र्स्टपोस्ट को यह भी बताया कि उनकी किशोर बेटी स्कूल छोड़ना पड़ा क्योंकि सभी शिक्षक वहां से चले गए.

सुंदरबन में चावल प्रधान फसल है, लेकिन हर साल खारे पानी से चावल के खेत भर जाते हैं. बाढ़ के बाद धान की खेती नष्ट हो जाती है, खेत में चावल फिर से बोने में पांच साल तक लग सकते हैं. ENDEV, एक पर्यावरण संगठन किसानों को नमक प्रतिरोधी बीज प्रदान कर रहा है सुपारी की फसल अन्य प्रमुख स्रोत है लेकिन लगातार बाढ़ से फसल को नुकसान होता है. अगस्त में एक किसान मिहिर कुमार मोंडल ने कहा, “हर साल उच्च-ज्वार का खारा पानी मेरे खेत में घुस जाता है और मेरी खेती को नष्ट कर देता है, इसलिए मुझे बड़े नुकसान का सामना करना पड़ता है.”

द्वीप के अधिकांश निवासी पास के सागर द्वीप में स्थानांतरित हो गए हैं. कुछ लोग जो द्वीप छोड़ देते हैं, वे आश्रय और आजीविका की तलाश में पश्चिम बंगाल में बेघर हो जाते हैं.

घोरामारा ग्राम प्रधान संजीब सागर ने कहा कि अगर सरकार मुफ्त जमीन प्रदान कराती है तो आधे निवासी कहीं और जाने को तैयार हैं. रॉयटर्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार में डिसास्टर मैनेजमेंट मिनिस्टर ने द्वीप के निवासियों के पुनर्वास के बारे में योजना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की भविष्यवाणी है कि 1990 और 2100 के बीच समुद्र का स्तर कुल 0.18 से 0.6 मीटर बढ़ जाएगाm जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में तेजी से स्थिति बदल रही है. 1995 में, बांग्लादेश का भोला द्वीप, सुंदरबन का एक हिस्सा, समुद्र के बढ़ते स्तर से आधा डूब गया था, जिससे 500,000 लोग बेघर हो गए थे. अमेरिकी राज्य मिसौरी हर साल समुद्र में लगभग 65 वर्ग किमी जमीन खो देता है मालदीव, तुवालु जैसे देशों और तटीय शहरों जैसे मुंबई, शंघाई  को सबसे बड़ा खतरा है. 2011 के एक अध्ययन के अनुसार 2050 तक 300 मिलियन जलवायु-शरणार्थी हो सकते हैं.

जलवायु-शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए कोई प्रावधान नहीं हैं. पर्यावरणीय कारणों से अपना घर छोड़ने वाले लोग शरण नहीं ले सकते. ग्रीनपीस जैसे कुछ संगठन जलवायु-शरणार्थियों के लिए अधिक अधिकारों पर जोर दे रहे हैं, लेकिन, मौजूदा शरणार्थी संधियों में संशोधन होने से पहले कई साल लग सकते हैं. न्यूजीलैंड ने पर्यावरण की स्थिति के आधार पर शरण के दावों की अनुमति देने वाला पहला देश बनकर एक मिसाल कायम की है.

द्वीप पर कोई बिजली, कोई स्मार्टफोन या कार नहीं है. ग्रामीणों को जलवायु परिवर्तन के बारे में कोई जानकारी नहीं है, वे सभी जानते हैं कि जल-स्तर बढ़ने से उनके घरों और जीवित रहने की संभावना कम हो रही है.

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