ख़बरें

दस साल और 6 लाख बच्चों पर चले शोध में खुलासा – मीज़ल्स के टीके के कारण ऑटिज़्म नहीं होता है

तर्कसंगत

March 9, 2019

SHARES

 ऑटिज्म और मीज़ल्स, मम्प्स और रूबेला (एमएमआर) वैक्सीन के बीच कोई संबंध नहीं है, 4 मार्च को एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है. यह पहला अध्ययन नहीं है जिसने पुष्टि की है कि एमएमआर वैक्सीन वास्तव में ऑटिज़्म का कारण नहीं है, फिर भी कई लोग अभी भी निराधार भय के साथ रहते हैं.



ऑटिज़्म और एमएमआर के बीच कोई लिंक नहीं

इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए किए गए अध्ययन का सैम्पल साइज बहुत बड़ा था. शोधकर्ताओं ने 1999 और 2010 के बीच डेनमार्क में लगभग 6,57,461 बच्चों का अध्ययन किया. यह अध्ययन अगस्त 2013 में शुरू हुआ था. शोधकर्ताओं ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के निदान के साथ ज्ञात जोखिम कारकों का पता लगाया जैसे माता पिता की उम्र, भाई-बहनों में ऑटिज़्म का निदान, समय से पहले जन्म और जन्म के समय कम वजन, जैसा कि सीएनएन द्वारा बताया गया है. एएसडी एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है जो किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थितियों में दूसरों के साथ संवाद, बातचीत और व्यवहार करने की क्षमता को प्रभावित करती है.

अध्ययनरत बच्चों में, केवल 6,517 में ऑटिज्म विकसित हुआ. हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्हें एमएमआर वैक्सीन और ऑटिज़्म के बीच कोई सम्बन्ध नहीं मिला. अध्ययन का निष्कर्ष यह निकला की “एमएमआर टीकाकरण ऑटिज्म के लिए जोखिम नहीं बढ़ाता है, अतिसंवेदनशील बच्चों में ऑटिज्म को ट्रिगर नहीं करता है, और टीकाकरण के बाद ऑटिज्म के मामलों के क्लस्टरिंग से जुड़ा नहीं है.”

यह माना जाता है कि वैक्सीन और ऑटिज़्म संबंधित घटनाओं की उत्पत्ति 1998 में एंड्रयू वेकफील्ड द्वारा अध्ययन से हुई थी, जो द लांसेट में प्रकाशित हुई थी. लैंसेट को 2011 में एक अध्ययन के बाद यह पता लगाना पड़ा कि वेकफील्ड ने उन 12 बच्चों की जानकारी बदल दी है, जिनके अध्ययन से निष्कर्ष पर पहुंचे थे.



भारत में वैक्सीन के बारे में झूठे समाचार

भारत में, एमआर टीकों के आसपास भी कई फर्जी खबरें आई हैं. झूठे दावों के अनुसार ये वैक्सिन बच्चे की याददाश्त और सीखने की क्षमता में बाधा डालते हैं, संदेशों, तस्वीरों और वीडियो द्वारा समर्थित यह भ्रम, जंगल में आग की तरह फैलते हैं. बच्चों में ऑटिज़्म और सीखने की अक्षमता पैदा करने की अफवाहें मुस्लिम आबादी के विकास को रोकने के लिए एक साजिश थी. इन सभी अफवाहों को दूर करने के लिए डॉक्टरों, धार्मिक संगठनों के लोगों और सरकारी अधिकारियों से सामूहिक प्रयास लगा. हालांकि यह पूर्ण निश्चितता के साथ नहीं कहा जा सकता है कि सभी अफवाहों को खत्म कर दिया गया है, लेकिन स्थिति काफी बेहतर है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...