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सामाजिक उत्सवों में खाने की बर्बादी की जाँच करने के लिए दिल्ली सरकार ने तैयार की नीति

तर्कसंगत

Image Credits: You Tube

March 11, 2019

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बढ़ते खाने की बर्बादी जाँच करने के लिए, दिल्ली सरकार ने कथित तौर पर एक पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया है जो सामाजिक कार्यों और आयोजनों में भोजन की बर्बादी की जाँच करेगी. इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, सभी आयोजकों और कैटरर्स को बचे हुए खाने का उपयोग करने के लिए स्वयं को एनजीओ के साथ पंजीकृत करना होगा जो बाद में जरूरतमंदों में बाँट दिए जायेंगे.

 

ड्राफ्ट पॉलिसी क्या कहती है?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में होटल, मोटल और लो-डेंसिटी रेजिडेंशियल एरिया (LDRA) में सोशल फ़ंक्शंस के लिए ड्राफ्ट की नीति’ में लिखा है कि, “कैटरर को इन गैर सरकारी संगठनों को ताजा बचे हुए भोजन को सौंपने के लिए उचित व्यवस्था करनी होगी.” मसौदा नीति के अनुसार, मालिकों, आयोजकों और कैटरर के पास FSSAI जैसी आवश्यक अनुमति होनी चाहिए. कैटरर को चलाने के लिए इन गैर सरकारी संगठनों और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को ताजा अधिक बचे हुए भोजन को सौंपने के लिए उचित व्यवस्था करनी होगी.

पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि भोजन की तैयारी अधिकतम मेहमानों की संख्या के अनुसार होनी चाहिए जो स्थल और LDRA द्वारा निर्धारित किये गए हैं. अतिथि की संख्या शहरी स्थानीय निकाय द्वारा अनुमोदित संख्या से अधिक नहीं हो सकती. “यदि अतिथि की कम संख्या और कम खपत के कारण भोजन बचता है, तो फंक्शन खत्म पूरी होने के तुरंत बाद उस भोजन को सामाजिक कार्य स्थल से हटाने के लिए सामाजिक समारोह के आयोजक की जिम्मेदारी होगी.

ड्राफ्ट पॉलिसी में कहा गया है कि आयुक्त खाद्य सुरक्षा यह सुनिश्चित करेगी कि उपर्युक्त दिशानिर्देशों को पूरा किया जाए और उल्लंघन करने पर आयुक्त खाद्य सुरक्षा द्वारा तैनात अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जाएगी. इन नए नियमों को कथित तौर पर समय समय पर निरिक्षण कर लागू किया जाएगा. इसके अलावा, विभिन्न यूएलबी के अधिकारी फ़ंक्शन को बाधित किए बिना शिकायत-आधारित निरीक्षण कर सकते हैं. फंक्शन्स के लिए, केवल 120 दिनों की सीमा निर्धारित हैं.

नीति का मसौदा तैयार करने के लिए, मुख्य सचिव ने चार अधिकारियों की एक समिति का गठन किया है, जिसमें शहरी विकास और स्वास्थ्य के प्रमुख सचिव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव शामिल हैं. कथित तौर पर, एक व्यापक नीति बनाने का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद लिया गया था. दिसंबर 2018 में, दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह खाद्य अपव्यय की जांच करने के लिए “असाधारण” शादियों में मेहमानों की संख्या को “सीमित” करने के लिए एक नीति पर विचार कर रही थी.

हालांकि बहुत से व्यक्तियों के पास गैर-सरकारी संगठन हैं जो भूख और भोजन की बर्बादी की समस्या को रोकने के लिए जबरदस्त प्रयास कर रहे हैं, दिल्ली सरकार की इस तरह की पहल निश्चित रूप से नागरिकों को थोड़ा और जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक सही कदम है.

 

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