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ग्रीनपीस की रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम सबसे प्रदूषित शहर, दिल्ली दुनिया में सबसे प्रदूषित राजधानी

तर्कसंगत

Image Credits: News18

March 11, 2019

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ग्रीनपीस की हाल ही की रिपोर्ट में, दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी की सूची में सबसे ऊपर है. आंकड़ों में कहा गया है कि दिल्ली में औसत वार्षिक पीएम 2.5 कंसंट्रेशन, 113.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. सूची में दूसरा शीर्ष स्थान बांग्लादेश की राजधानी ढाका द्वारा 97.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और काबुल 61.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के साथ तीसरे स्थान पर दर्ज किया गया है.

ग्रीनपीस ने शहर-आधारित आंकड़ों का भी खुलासा किया, पहले स्थान पर फिर से दो शहरों के साथ भारत का कब्जा है और उसके बाद पाकिस्तान का नाम हैं. गुरुग्राम दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जहां सालाना औसत पीएम 2.5, 135.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. इसके बाद 135.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर गाजियाबाद आता है. पाकिस्तान का फैसलाबाद 130.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के साथ सूची में शीर्ष से तीसरे स्थान पर है.

हालांकि, सूची में दिल्ली 11 वें स्थान पर है. इसके अलावा, फरीदाबाद, भिवाड़ी और नोएडा क्रमशः पीएम 2.5 की रीडिंग 129.1, 125.4 और 123.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के साथ अगले तीन स्पॉट लेते हैं.

 

मापदंडो की सीमाएं क्या हैं?

नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स के मानकों के अनुसार, PM 2.5 के लिए वार्षिक अनुमति सीमा 40 ug/m3 है. News18 का कहना है कि WHO (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन) द्वारा निर्धारित वार्षिक अनुमति सीमाएँ 10 ug/m3 से भी कम हैं.

ग्रीनपीस ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया को वायु प्रदूषण के प्रति आगाह किया है, जिससे विश्व की अर्थव्यवस्था में लगभग 225 बिलियन डॉलर की लागत आने के साथ ही अगले वर्ष विश्व स्तर पर अनुमानित सात मिलियन लोगों की मृत्यु होने की संभावना है.

ग्रीनपीस साउथ ईस्ट एशिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, येब सानो का कहना है, “वायु प्रदूषण हमारी आजीविका और हमारा भविष्य चुराता है, लेकिन हम इसे बदल सकते हैं. खोए हुए मानव जीवन के अलावा, खोए हुए श्रम में 225 बिलियन डॉलर, और चिकित्सा लागतों में खरबों की अनुमानित वैश्विक लागत है. इससे हमारी सेहत और हमारी जेब पर काफी असर पड़ रहा है.”

हालांकि, रिपोर्ट कहती है कि पिछले वर्ष 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से दक्षिण एशिया, दुनिया में सबसे अधिक खतरे में है, जिसमे 18 भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में थे. जबकि चीन का बीजिंग, जिसे दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर माना जाता था, ने हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया है और सूची में 122 वें स्थान पर है.

हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया, “चीन का आसमान ग्रे रहता है लेकिन प्रगति प्रभावशाली है. चीन में शहरों में औसत सांद्रता/कंसंट्रेशन 2017 से 2018 तक 12% तक गिर गई. बीजिंग अब दुनिया के 122 वें सबसे प्रदूषित शहर के रूप में रैंक करता है, AirVisual डाटासेट के अनुसार, 2013 के बाद से PM 2.5 का स्तर 40% से अधिक गिर रहा है. बीजिंग का PM 2.5 एकाग्रता 2013 के स्तर पर रुकी थी, शहर 2018 की सूची में 21 वें स्थान पर था”.

इस रिकॉर्ड के साथ, चीन ने दुनिया में एक मानक स्थापित किया है, जिससे भारत एक सबक ले सकता है जिसकी अभी बहुत ज्यादा जरूरत है. खराब वायु की क्वालिटी समस्या को रोकने के लिए, भारतीय पर्यावरण और वन मंत्रालय ने जनवरी 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) नामक एक कार्यक्रम शुरू किया है.

ग्रीनपीस एक पर्यावरण एनजीओ है, जो एक सॉफ्टवेयर कंपनी आईक्यू एयरविजुअल के साथ सहयोग करती है, जो दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर और राजधानी की सूची का अध्ययन और विश्लेषण करने के लिए दुनिया भर में प्रदूषण को ट्रैक करती है. जारी की गई रिपोर्ट सार्वजनिक निगरानी स्रोतों से 2018 में एकत्र किए गए वायु की क्वालिटी के आंकड़ों पर आधारित है.

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