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बेंगलुरु अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए बिजली बचाने का सबसे अच्छा तरीका

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Image Credits: Wikimedia

March 11, 2019

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शेट्टी (बदला हुआ नाम), एक बेंगलुरु अपार्टमेंट के प्रबंधक हैं RWA की बैठक से चिंतित थे क्यूंकि उन्हें लोगो के बिजली बिलों के लिए बैठक के सदस्यों की मंजूरी लेनी पड़ती थी. RWA के सदस्यों ने भारी मात्रा में बिलों पर उनसे पूछताछ की, लेकिन वह बिलों को साबित करने या बचत के उपायों की पहचान करने में नाकाम रहे.

एसोसिएशन भी मुख्य रूप से दस्तावेजों की कमी के कारण कार्रवाई करने में असमर्थ थी. आमतौर पर एसोसिएशन LED लाइट लगाने पर विचार करती है और इस मुद्दे को ख़तम कर देती है लेकिन हर साल समस्या एक ही रूप के साथ आती है.

 

बिजली का खर्चा एक चौथाई

लगभग हर दिन, बेंगलुरु में एक नए गेटेड, उच्च कोटि के आवासीय अपार्टमेंट परियोजना की शुरुआत होती है या उनके विज्ञापन के बारे में सुना जाता है. ये विज्ञापन परियोजना की आकर्षक विशेषताओं को उजागर करते हैं जैसे कार्यालयों या शॉपिंग मॉल के साथ नज़दीकी, लेकिन पूरे साल रखरखाव के लिए दिए गए पैसे के बाद भी लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

अपार्टमेंट निवासियों से एकत्र किए गए रखरखाव के पैसे कई सामान्य सुविधाओं पर खर्च होते हैं जिसमें पानी पंपिंग और लाइटिंग जैसी बुनियादी काम शामिल है. गर्म स्विमिंग पूल और क्लबहाउस जैसी बुनियादी सुविधायें इसमें नहीं आती हैं.

कुल रखरखाव का एक बड़ा हिस्सा लगभग 20-25 प्रतिशत लिफ्ट, पानी और लाइटिंग की देखभाल में चला जाता है. अंततः यह हर एक घर की बचत में, कम संसाधनों में बिजली के कुशल उपयोग में और बिजली के माध्यम से पर्यावरण पर जबरदस्त प्रभाव डालता है.

बेंगलुरु स्थित NGO Technology Informatics Design Endeavour (TIDE) और अनुसंधान संगठन World Resources Institute (WRI) India के एक संयुक्त अध्ययन ने इस समस्या पर धयान दिया जिसमें बिजली की खपत और लागत को सही करना, उसका अच्छी तरह उपयोग और मौजूद तकनीकियों का इस्तेमाल शामिल है.

 

अध्ययन में दस अपार्टमेंट ने भाग लिया

अध्ययन ने अपार्टमेंट की आम सेवाओं में बिजली के उपयोग को देखा. कुल दस अपार्टमेंट का अध्ययन किया जिनमें से नौ पिछले 10 साल से ज्यादा पुराने थे. ज्यादातर अपार्टमेंट उत्तर, दक्षिण और पूर्वी बेंगलुरु में थे जिसमें 90 से 1500 तक की अपार्टमेंट की ईकाइयां शामिल थीं जिसमें कुल 5.3 मेगावाट का लोड था.

प्रबंधकों और RWA के साथ बातचीत में टीम को यह स्पष्ट हुआ कि अपार्टमेंट की वर्तमान स्थिति के बारे में जानना सबसे पहले जरुरी था. टीम ने प्रबंधकों और RWA से बिजली के बिल लिए और बिजली के उपकरणों, उनकी रेटिंग और चलने की एक सूची तैयार की.

टीम ने इन दस्तावेजों को मान्य करने के लिए और उपकरणों का निरीक्षण करने के लिए आसपास के क्षेत्रों की सैर भी की. जहाँ बिजली, पानी पंप, डीजल वाला जनरेटर और लिफ्ट शामिल थे.

 

बिजली के बिल बहुत कम हो सकते थे

इस अध्ययन के साथ अपार्टमेंट में पहली बार यह देखा गया कि विभिन्न उपकरणों में करंट कैसे जाता है और बिजली कैसे खर्च होती है. जिससे क्षेत्रों की प्राथमिकता तय की गई. पंपिंग के लिए सबसे अधिक ऊर्जा का उपयोग किया गया था जिसमें 28 से 73 प्रतिशत बिजली लोड लगता था. फिर लिफ्ट जिसमें 13 से 43 प्रतिशत था. बाद में लाइट्स थीं जो 1 से 12 प्रतिशत लोड लेती थीं.

कई अपार्टमेंट ने बिजली के कम उपयोग के बाद भी बिल ज्यादा दिया. अधिकांश अपार्टमेंट बिल्डर ज्यादा बिजली भेजने के लिए एक बड़ा लोड लगते थे परन्तु इससे बिल हमेशा ज्यादा ही आता था.

मीटर के विश्लेषण पर पता चला कि पिछले वर्ष सालों में जहाँ ज्यादा बिजली खपत हुई है उसे कम किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, यदि भार 300 किलोवाट था और औसत अधिकतम मांग केवल 200 किलोवाट थी तो अपार्टमेंट आसानी से 50 किलोवाट कम कर सकता था जिससे बिजली की बचत होगी.

अध्ययन ने प्रत्येक अपार्टमेंट के लिए बिजली की सही लागत भी निकाली जिसमें BESCOM और जनरेटर दोनों की लागत पर विचार किया गया. RWA आमतौर पर जनरेटर की लागत को बिजली की लागत का हिस्सा नहीं मानते हैं.

टीम ने 60 पानी के पंपों और 24/7 पावर बैकअप देने वाले जनरेटर, डीजल के मापदंडों को देखा जिससे उनके कामकाज को सही किया जा सके.

 

चुनौतियां

ऑडिटिंग टीम को परियोजना के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा जैसे कि RWA की लापरवाही, दस्तावेजों की कमी, और कुछ सेवाओं के लिए बाजार की अनुपस्थिति.

व्यक्तिगत RWA सदस्यों की प्रेरणा और जागरूकता के स्तर पर परियोजना में RWA की रुचि काफी भिन्न थी. इसके अलावा बिजली के उपयोग के बारे में जानकारी एकत्र करना हमेशा आसान नहीं था – बिल और विवरण उपलब्ध नहीं थे जनरेटर लॉग अधूरा था. इस तरह के अध्ययन में दस्तावेजों का सबसे महत्वपूर्ण काम होता है क्योंकि यह व्यवस्थित विश्लेषण के आधार पर बनाता है.

इसके अलावा अपार्टमेंट में स्वच्छ ऊर्जा सेवाओं के लिए कोई बाजार नहीं है. उदाहरण के लिए – पंप सही करने वाले. पानी-पंप ख़राब होने पर या तो पंप को बदलना होगा या उसी क्षमता पर इसे वापस रखना होगा.

 

अपार्टमेंट बिजली बचा सकते हैं

अध्ययन में पाया गया कि प्रत्येक अपार्टमेंट उपकरणों के सही इस्तेमाल करके 10 से 20 प्रतिशत तक बिजली बचा सकता हैं. अध्ययन ने आम क्षेत्रों की जानकारी के लिए एक कार्यप्रणाली बनायीं जिससे बचत की क्षमता की पहचान की जा सके. टीम अब एक ओपन सोर्स टूल बनाने पर काम कर रही है जिसका उपयोग आम क्षेत्रों में ऊर्जा प्रबंधन के लिए कदमों का की पहचान करने के लिए कर सकते हैं.

शेट्टी अब एक खुशमिजाज आदमी हैं और अपने अपार्टमेंट में सिर्फ एक सिफारिश के कारण 2.5 लाख रुपये सालाना बचाते हैं. उनके RWA ने भी कुछ खामियों की पहचान की जिससे 12 प्रतिशत की बचत हुई. यह एसोसिएशन, निवासियों, शहर और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली एक जीत की स्थिति है.

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