पर्यावरण

[वीडियो] हैंड्स दैट हील: नवी मुंबई में पालतू या आवारा जानवर सभी की जान बचा रहे हैं

तर्कसंगत

Image Credits: Hands That Heal/Facebook

March 12, 2019

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जो कभी भरी आबादी वाला जगह हुआ करता था, वो आज निर्जन, बंजर और सुना हो गया है. खाली सड़कें, टूटे-फूटे मकान, मलबे और खामोशआठ गाँव हैं जिन्हें महाराष्ट्र के नवी मुंबई हवाई अड्डे को बनाने के लिए खाली करा दिया गया है.  


लोगों को हटा दिया गया है

शहर और औद्योगिक विकास निगम (सिडको), जो इस विशाल परियोजना की देखरेख कर रहा है, ने गांवों के अधिकांश निवासियों को सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया है. कथित तौर पर, एक बार निकासी पूरी हो जाने के बाद, 3,500 से अधिक परिवारों में 21,000 लोगों को स्थानांतरण करना होगा. सिडको को पनवेल में हवाई अड्डे की परियोजना के लिए कुल 2,260 हेक्टेयर की जरूरत है और ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए और नए घरों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता और 18 महीने के लिए किराए के भत्ते सहित कुल 526 करोड़ रुपये का मुआवज़ा गांव के निवासियों को मिल रहा है.

हालांकि सिडको ने विस्थापित लोगों के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है, लेकिन  इन गांवों के जानवरों को भुला दिया गया है. इस परियोजना ने न केवल उन मनुष्यों को प्रभावित किया है जिनके घरों को तोड़ दिया गया है, बल्कि कुत्तों, बिल्लियों  जैसे कई जानवर हैं जिन्हे इन निर्जन गांवों में भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. मनुष्यों पर निर्भर रहे बिना इन आवारा और पालतू जानवरों को एनिमल एक्टिविस्ट ने गंभीर स्थिति में पाया है.



लोग जो जानवरों को बचाते हैं

हालांकि, नवी-मुंबई स्थित एक एनजीओ, हैंड्स दैट हील, इन जानवरों की जरूरत में मदद करने के लिए आगे आया है. तर्कसंगत से बात करते हुए, एचटीएच के एक स्वयंसेवक वर्षा पिल्लई ने कहा कि एनजीओ को पहली बार एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से गांवों में जानवरों की दुर्दशा के बारे में पता चला. एनजीओ के संस्थापक अनामिका चौधरी को सूचित करने के बाद, एंबुलेंस और खाने की चीज़ो के साथ लोगों की एक टीम ने उजाड़ गांवों का दौरा करना शुरू कर दिया.


उन्होंने जो देखा वह भयानक था! उन्होंने पनवेल तालुका के निर्जन पड़ावों में से एक गणेशपुरी की सड़कों पर बड़ी संख्या में त्याग किये हुए जानवरों को घूमते हुए देखा. पिल्लई ने कहा, “हमें ऐसे कुत्ते मिले जो बुरी तरह से घायल थे, पिल्ले जो कुपोषित और बीमार बिल्लियां थी जिनको तत्काल चिकित्सा की जरुरत थी.” तब से, स्वयंसेवकों की टीमों ने साइट पर लंबे दौरे किए और इन जानवरों को बचाया, जिनमें से कुछ गर्भवती भी थीं. अब तक टीम ने केवल छह गांवों के 60 से अधिक जानवरों को बचाया है, जबकि दो अन्य गांव बाकी है.



पुनर्वास प्रक्रिया के साथ संघर्ष

हालाँकि, HTH इतने सारे बचाये हुए जानवरों की पुनर्वास प्रक्रिया से जूझ रहा है. पिल्लई, जो खुद नौ कैनाइनों की देखभाल करती है, ने  कहा कि आश्रय में इतने सारे जानवरों को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, पैदा होने वाले पिल्लों के लिए जगह बनाना तो दूर की बात है, इसके अलावा, पर्याप्त चिकित्सा देना और  इतने सारे कुत्तों और बिल्लियों की नसबंदी प्रक्रिया करना आश्रय गृह के लिए मुश्किल हो गयी है.

Posted by Hands That Heal on Sunday, 17 February 2019


तर्कसंगत से बात करते हुए, एनजीओ की संस्थापक अनामिका चौधरी ने कहा कि उनके पास पहले से ही बचाये हुए जानवर हैं जो आश्रय में रखे गए हैं और  अन्य जानवरों को इसी आश्रय में जगह देने के कारण वो अब ज्यादा व्यस्त रहती है. इसी तरह के अन्य संगठनों को मदद के लिए कॉल अब तक अप्रभावी साबित हुए हैं. “हमें अभी तक दान में केवल 70,000 रुपये मिले हैं और यह राशि केवल कुछ ही दिनों के लिए कुछ बचाए हुए जानवरो को बनाए रखने वाली है।” हालांकि, एनजीओ को जानवरों के भोजन के बैग भी मिले हैं.

 

Posted by Hands That Heal on Friday, 21 December 2018


समस्या के बहु-आयामी समाधान खोजने की तलाश में, पिल्लई और कुछ अन्य लोग स्थानीय नगरपालिका अधिकारियों के साथ बातचीत में जुटे हुए हैं, ताकि एक नसबंदी स्थल के करीब पशु आश्रय स्थापित करने में मदद मिल सके. उन्होंने कहा कि प्रतिक्रिया अब तक अच्छी रही है, लेकिन लंबे समय तक जानवरों की मदद करने में सक्षम होने के लिए और अधिक काम करने की आवश्यकता है.

तर्कसंगत एनजीओ की प्रयासों और निर्माण स्थलों से छोड़े गए जानवरों को बचाने के लिए हैंड्स दैट हील की सराहना करता है.

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