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लोक सभा चुनाव में आचार संहिता लागु होने के मायने क्या हैं?

तर्कसंगत

Image Credits: News Minute/Patrika

March 12, 2019

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रविवार, दिनांक 10 मार्च 2019 को मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोरा जी के लोकसभा चुनाव  2019 की तारीखों के ऐलान के बाद से संपूर्ण भारत में Model Code of Conduct यानि आदर्श आचार संहिता लागू हो गई.

 

आदर्श आचार संहिता

चुनाव आयुक्त ऐसे विभिन्न दिशानिर्देश प्रतायक्षियों, शासकीय कर्मचारियों और यहां तक कि जनता को भी जारी करता है, जिसका पालन आदर्श आचार संहिता के दौरान निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए अनिवार्य होता है. इनका पालन ना करने पर दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है.

आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान, सरकार में बैठे लोग या मुख्य पार्टियों के लोग, अपने प्रभाव का फ़ायदा उठा कर सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल चुनाव में नहीं कर सकते. किसी भी प्रकार से सार्वजनिक धन और संपत्ति का चुनाव में अपने पक्ष में वोट पाने के लिए उपयोग करना प्रतिबंधित है. किसी भी जनलुभावी योजना की घोषणा या किसी प्रोजेक्ट का शिलान्यास या कोई अन्य संबंधित गतिविधि भी प्रतिबंधित की जाती है, जिससे कि सरकार मतदाताओं को प्रभावित कर सके.

प्रत्याक्षी धर्म, जाति, भाषा या अन्य किसी प्रकार से जिससे कि समाज में किसी भी तरह का विभाजन हो या भावनाएं आहित हो, के आधार पर वोट नहीं मांग सकते. धन, मदिरा, वस्त्र या कोई अन्य मूल्यवान वस्तुओं का वोट पाने के लिए वितरण भी प्रतिबंधित है. किसी भी सार्वजनिक जुलूस, रैली या बैठक की पूर्व में अनुमति इस दौरान अति आवश्यक होती है.

देश में कार्यरत सभी केंद्र और राज्य के कर्मचारी, आदर्श आचार संहिता की घोषणा के साथ ही, चुनाव आयुक्त के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं. उनको हिदायत होती है कि वे इस दौरान सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल चुनाव प्रचार गतिविधियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप में ना होने दें. वोटों के लिए समाज में होने वाले किसी भी ध्रुवीकरण को प्रभावी रूप से रोकें और किसी भी अवहेलना को तुरंत चनाव आयोग को कार्यवाही हेतु प्रेषित करें.

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जनता को भी आदर्श आचार संहिता के दौरान निर्देश जारी किए जाते है. जनता से एक आदर्श मतदाता की अपेक्षा की जाती है, कि वे स्वयं तो मतदान के दिन आवश्यक रूप से मतदान कार्यालय में उपस्थित रहे बल्कि अपने आस पास के लोगों को भी मतदान के लिए प्रोत्साहित करें. सामाजिक सौहार्द बनाए रखें और मतदान के लिए एक शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने में सहयोग करें.

प्रासंगिकता

यूं तो चुनाव आयुक्त, इस दौरान कई पर्यवेक्षक, आदर्श आचार संहिता के सख़्त पालन के लिए नियुक्त करता है. किन्तु मुख्य राजनीतिक पार्टियों और बड़े नेताओं के द्वारा, इसकी अवहेलना के ऐसे कई उदाहरण पहले भी देखने को मिले हैं जहां चुनाव आयोग सिर्फ कड़ी कार्यवाही की चेतावनी के अलावा कुछ नहीं कर पाया.

आपकी जानकारी के लिए, किसी भी प्रकार की अवहेलना के लिए चुनाव आयोग नामांकन रद्द करने से लेकर जेल भेज देने के लिए भी भारतीय संविधान द्वारा सशक्त है.

आज के सोशल मीडिया के युग में, इसकी व्यापकता और त्वरित ध्रुवीकरण के प्रभाव के कारण, आदर्श आचार संहिता का पालन और भी मुश्किल हो जाता है. वर्तमान चुनाव आयोग ने इसे समझा है और प्रत्याक्षियों के सोशल मीडिया उपयोग पर भी कई दिशनिर्देशों को जारी किया है. साथ ही साथ कई सोशल मीडिया पर्यवेक्षक भी चुनाव आयोग द्वारा इस कार्य के लिए नियुक्त किए गए हैं.

नई तकनीक का उपयोग 

किसी भी प्रकार से, आदर्श आचार संहिता के अवहेलना की जानकारी चुनाव आयोग को टोल फ़्री नंबर 1950 पर तो दी ही जा सकती है. इसके अलावा इस बार चुनाव आयोग ने cVIGIL ऐप का भी अनावरण किया है जिसमें फोटोग्राफ के साथ साथ लगभग दो मिनट की वीडियो भी कथित अवहेलना के साक्ष्य के तौर पर अपलोड की जा सकती है. यह ऐप आपके एंड्रॉयड स्मार्ट फोन पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है.

राजनेताओं और जागरूक मतदाताओं से अपेक्षा

केंद्रीय रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का गत रविवार को चेन्नई में चुनावी सभा से वापस रवाना होने के दौरान सरकारी विशेष विमान का उपयोग ना कर, साधारण नागरिक विमान का उपयोग करना दिल्ली लौटना, निस्संदेह ही इस प्रक्रिया के पालन का एक सर्वोच्च उदाहरण है.

इच्छुक लोग, चुनाव आयोग की वेबसाइट से विस्तृत आदर्श आचार संहिता को हिंदी और अंग्रेजी में डाउनलोड कर सकत हैं. याद रखें, एक स्वस्थ लोकतंत्र, इसके सभी लोगों की सहभागिता और जागरूकता से ही संभव है. आइए! लोकतंत्र के इस सबसे बड़े त्यौहार को मिलजुल कर सफल बनाएं.

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