मेरी कहानी

मेरी कहानी: “मेरे लिये ये मेरा देश भारत है” मुंबई के होटल मालिक ने दिखाई विविधता में एकता की तस्वीर

तर्कसंगत

Image Credits: Vinod Chand/Facebook

March 12, 2019

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कई देशों ने भारत को हमेशा अजूबे की तरह ही देखा है जिसका कारण है यहाँ रहने वाली जनसंख्या, जो अनेकता में एकता के साथ रहती है. जब भी लोग अलग-अलग सामाजिक ताने-बाने के साथ रहते हैं तो कई देशों ने इसे कमजोरी समझा जाता है जबकि हिंदुस्तान में इन्हीं तानो-बानो के कारण लोग एक दूसरे से दिल से बंधे हुये हैं. महाराष्ट्र के विनोद चंद एक सुंदर घटना के माध्यम से इसी बात को साबित करते हैं:

“आज मुझे 32 इंच व्यास की 12 मिमी की स्टील की शीट मिली. इस शीट को उत्तर प्रदेश के लोगों ने काटा था जो भयंदर में एक शेड में काम करते हैं. वो सब अनपढ़ हैं और एक ही गाँव से हैं. इस शीट को ऑक्सीजन और एलपीजी गैस के मिश्रण से एक कटर से काटा गया है. दुकान के मालिक ने मुझे बताया कि शीट का वजन 50 किलोग्राम था और जब काम पूरा हुआ तो शीट का वजन 50.2 किलोग्राम था जोकि बहुत ही अच्छी बात है.

इसके बाद हमने शीट को पाव-भाजी के तवा के आकार में मोड़ दिया. यह काम एक बार फिर से रामशेक शेड में किया गया था जहां 100 टन के प्रेस(दबाना) का काम चल रहा था. इसलिये जब आप मेरे होटल में आते हैं तो आप एक ऐसे तवे की पाव भाजी खाते हैं जिसे उत्तर प्रदेश के एक मुस्लमान ने काटा है और उत्तर प्रदेश के ही एक हिन्दू ने 100 टन की प्रेस से इसे आकार दिया है.

अब मैंगलोर का एक उस्ताद, जिसका परिवार चेन्नई में रहता है, स्वादिष्ट पाव-भाजी, तवा पुलाव और तवा बिरयानी बनाता है जिसे मेरी राजस्थानी पत्नी के होटल में परोसा जाता है जिसने एक पंजाबी से शादी की है और वो पंजाबी 1970 से महाराष्ट्र में रहता हैं इसलिये अब पंजाबी से ज्यादा मराठी है.

वैसे पाव-भाजी काउंटर कर्नाटक के एक शेट्टी ने बनाया है और मेरे ज्यादातर ग्राहक गुजराती और मारवाडी हैं.

ये मेरा भारत है और आप इसके साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते, और हाँ  मसाले महारष्ट्र के ‘कुबल’  से हैं.”

 

कहानी: विनोद चंद

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