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ब्रिटेन सरकार ने नीरव मोदी के खिलाफ मांगे थे जरूरी कागजात भारत सरकार ने नहीं उठाया कोई कदम

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Image Credits: Siasat

March 13, 2019

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पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपी और हीरा व्यापारी नीरव मोदी को लेकर एक नई खबर सामने आयी है. हाल ही में उन्हें लंदन की सड़कों पर देखा गया है. लंदन के एक अख़बार द्वारा उनकी धोखाधड़ी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने भी कोई जबाब देने से इंकार कर दिया. नीरव मोदी पर भारतीय बैंक PNB से 13000 करोड़ रूपये की चोरी करने का आरोप है. कई सूत्रों के अनुसार नीरव मोदी लंदन में आराम की जिंदगी काट रहा है. इंग्लैंड की सरकार ने कई बार उनके खिलाफ भारत से सबूत मांगे पर भारत सरकार की लापरवाही है जिन्होंने अभी तक कुछ पेश नहीं किया है.

 

भारत सरकार की ओर से उठाये गये कदम

भारत सरकार के अनुसार उन्होंने नीरव मोदी के खिलाफ सख्त कदम उठाये हैं. लंदन के सीरियस फ्रॉड ऑफिस (एसएफओ) के अनुसार पहली बार भारत ने ब्रिटेन (Britain) को 2018 जो एक नोटिस भेजा था जिसमें म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत नीरव मोदी को भारत के हवाले करने का मांग की गयी थी. पहली बार यह नोटिस सीबीआई ने नीरव मोदी (Neerav Modi) और उनके परिवार के खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक के 13000 रुपये के घोटाले में आपराधिक मामला दर्ज करने के तुरंत बाद भेजा था.

भारतीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मई 2018 में नीरव मोदी और अन्य के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी का पहला आरोप पत्र दायर किया था. केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी संयुक्त रूप से पीएनबी की मुंबई स्थित ब्रेडी हाउस शाखा में घोटाले की जांच कर रही हैं. इसमें नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी तथा अन्य लोगों की मिलीभगत होने की आशंका है.

नीरव मोदी को लेकर एक और रिपोर्ट सामने आयी जब कुछ ही दिन पहले उन्हें लंदन की सड़कों पर आराम से घूमते देखा गया. तब भारत सरकार ने दावा किया कि उनके खिलाफ कार्यवाही जारी है. उन्हें हिन्दुतान लाने में कोई देरी नहीं होगी सरकार बस अपना काम कर रही है क्यूंकि विदेश में छिपे किसी व्यक्ति पर कानूनी करवाई करने के लिए उस देश के साथ कानूनी सहायता संधि की जाती है.

हाल ही में 9 मार्च को भारत सरकार ने नीरव मोदी के अलीबाग स्थित घर को गिरा दिया है जिसकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये आंकी गयी है.

भारत सरकार ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया

NDTV के अनुसार नीरव मोदी के खिलाफ भारत सरकार की पहल पर ब्रिटैन सरकार ने पूरा साथ दिया है. उन्होंने सीरीयस फ्रॉड ऑफिस (गंभीर धोखाधड़ी कार्यालय) के तहत मामला दर्ज किया और म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत अपनी कार्यवाही को शुरू किया है. नीरव को वापस भारत लाने की बात पर ब्रिटैन सरकार ने भारत से कुछ सबूतों की मांग की थी जिस पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

इस मामलो की जाँच के लिए ब्रिटेन के धोखाधड़ी कार्यालय ने अपने वकील बैरी स्टेनकोम्ब को भारत की मदद करने के लिए नियुक्त किया जोकि धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों के अच्छे जानकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार ब्स्टेनकोम्ब और उनकी टीम को नीरव मोदी के खिलाफ दस्तावेजों की जरूरत थी और वह इस सिलसिले में भारत आना चाहते थे. उन्होंने सरकार को तीन बार पत्र लिखा लेकिन भारत सरकार ने उन्हें किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी. उन्होंने संवाद भी किया कि वे साक्ष्यों को इकट्ठा करने के लिए भारत आना चाहते हैं ताकि नीरव मोदी को गिरफ्तार कर सकें, इसके बावजूद उन्हें किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिला.

 

ब्रिटैन में हैं नीरव मोदी

ब्रिटेन के सीरीयस फ्रॉड ऑफिस ने मार्च में भारत को बताया कि नीरव मोदी ब्रिटेन में है. हालांकि उस समय भारतीय अधिकारी यह जानने में जुटे थे कि नीरव यूरोप या हांगकांग में है जबकि ब्रिटेन के भारतीय अधिकारीयों ने लगभग एक महीने पहले ही सरकार को इस बात की सुचना दी थी कि नीरव मोदी लंदन के वेस्ट एंड इलाके में 80 लाख पौंड के आलीशान अपार्टमेंट में रहता है. तब भी भारत ने इस मामले पर भी कोई एक्शन नहीं लिया गया बल्कि भारत ने यह मानाने से भी इंकार कर दिया था कि नीरव ब्रिटेन में है. हालांकि कुछ ही समय बाद सरकार ने यह माना कि वह लंदन में छिपा और उसे वापस लाने के लिये सरकार, ब्रिटैन से बात कर रही है.

 

भारत सरकार का ढीला रवैया

नीरव मोदी के केस को लेकर सरकार का रवैया अच्छा नहीं रहा है चाहे वो ब्रिटैन सरकार के द्वारा जरुरी दस्तावेजों की मांग हो या उनकी टीम का भारत में आना हो हर पहलू को देखकर यही लगता है कि भारत सरकार की इस मामले में रूचि कम है. एनडीटीवी के अनुसार भारत के ऐसे लापरवाह रवैये के चलते गंभीर अपराध कार्यालय (एसएफओ) ने दिसंबर के बाद मामले से जुड़े दस्तावेज मांगना बंद कर दिया.

9 मार्च को एक प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया “भारत सरकार नीरव मोदी को हिंदुस्तान लाने के लिये सभी जरुरी कदम उठा रही है और हमें इस बात की भी जानकारी है कि वो लंदन में है.”

हालाँकि ईडी अधिकारियों ने बताया कि हीरा कारोबारी तथा अन्य के खिलाफ आरोप पत्र मुंबई स्थित विशेष मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून अदालत के समक्ष दायर किया गया है. एजेंसी ने इसमें अभियुक्तों के विरुद्ध जुटाए गए अतिरिक्त सबूतों और कुर्क की गई संपत्ति को रिकॉर्ड कराया है.

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