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द-हिंदू चैयरमेन एन राम: “कोई भी हमें हमारे स्रोतों को प्रकट करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता,”

तर्कसंगत

Image Credits: NDTV

March 13, 2019

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द हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के चेयरमैन एन राम ने बुधवार 6 मार्च को स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी तरह से मजबूर नहीं किया जा सकता है कि वे उन गोपनीय सूत्रों के बारे में बतायें जिससे उन्हें राफेल के दस्तावेज मिले थे. उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि वे सभी संरक्षित हैं और उन्होंने कुछ भी नहीं चुराया है. राफेल सौदे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक किया गया सौदा था.

 

“हम पूरी तरह से सुरक्षित हैं”

उन्होंने द हिन्दू की रिपोर्ट में बताया “हम संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत ‘बोलने और व्यक्त करने की आजादी’ के मौलिक अधिकार और अनुच्छेद 8 (1) (i) और 8 (2) ‘सूचना के अधिकार अधिनियम’ के तहत पूरी तरह सुरक्षित हैं.”

इंडिया टुडे की एक नई रिपोर्ट के अनुसार “एन राम ने कहा है कि पहला राफेल विमान सितंबर में आयेगा और विमान या उनकी गुणवत्ता को खरीदने की आवश्यकता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है. राफेल विमान के सौदे पर एन राम ने कई लेख लिखे है जिसमें सबसे नया 6 मार्च को लिखा गया है.”

हालाँकि सौदे की शर्तों पर और निर्णय लेने प्रक्रिया पर सवाल उठाने होंगे. एन राम ने कहा, “क्या नई डील पुराने सौदे से बेहतर है? क्या भारत की बातचीत में असहमति हुई है?” उन्होंने कहा कि पत्रकार खोज करके और छानबीन करके राफेल सौदे को सामने लाये है और द हिंदू ने भी अपनी जाँच में कठिन परिश्रम लगाया है. जनता के हित के लिये उन्होंने लिखा है, जो सरकार ने जनता से छुपाया है.

8 फरवरी को एन राम ने द हिंदू में लिखा था कि फ्रांस और भारत के बीच 59,000 करोड़ रुपये के राफेल सौदे पर बातचीत के दौरान रक्षा मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई ‘समानांतर चर्चा’ पर कठिन आपत्तियाँ उठाई थीं जो राफेल सौदे से संबंधित दस्तावेजों पर आधारित थीं.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रक्षा मंत्रालय से राफेल सौदे से संबंधित दस्तावेज चोरी हो चुके हैं और चोरी की जांच की जा रही है.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के अनुसार “जिन दस्तावेजों में राफेल के मूल्य निर्धारण के बारे में जानकारी थी और जो राजनीतिक बहस का मुद्दा है, उन्हें चुराकर द हिंदू को दे दिया गया है जिसे उन्होंने अपने समाचार पत्र में छापा है”

एन राम ने कहा कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (OSA), 1923 को दूर रखना चाहिये. OSA कानून का एक आपत्तिजनक हिस्सा है जो अलोकतांत्रिक है और शायद ही कभी स्वतंत्र भारत में प्रकाशनों के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया गया है.”

उन्होंने आगे कहा कि द हिंदू के अलावा राफेल के बारे में कई अन्य स्वतंत्र समाचार पत्र प्रकाशित हुये हैं और बहुत बड़ी बात यह है कि इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर कवर किया गया है जिससे इस मामले पर लगी चुप्पी को तोड़ा गया है.

 

रक्षा मंत्रालय से चोरी हुये दस्तावेज़

अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राफेल सौदे से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चुराये गये हैं. इस सौदे के मूल्य निर्धारण के बारे में महत्वपूर्ण दस्तावेज की फाइल मंत्रायल से चोरी की गयीं है और छपने के लिए द हिंदू अखबार को दी गई हैं. अभी फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट राफेल सौदे पर केंद्र सरकार को दी गई क्लीन चिट की समीक्षा याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुये अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया “ये दस्तावेज़ रक्षा मंत्रालय से या तो पूर्व या वर्तमान कर्मचारियों द्वारा चुराये गये हैं. ये गोपनीय दस्तावेज हैं और इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है.”

NDTV ने अपनी रिपोर्ट में बताया “भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पूछा कि इस संबंध में क्या कार्रवाई की जा रही है. अटॉर्नी जनरल ने बताया कि यह जानने के लिए जांच चल रही है कि दस्तावेज कैसे चुराये गये हैं” उन्होंने द हिंदू पर इसे समाचार पत्रों में छापने का आरोप लगाया. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि “यह एक आपराधिक मामला है. हम पहले से ही आपत्ति कर रहे हैं क्योंकि गोपनीय दस्तावेजों को याचिका के साथ पेश नहीं किया जा सकता है. कोर्ट में चल रही और पहले से लंबित याचिकाओं को खारिज किया जाना चाहिये. प्रशांत भूषण सहित अन्य याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों पर भरोसा करके आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन कर रहे हैं.”

 

द हिंदू की रिपोर्ट

द हिंदू ने राफेल सौदे के बारे में कई लेख प्रकाशित किये हैं. ये रिपोर्ट कई सरकारी दस्तावेजों पर आधारित बताये गये हैं. पहली रिपोर्ट में कहा गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने फ्रांसीसी पक्ष के साथ समानांतर बातचीत की. एक अन्य रिपोर्ट में दैनिक ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी दंड के लिए महत्वपूर्ण प्रावधानों को माफ कर दिया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने से कुछ दिन पहले एस्क्रो अकाउंट (बैंक गारंटी के अभाव में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय से पैसों का आदान प्रदान) के माध्यम से भुगतान करने की सिफारिशों को खारिज कर दिया था.

राफेल डील पर एक अन्य रिपोर्ट में द हिंदू ने खुलासा किया कि रक्षा मंत्रालय के सात सदस्यीय भारतीय टीम में से तीन सदस्यों ने कहा कि पीएम मोदी सरकार की 36 उड़ने लायक राफेल विमानों का सौदा पिछली सरकार के 126 विमानों के सौदे से बेहतर नहीं है.

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