सप्रेक

राष्ट्रपति नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित, पुष्पा ने 600 से अधिक दिव्यांग लोगों के लिए परीक्षाएँ लिखी हैं

तर्कसंगत

March 14, 2019

SHARES

एन एम पुष्पा प्रिया, एक बेंगलुरू-आधारित लेखिका हैं, जिन्होंने 600 से अधिक दिव्यांग लोगों के लिए लिखित परीक्षा दी है, उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नारी शक्ति पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया. यह पुरस्कार हर साल महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है.

पुष्पा ने तर्कसंगत के साथ एक पुराने इंटरव्यू में, अपने काम के बारे में बात की थी कि कैसे वह दिव्यांग प्रतिभाशाली लोगों के लिए परीक्षा लिखने को एक अपनी एक बड़ी जिम्मेदारी महसूस करती हैं.

 

Posted by Ministry of Women & Child Development, Government of India on Friday, 8 March 2019

 

उन्होंने 600 से अधिक परीक्षाएँ लिखी हैं

एन एम पुष्पा प्रिया ने तर्कसंगत को बताया, मैं सौभाग्यशाली महसूस करती हूं कि मैं ठीक से बोल सकती हूं और देख सकती हूं, लेकिन यह मुझे उन लोगों से बेहतर नहीं बनाता है जो ऐसा नहीं कर सकते हैं, वह (दिव्यांग) अपने आप में ही बहुत प्रतिभाशाली हैं, मैं केवल उनके कौशल को दुनिया के सामने रखने में मदद करती हूं”.

पुष्पा दस साल से अधिक समय से परीक्षाएं लिख रही हैं, अपने लिए नहीं बल्कि उन लोगों के लिए जो किसी भी दिव्यंगता से पीड़ित हैं, जिसके कारण ये लोग परीक्षा नहीं लिख पाते हैं.

पुष्पा, जो एक बैंगलोर की सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करती है, और अब एक जानी मानी एग्जाम स्क्राइब भी हैं. उन्होंने विभिन्न पाठ्यक्रमों और विषयों के लिए अब तक 681 परीक्षाएं दी हैं. वह खुद को लोगों की आंख‘, ‘हाथऔर कानकहती है.

 

 

पुष्पा ने बताया कि , “यह सब कुछ साल पहले शुरू हुआ था, जब मेरे पड़ोसी, जो एक एनजीओ के साथ काम कर रहे थे, ने मुझे 10 वीं कक्षा की एक नेत्रहीन लड़की के लिए परीक्षा लिखने के लिए कहा. मैंने तब बहुत कुछ नहीं सोचा और हाँ कह दिया. अगले दिन जब परीक्षा शुरू हुई, तो मैंने एक परीक्षा लेखक की चुनौतियों को समझा. मुझे लगा कि मैं इसे फिर से नहीं कर पाऊंगी, लेकिन अब देखिए, मैं 1000 परीक्षाएं पूरी करने के करीब हूं”.

पुष्पा का कहना है कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा में जो समस्या आई है, उससे उन्हें प्रेरित रहने और दूसरों के लिए कुछ करने में मदद मिली है. उन्होंने तर्कसंगत को बताया कि वह अपनी कक्षा 7 वीं की परीक्षा नहीं दे पा रही थी क्योंकि उनके पिता स्कूल की फीस देने में असमर्थ थे.

 

 

पुष्पा ने कहा, “हम आर्थिक रूप से बहुत कमजोर थे. मेरे पिता बिस्तर पर थे और मेरी माँ केवल 500 रुपये प्रति माह कमा रही थी. हमारे परिवार के भोजन और दवाओं के बिल का खर्च उठाना उनके लिए कठिन था. उस समय मेरे बड़े भाई और मुझे एक साल के लिए स्कूल छोड़ना पड़ा. बाद में हमारे एक परिचित से मदद मिली, जो पोलियो के मरीज थे. मैं अब दूसरों की मदद करके एहसान वापस कर रही हूं.

पुष्पा, जिन्होंने कंप्यूटर में डिप्लोमा किया और उनके बड़े भाई मोहन कुमार दोनों काम कर रहे हैं और अब आर्थिक रूप से स्थिर हैं.

 

 

BTM Layout निवासी, पुष्पा इन सभी परीक्षाओं को मुफ्त में लिखती है. जब उनसे पूछा गया कि उन्हें अपनी नौकरी के कार्यक्रम से समय कैसे मिलता है, तो वे कहती हैं, सप्ताह के दिनों की परीक्षाएं आमतौर पर सुबह में होती हैं, इसलिए मैं अपने कार्यालय से थोड़ी देर से पहुंचने और अतिरिक्त समय में काम करने की अनुमति लेती हूं. पुष्पा ने कहा वीकेंड्स में, मैं एक फुल टाइम परीक्षा लेखक के रूप में काम करती हूं”.

उन्होनें 6 साल के बच्चे के लिए और यहां तक कि 60 साल के बुज़ुर्ग के लिए भी परीक्षा लिखा है. पुष्पा ने सेरेब्रल पाल्सी और डाउन सिंड्रोम वाले छात्रों के लिए परीक्षा भी लिखी है.

वह कहती है, अगर कोई स्क्राइब बनना चाहता है तो उसे तीन चीजों के साथ बहुत अच्छा होना चाहिए- धैर्य, समन्वय और आत्मविश्वास.

 

 

ऐसे समय थे जब मुझे 50 से अधिक बार प्रश्न दोहराना पड़ता था, कभी-कभी बच्चे या वयस्क को प्रश्नों का उत्तर देने में काफी लम्बा समय लगता था. मैंने साइन लैंग्वेज भी चुनी है लेकिन फिर भी, सेरेब्रल पाल्सी वाले लोगों के साथ काम करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है.

वह कहती हैं कि उन्हें उत्तर लिखते समय बहुत चौकन्ना रहना होता है क्योंकि यह उनके भविष्य की बात है. उसे लगता है, यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह अपने काम को अच्छे से करें,  अन्यथा “उनका (छात्रों के) सभी मेहनत बेकार चला जायेगा”.

पुष्पा को अकेले यात्रा करना और स्वयंसेवक जैसे काम काफी पसंद है. वह कई एनजीओ के लिए स्वेच्छा से काम कर रही हैं जो एसिड अटैक सर्वाइवर्स और अनाथों के लिए काम करती हैं. वह रक्तदाताओं के लिए एक फेसबुक पेज भी चलती है.

उनके बड़े भाई तर्कसंगत से बात करते हुए कहते है, कि मुझे पुष्पा के काम पर गर्व है. वह लोगों के साथ बहुत दोस्ताना है और उसे लोगों को समझने की एक अनोखी शक्ति मिली है. मैं बस यही चाहता हूं कि वह जो भी चाहत है, वह उसे जरुर करे”.

तर्कसंगत को इस बात की ख़ुशी है कि पुष्पा के नेक काम को सरकार ने मान्यता दी है. वह इन सारे कार्य के परिणाम की हकदार है और हमें उम्मीद है कि यह दूसरों को भी इसी तरह का काम करने के लिए प्रेरित करती रहेगी.

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...