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CMIE: बेरोजगारी हर महीने के साथ बदतर होती जा रही है, फरवरी में 7.2% थी

तर्कसंगत

March 15, 2019

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2014 के चुनावों के दौरान मोदी सरकार के प्रमुख चुनावी वादों में से एक वादा नौकरियों का भी था. ठीक पांच साल बाद, जब पूरा देश 2019 के चुनावों के लिए तैयार है, तो यह सवाल उठता है कि सरकार अपने वादों को पूरा करने में कितनी सफल रही है. कई रिपोर्टों ने देश में बेरोजगारी बढ़ने का संकेत दिया है जिससे लगता है सरकार बहुत हद तक अच्छी नहीं रही है.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की एक रिपोर्ट के अनुसार बेरोजगारी दर बढ़कर 7.2% हो गई है जो 28 महीनों में सबसे ज्यादा है.

 

बेरोजगारी दर में बढ़ोत्तरी

फरवरी 2018 में बेरोजगारी की दर 5.9% थी जबकि पिछले साल यह 5% थी. फरवरी 2019 में रोजगार व्यक्तियों की संख्या 40 करोड़ थी. पिछले साल फरवरी 2018 में इसी समय के आसपास यह संख्या 40.6 करोड़ थी और फरवरी 2017 में यह 40.75 करोड़ थी.

बिजनेस टुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि श्रम भागीदारी दर भी गिर रही है. श्रम भागीदारी दर से तात्पर्य कामकाजी-आयु (15 वर्ष की आयु से अधिक) की जनसंख्या के अनुपात से है जो या तो रोजगार पर हैं या बेरोजगार हैं लेकिन लगातार नौकरी की तलाश में हैं. मासिक आधार पर भी महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है. जनवरी 2019 में श्रम भागीदारी दर 43.2% थी जो फरवरी 2019 में घटकर 42.7% हो गई. CMIE के प्रमुख महेश व्यास ने बताया “2018 के हर महीने और 2019 के महीनों में अब तक का अनुपात हमेशा से कम रहा है. 2017 में भी यही स्थिति थी. लेकिन इसके लिये विमुद्रीकरण (Demonitisation) को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. 2018 और 2019 में भी श्रम भागीदारी दर में लगातार कमी भारत के श्रम बाजारों की गहरी समस्या का संकेत देती है.

 

 

CMIE की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत ने पिछले एक साल में श्रम भागीदारी में गिरावट और बेरोजगारी की बढ़ती दर को देखा है. दोनों ने ही रोजगार दर को बुरी तरह प्रभावित किया है. नवंबर 2017 में यह 41.8% पर थी जो 39.5% तक नीचे गयी है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के वरिष्ठ अर्थशास्त्री जॉन ब्लेडॉर्न ने कहा कि भारत में 30% युवा हैं जो उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिहाज से बहुत अधिक है.

 

तर्कसंगत का तर्क 

पिछले साल एक इंटरव्यू में पीएम मोदी के पकोड़ा वाली टिप्पणी बहुत चर्चा में रही. एक ज्वलंत समस्या के प्रति पीएम का ऐसा रवैया प्रदर्शित स्वीकृत नहीं किया जा सकता है. इसके अलावा भाजपा के कई नेता या तो झूठे दावे कर रहे हैं या इन सवालों से भाग रहे हैं. इस समय सरकार ने जो कदम उठाने का इरादा किया है वह काफी हद तक बस उम्मीदों में ही हैं.

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