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यह मुंबई कपल क्लीन ईटिंग को बढ़ावा देने के लिए गोभी, लेट्यूस आदि पैदा कर हाइपरलोकल फार्म चलाते हैं

तर्कसंगत

March 18, 2019

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जब हम “खेत” शब्द के बारे में सोचते हैं तो हम क्या सोचते हैं? सूरज के नीचे हरी-भरी हरी-भरी जमीनें जो आमतौर पर शहर की हलचल भरी शोर से दूर , पालतु पशु, ताजा उपज और भारतीय किसानों की पारंपरिक छवि हमारे सामने आ जाती हैं. जबकि पूरे देश और दुनिया भर में खेती की बहुत किस्में हैं, खेती की हमारी समझ के लिए मिट्टी और धूप की आवश्यकता लगभग अनिवार्य है.



कृषि में नये संशोधन

हालाँकि, मुंबई में एक दंपत्ति ने बिना मिट्टी के खेती की बात की है जिसे हाइड्रोपोनिक खेती कहा जाता है. जोशुआ लुईस और सकीना राजकोटवाला के पास खेती की दुनिया में काम करने से पहले अच्छी  नौकरियां थीं, कोई और 24 साल का युवा इस पेशे को नहीं चुन सकता था. 2017 में, पुडुचेरी में ऑरोविले की टाउनशिप की अपनी यात्रा के दौरान, दंपति प्राकृतिक खेती के प्रमुख कृष्ण मैकेंजी से प्रेरित हुए. आज, वे मुंबई के अंधेरी पूर्व में 1,000 वर्ग फुट से कम के कमरे में हर्बिवोर फार्म चलाते हैं जो 2,500 से अधिक प्रकार के हरे सहित 2,500 से अधिक पौधों को उगाता है.

तर्कसंगत से बात करते हुए, जोशुआ ने कहा, ” हमारी उपज कहां से आती है, उस बात ने मुझे पहली बार इस विषय के बारे में दिलचस्पी दी.” उन्होंने तीन महीने तक एक प्राकृतिक खेत में काम किया और ताजा उपज के खपत और महत्व का एहसास किया.

 



सकीना ने ठीक ही कहा कि अधिकांश, लोग जो शहर में रहते हैं, उनके इस्तेमाल में लाये जाने वाले सब्ज़ि दूर गाँव से ही आते हैं, इसलिए हमारे पास उस शुद्धता के कारन को जानने के अलावा और कोई चारा नहीं था. “पोषक तत्वों, और ताज़ी पैकेजिंग, परिवहन की पूरी प्रक्रिया के दौरान खो जाती है और फिर उन चीज़ों को अलमारियों में रख दिया जाता है, जहां लाभकारी तत्वों में से बहुत कुछ ख़त्म हो जाता है,” उन्होने कहा. इसी पर बात करते हुए, जोशुआ ने कहा कि जब वह पैकेज्ड और स्टोर में खरीदी गई सामानों का उपयोग करते है, तो पत्ते अधिक बार मुरझा गए होते हैं, जो पोषक तत्वों की अनुपस्थिति का संकेत है.

“स्वस्थ भोजन का कोई मतलब नहीं है अगर खाने में मूल पोषक तत्वों की कमी है जो हम अपने शरीर में चाहते हैं,” उन्होंने कहा. इस तरह की सभी समस्याओं से त्रस्त होकर और मुंबई में एक बदलाव लाने की इच्छा के साथ, दंपति ने अंधेरी में एक हाइपरलोकल फार्म शुरू करने के अपने विचार को लेकर आगे बढ़े. हालांकि, उनके विचार को विरोध, ताने और उनके आसपास के लोगों की कड़ी आलोचना मिली जिन्होंने सोचा था कि प्रोजेक्ट सिर्फ कुछ समय के लिए है .



हाइड्रोपोनिक खेती क्या है?

मुंबईकरों के दरवाजे पर स्वस्थ भोजन लाने के लिए दृढ़ संकल्पित युगल ने हाइड्रोपोनिक खेती के कांसेप्ट के बारे में शोध करना शुरू किया जो न केवल मुंबई पर भारत के लिए नया था. सकीना ने कहा, “हमें उन सभी सवालों का कोई जवाब नहीं मिला, जो हमें हाइड्रोपोनिक फार्मिंग पर थे और इसलिए, बहुत सी चीजें जो हम जानते हैं, वे अब ट्रायल और एरर मेथड से आती हैं.” इस युगल ने सकीना की छत पर एक पायलट परीक्षण किया, जिसने उन्हें इस तरह की खेती में क्या करे और क्या न करे उसकी जानकारी दी.

 


 

महीनों के परीक्षण के बाद हर्बिवोर फार्म्स का सिद्धांत आया, जो ‘काइंड कल्टीवेशन’ नामक एक पद्धति पर आधारित था. दंपति ने एक पुरानी औद्योगिक एस्टेट में एक गोदाम को एक तापमान नियंत्रित इनडोर फार्म में बदल दिया, जहां लेट्यूस की सात किस्में, स्विस चार्ड की तीन किस्में, दो प्रकार के रॉकेट और केल की चार किस्मों को बिना पेस्टीसाइड्स का उपयोग करके उगाया जाता है. दंपति, जिनकी मासिक सदस्यता बॉक्स की कीमत 1,500 रुपये है, ताजा उपज को ग्राहक के दरवाजे पर कटाई के कुछ ही घंटों में पहुंचाते है.

हाइड्रोपोनिक तकनीक में बिना मिट्टी की खेती शामिल है, जिसमें पारंपरिक खेती की तुलना में 80% कम पानी की आवश्यकता होती है. इसके अतिरिक्त, पौधों को एक जीवाणुरहित वातावरण में उगाया जाता है और मैक्रो और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को पानी के घोल में सीधा पौधों की वृद्धि के लिए दिया जाता है. इसके अतिरिक्त, एक वर्टिकल मॉडल में बढ़ते पौधे युगल को पांच गुना अधिक पौधे विकसित करने की अनुमति देते हैं. अपने उत्पादों के लिए लोगों की प्रतिक्रिया की जांच करने के लिए, उन्होंने ग्राहकों को मुफ्त सैम्पल्स दिए.

 


 

हालांकि शुरुआती उत्पादन खर्च अनुमान से अधिक रहा, लोग स्वस्थ रहने और ताजा खाने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, युगल ने कहा. “भले ही बक्से की किंमत अधिक है, ताजा उपज की हमारे ग्राहकों के बीच मांग बढ़ रही है,” उन्होंने कहा. जहां दंपति को दूसरों को उनके जैसे पौधे उगाने के बारे में सिखाने का अनुरोध मिल रहा है, वहीं दंपति भविष्य में लोगों को हाइड्रोपोनिक खेती के बारे में शिक्षित करना चाहते हैं. जोशुआ और सकीना दोनों ने सपने देखने और एक ऐसी दुनिया में एक अंतर बनाने की हिम्मत की. तर्कसंगत खेती के एक अभिनव तरीके को लाने की कोशिश करने के लिए उन दोनों की सराहना की.

 

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