मेरी कहानी

मेरी कहानी: “मैंने खुद अंतर्जातीय विवाह किया है और 150 अन्य ऐसे जोड़ों को शादी करने में मदद की है”

तर्कसंगत

March 18, 2019

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10 फरवरी को, एक गैर-सरकारी संगठन अढ़ालिनल काधाल सैवीर (AKS) द्वारा संचालित अंतर-जातीय जोड़ों के लिए आश्रय गृह का राज्य के समाज कल्याण विभाग ने उद्घाटन किया. AKS एक NGO है जो 2017 में चार वकीलों और एक सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक द्वारा शुरू किया गया था. यह नेक काम करने के लिए एडवोकेट सी. गुनसेकर, एडवोकेट पोरकोड़ी, एडवोकेट इलमठी, एडवोकेट अंगयार कन्नी और रिटायर्ड पुलिस हेड कॉन्स्टेबल पीताची सुडार तमिलनाडु के अलग अलग क्षेत्रो से आगे आए. ये सभी पाँच व्यक्ति सक्रिय पेरियारिस्ट हैं. खुद अंतरजातीय विवाह करने के बाद, उन्होंने कई ऐसे ही जोड़ों की मदद की है जो नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं. इसी तरह के विचार, विचारधारा और विश्वास उन्हें एक साथ लाए, जिसके कारण AKS की स्थापना हुई. पेरियार, जिन्हें “आधुनिक तमिलनाडु का जनक” कहा जाता है, एक सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने जाति प्रथा और महिला उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. उनकी विचारधारा का अनुसरण करने वाले व्यक्तियों को पेरियारवादी कहा जाता है.



ए.के.एस. के एक सक्रिय पेरियारिस्ट और मैनेजिंग ट्रस्टी सी गुनसेकर ने अपने स्वयं के अंतर्जातीय विवाह का आयोजन किया था. वह हमारे साथ अपनी कहानी शेयर करते है:


मेरा जन्म 1972 में मेट्टूर डैम और इरोड के बीच एक गाँव में हुआ था. जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा था, मैंने पेरियार और उनकी विचारधारा के बारे में बहुत कुछ पढ़ा. 1994 में, मैंने एम.कॉम पूरा किया और उसी के साथ, मैं एक सक्रिय पेरियारिस्ट भी बन गया. मैंने फैसला किया कि मैं केवल उस लड़की से शादी करूंगा जो मेरे समुदाय या जाति से नहीं है. यह सच है कि मैं पहले से ही काम कर रहा था, स्वतंत्र था और मेरे परिवार ने मेरी विचारधारा का समर्थन किया, मुझे ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा.

मेरा यह निर्णय मुझे चेन्नई में पेरियार थाइडल तक ले गया. मैं फिर एक अंतरराष्ट्रीय अनाथालय, एसओएस गाँव गया. वहां मैंने अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें मेरी विचारधारा और उद्देश्य के बारे में बताया. उन्होंने फिर मुझे उस महिला से राजेश्वरी से मिलवाया, जो आगे जाकर मेरी पत्नी बनी हमने एक दूसरे को जाना और 1997 में शादी कर ली. इसी तरह मैंने अपनी शादी की व्यवस्था की. 2002 में हमे बेटा हुआ. वह अब 11 वीं कक्षा में है और मेरे जैसा वकील बनने की इच्छा रखता है.

मेरे जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ 2003 में आया, जब कुड्डलोर जिले में एक वन्नियार लड़की, डी कन्नगी और दलित लड़के, एस मुरुगेसन की हत्या परिवार के सदस्यों द्वारा की गई. उन्होने कॉलेज के दौरान शादी की, फिर वे चले गए लेकिन माता-पिता द्वारा उन्हें ट्रैक किया गया और उन्हें जहर दिया गया. इस घटना ने वास्तव में मुझे हिला दिया. मैंने एक वेबसाइट tnicm.org डिजाइन की है. TNICM का मतलब तमिलनाडु इंटरकास्ट मैरिज है. इसके अलावा, 2008 के बाद से, मेरा लगभग हर सप्ताहांत राज्य के विभिन्न जिलों में यात्रा करने के लिए बिताया गया है. मैं वकीलों और ऐसे जोड़ों से मिलता हूं. मेरी नेटवर्किंग ने मुझे ऐसे लोगों से जुड़ने में मदद की है जो मदद कर सकते हैं, अगर कोई भी अंतर्जातीय युगल शादी करना चाहता है लेकिन विरोध का सामना कर रहा है. इन सभी वकीलों और अधिकारियों के फोन नंबरों का उल्लेख मेरी वेबसाइट पर किया गया है और संकट में किसी भी जोड़े को त्वरित सहायता के लिए, उनकी जगह के संबंध में संपर्क कर सकते हैं. मैंने 150 से अधिक ऐसे जोड़ों की व्यक्तिगत रूप से शादियां की हैं और उनकी काउंसलिंग की है.

मैं जो काम कर रहा हूं, उसके लिए मुझे धमकियां भी मिली हैं, लेकिन मेरा मानना ​​है कि तमिलनाडु में अतंर्जातीय शादी के संबंध में स्थिति काफी बेहतर है. मैं अपनी ओमनी वैन में स्वतंत्र रूप से घूमता हूं जिस पर पेरियार की शिक्षाएं हैं, इस पर मेरे फोन नंबर का भी उल्लेख है. मुझे जिज्ञासा से देखा जाता है और राहगीरों से कई बार मुस्कान प्राप्त होती है. मेरा मानना ​​है कि अगर हरियाणा या उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में मैंने इस तरह की कोई कोशिश की, तो मुझे अपनी वैन के साथ जला दिया जाएगा. हालाँकि, मैं अभी भी मानता हूं कि तमिलनाडु पेरियार की भूमि है और यह बहुत शर्मनाक है कि हमें अभी भी दूसरी जाति या समुदाय के किसी व्यक्ति से शादी करने के बारे में दो बार सोचना  पड़ता है.

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