मेरी कहानी

15 घंटे की तैयारी के बाद ये एक दिन में 500-700 लोगों को भोजन देती हैं, वो भी मात्र 25 रुपये प्लेट के हिसाब से

तर्कसंगत

March 19, 2019

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महिलाओं को अक्सर आकांक्षी पुरुषों के पीछे एक सहायक बल के रूप में माना जाता है. सफल पुरुषों के बारे में बताने के लिए काफी फिल्में, किताबें और प्रेरक हमारे आसपास हैं, और इन सब में महिलाओं को सहयोग में केवल एक सहायक बल के रूप में माना जाता है. जबकि ऐसी महिलाओं के लिए यह कोई अनादर की बात नहीं है, हम निश्चित रूप से महिलाओं को अपना जीवन और अपने आसपास के लोगों के लिए चीजों को और अधिक सुखद बनाने के लिए दिखा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि यह कोई कहानी नहीं है, लेकिन इस तरह की समस्या लोकप्रिय मीडिया में न्यूनतम महत्व के साथ देखा जाता है. हालांकि, गली-मोहल्लो के रस्ते पर थोड़ा सा चलने पर आपको महिलाओं की कई कहानियों को उजागर करने के लिये प्रेरणा देगा, जो अद्भुत परिवर्तन लाने के लिये बहुत बड़ा कार्यभार लेकर चल रही है.

 

चंद्र श्वेता ऐसी ही एक महिला हैं, जो बेंगलुरु में एक खाने की ठेले की मालकिन हैं. दिन में 15 घंटे से अधिक काम करती है, एक आम आदमी श्वेता से एक या दो सबक तो ले ही सकता है कि कितनी जल्दबाज़ी में उन्हें सारे अपने काम करने पड़ते है. अपने बारे में श्वेता खुद बताती हैं कि

 

हमारा परिवार आंध्र प्रदेश के तिरुपति में एक सफल होटल व्यवसाय चला रहा था. हम काफी अच्छी तरह से जीवन व्यतीत कर रहे थे और हमेशा जरूरतमंद लोगों को पैसे उधार देते थे. हालाँकि, इस बात ने हमें मुश्किल में डाल दिया. हम वित्तीय परेशानियों से झूझने लगे और पैसे वसूल नहीं कर पाए. मैं डिप्रेशन में चली गयी, आत्महत्या के विचार भी आने लगे.

थोड़े बहुत बचे हुए पैसे से हमारे जीवन का निर्माण करने की उम्मीद के साथ, मेरे पति और मैं, मेरी वृद्ध मां और मेरी चार साल की बेटी के साथ 2017 में बेंगलुरु चले आये. दिसंबर 2017 तक हमारे पास हमारी छोटी खाने की गाड़ी थी. यह उस बड़े रेस्तरां के उलट है, जहां से हम वापस आ गए थे, लेकिन हमारे पास जो कुछ भी है उसके लिए हम आभारी हैं.

हमारे चार लोग किराए के घर में रहते हैं और हमने एक छोटा कमरा भी किराए पर लिया है जहाँ हम सभी खाना पकाते हैं. मेरा दिन सुबह 3:30 बजे शुरू होता है. मेरे पति, जो स्वच्छता के बारे में बहुत सख्त हैं, पूरे कमरे को साफ करते हैं और फिर हम खाना बनाना शुरू करते हैं. नाश्ते के लिए, मैं इडली/डोसा, मसाला वड़ा, तले हुए चावल, पूड़ी के लिए आटा, दो तरह की चटनी और सांबर के लिए घोल तैयार करती हूँ. मुझे दोपहर के भोजन के लिए भी तैयारी करनी पड़ती है, जिसमें दाल भिगोना, सब्जियां काटना, आदि चीज़ें शामिल हैं.

 

 

6:30 बजे तक हम अपने भोजन की गाड़ी ले कर पहुँचते हैं और सुबह 7 बजे तक हमारा व्यवसाय शुरू हो जाता है. सुबह के घंटे विशेष रूप से व्यस्त रहते हैं. किसी भी दिन, हम 300 ग्राहक को खाना खिलाते हैं , जो वीकेंड्स में 500 से अधिक तक हो जाता है. यह दोपहर 12 बजे तक चलता है जिसके बाद हमें फिर से 150-200 लोगों के लिए दोपहर का भोजन तैयार करने के लिए अपने कमरे में जाना पड़ता है. दोपहर के भोजन के प्रबंधन के लिए मेरे पास एक घंटे का समय रहता है. दोपहर के भोजन के लिए हम जो खाना देते है वह बहुत विस्तृत है. चपाती, चावल (दो प्रकार), दाल, एक अलग प्रकार की सब्जी करी से लेकर रागी बॉल्स तक, हम अपने ग्राहकों को सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं.

मेरे पति और मेरे लिये, ग्राहक एक राजा हैं. हम BBMP कर्मियों से लेकर ऑफिस जाने वालों तक के लोगों को भोजन करवाते हैं. इसलिए हमारी कीमतें भी बहुत मामूली हैं. केवल 15 रुपये में एक बढ़िया नाश्ता और 25 रुपये में दोपहर का भोजन हो सकता है. हमने इस प्रक्रिया में बहुत सारी सद्भावनाएं भी कमाई हैं. कई ग्राहकों ने हमारी बेटी की शिक्षा को आगे बढ़ाने में मदद करने की भी पेशकश की है. वास्तव में, हाल ही में जब मेरी बेटी बीमार हुई, तो एक बाल रोग विशेषज्ञ, जो हमारे दैनिक ग्राहकों में से एक है, ने चेकअप किया और मुफ्त में दवाइयाँ भी दीं.

इस पूरे समय में, मैं और मेरे पति एक-दूसरे का एकमात्र सहारा रहे हैं और यही हमारी छोटी सी दुनिया है. हमारे पास अपनी बेटी के भविष्य के लिए विस्तृत सपने हैं, जो अभी यूकेजी में है. मैंने केवल सातवीं क्लास तक पढ़ाई की और मेरे पति ने दसवीं तक. लेकिन मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी एक डॉक्टर बने, जबकि मेरे पति उसे एक आईएएस या एक आईपीएस अधिकारी बनाना चाहते हैं. हम दिन-रात काम करते रहते हैं ताकि अपनी बेटी को सब कुछ प्रदान कर सकें. हम यहां अपने खुद के एक छोटे से होटल को भी शुरू करने की उम्मीद करते हैं, जैसा की हमें उम्मीद है कि हम बहुत जल्द ही हासिल कर पाएंगे.

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