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केरल के एर्नाकुलम स्टेशन पर सफाई कर्मचारियों ने की हड़ताल, तीन महीने से नहीं मिली सैलरी

तर्कसंगत

Image Credits: Indian Express/India Rail Info

March 20, 2019

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65 से अधिक संविदा सफाई कर्मचारी जो एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर हड़ताल पर हैं क्यूंकि उन्हें तीन महीने से वेतन नहीं मिला है. कार्यकर्ताओं में ज्यादातर महिलाये हैं और केरल के एर्नाकुलम जिले के अलग अलग हिस्सों की रहने वाली हैं. आशा (बदला हुआ नाम) ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वह अपना दिन सुबह 4.30 बजे शुरू करती है और सुबह तकरीबन 6 बजे काम पर पहुंच जाती है. अब उसके पास आने जाने के लिए भी पैसे नहीं हैं क्योंकि उन्हें पिछले तीन महीनों से सैलरी नहीं मिली है.

 

कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला

ये सभी ठेके पर काम करते हैं जिनकी जिम्मेदारी एर्नाकुलम के रेलवे स्टेशन को साफ रखना है जिसके लिए इन्हें  प्रति दिन 466 रुपये मिलते हैं.

प्रदर्शनकारियों ने शिकायत की कि स्थायी श्रमिकों को लगभग 35,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं जो उनकी तुलना में कम काम करते हैं. पूर्णिमा (बदला हुआ नाम) ने द न्यूज मिनट से बात करते हुए बताया “हम तीन शिफ्टों में सुबह 6 बजे से काम शुरू करते हैं लेकिन वे लगभग सुबह 10 बजे आते हैं और शाम को 5 या 6 बजे तक काम करते हैं. हमारा काम भी उनसे ज्यादा होता है लेकिन इसकी परवाह किये बिना हमें बहुत कम पैसे दिए जाते हैं. अगर हमें हमारी तनख्वाह समय से मिलती रहे तो हमें इन मुद्दों से कभी शिकायत नहीं होती.”

समय पर सैलरी नहीं मिलना एकमात्र समस्या नहीं है. ये लोग बिना किसी चिकित्सा सुविधा के काम कर रहे हैं. इनमें से किसी के पास ESI (कर्मचारी राज्य बीमा) की कोई बुनियादी स्वास्थ्य सेवायें नहीं हैं. सफाई कर्मियों ने बताया कि उनका ठेकेदार कोलकाता का है और कर्मियों ने पश्चिम बंगाल में अपनी ESI सेवाओं को पंजीकृत किया है इसलिए वे केरल में इसका लाभ नहीं उठा सकते हैं.

रेलवे कॉन्ट्रैक्ट कैटरिंग एंड जनरल वर्कर्स यूनियन (RCCGWU) के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति अपनी चिंताओं को व्यक्त करते हुए बताया “इन कर्मियों को ESI की तरह प्राथमिक चिकित्सा भत्ता भी नहीं मिलता है.” द न्यूज़ से एर्नाकुलम के सचिव सुरेश ने बताया “हम 18 मार्च को आयोग की अगली बैठक में इस मुद्दे के बारे में श्रम आयोग को शिकायत करेंगे.”

इस मुद्दे के कारण, कई कर्मियों ने अपनी नौकरी छोड़ दी है और मौजूदा लोग इसकी लागत का भुगतान कर रहे हैं. रेलवे के अधिकारी बाकी लोगों को उतने ही पैसो में ज्यादा काम करने के लिए बोलते हैं. वे सब शिफ्ट में काम करते हैं सुबह 6 से दोपहर 2 बजे, दोपहर 2 से 9 बजे और रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक.

एर्नाकुलम जिले के पारावुर इलाके के मूल निवासी लीजी ने न्यूज मिनट को बतायामैं उन कर्मचारियों में से एक हूं, जो स्टेशन पर रेलवे पटरियों की सफाई करते हैं और अक्सर वहां मौजूद कचरे को साफ करने से घिन आती  है.  मैं अपने परिवार को सहारा देने के लिये ये काम करता हूं जिससे थोड़े पैसे मिल जाते हैं लेकिन अब यहां पैसा भी नहीं है. अगर कोई दूसरा विकल्प होता तो मैं यहां कभी नौकरी नहीं करता.”

 

ठेकेदारों की प्रतिक्रिया

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि ठेकेदारों ने दो दिनों में श्रमिकों को वेतन देने का वादा किया था क्योंकि उनके पास कुछ वित्तीय संकट था.

हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है जब इन श्रमिकों को पैसों के कारण शिकायत हो रही है. पिछले दिसंबर में भी श्रमिकों ने उचित मजदूरी के लिए इसी तरह की हड़ताल की थी और उस समय भी ठेकेदारों ने वादे किये था लेकिन उनमें से कुछ को ही पैसा मिला था और वह भी पूरा नहीं. इस बार कर्मचारियों ने तब तक हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है जब तक सभी कर्मचारियों को पूरी तनख्वाह नहीं दी जाती है. लिजी ने कहा “इस बार हम झूठे वादों से मूर्ख बनने वाले नहीं हैं.”

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