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तर्कसंगत एक्सक्लूसिव: छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर पुल गिरने के हादसे के बाद भी प्रशासन ने सीख नहीं ली है

तर्कसंगत

March 22, 2019

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विगत 14 मार्च 2019 को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर हुई दुखद पुल गिरने की घटना से यह लेख लिखे जाने तक कुल 6 लोग काल के गाल में समा चुके हैं और अन्य 33 अभी भी गंभीर रूप से घायल अस्पताल में भर्ती हैं.

इस पृष्ठभूमि में, तर्कसंगत मुंबई टीम के वास्तुविद सुलभ जैन  ने घटना स्थल की पड़ताल की और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल के ऐसे डार्क स्थानों को उजागर कर रहे हैं जहां कभी भी कोई बड़ा हादसा आज नही, तो कल अवश्य हो सकता है.

“हज़ारों लाखों लोग अपनी आजीविका के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल से निकलते हैं. जब भी कोई हादसा होता है तो संबंधित अथोरिटी बस कुछ निलंबन कर मामले को दबा देते हैं और आम लोग भी अपना कोई परिजन ना होने के कारण दुर्घटना को भुलाकर अपने अपने काम में लग जाते हैं. पर यह गंभीर है कि हम लोग रोज़ अपनी जान को दांव पर लगा कर मुंबई लोकल से सफर करते हैं.” एक यात्री ने कहा.

ब्रहिनमुंबई मुनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने भी खानापूर्ति करते हुए पुल के मरम्मत के काम में लगे एक सुपरवाइजर और 6 माह पहले हुए स्ट्रक्चर ऑडिट करने वाले एक सुपरवाइजर को निलंबित कर दिया. आश्चर्य है कि कोई भी सीनियर अधिकारी कभी जिम्मेवार नहीं ठहराया जाता और सरकार भी घायल मरने वालों के लिए मुआवजे की घोषणा तुरंत कर देते हैं.

पुल सीएसटी रेलवे स्टेशन को आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन और टाइम्स ऑफ़ इंडिया की इमारत से जोड़ता है और हर दिन 1.5-2 लाख पैदल यात्रियों द्वारा इसका उपयोग किया जाता है. इसे पिछले साल नागरिक प्राधिकरण द्वारा किए गए सुरक्षा ऑडिट द्वारा “उपयोग करने लायक” घोषित किया गया था.

ढहने के कुछ समय बाद, संयुक्त पुलिस आयुक्त, देवन भारती ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (ए) के तहत बीएमसी और रेलवे अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि लापरवाही के दोषी पाए जाने वालों पर और कठोर धाराएं लगाई जाएंगी. सेंट्रल रेलवे के एक प्रवक्ता ने बीएमसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस समय ढला हुआ हिस्सा स्टेशन से जुड़ा था, वह बीएमसी के अधिकार क्षेत्र में था.

 

कोई सबक नहीं सीखा

1. 3 जुलाई, 2008 को अंधेरी स्टेशन पर गोखले रोड ओवर-ब्रिज (ROB) का एक पैदल हिस्सा ढह गया, जिसमें 2 की मौत हो गई और 3 घायल हो गए.
2. 14 अक्टूबर को, मुंबई में चरनी रोड स्टेशन के पास फुट ओवर-ब्रिज की सीढ़ियों से गिरकर एक व्यक्ति घायल हो गया था.
3. 9 फरवरी, 2017 को दहिसर स्टेशन में एक स्काईवॉक दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे एक घायल हो गया.

 

आइए! छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल के ऐसे कुछ और जगहों पर नजर डालते हैं :

 

1) हज़ारीमल सोमानी रोड : अगर आप नरीमन प्वाइंट या बॉम्बे हाईकोर्ट से आज़ाद मैदान होते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल का रुख शाम 6 बजे के बाद करते हैं तो संभवत: आप यह महसूस करें कि जैसे जैसे आप स्टेशन के करीब आते हैं, फुटपाथ पर इतनी भीड़ होती है कि आप अपने हाथ किसी भी दिशा में सीधे नहीं कर सकते. फुटपाथ पर ही बैठे छोटे विक्रेता इसे और संकरा कर देते हैं. किसी भी भगदड़ की स्तिथि में यहां एक भयावह मंज़र कभी भी शक्ल ले सकता है.

 

 

 

2) अंडर पास : जैसे ही हज़ारीमल सोमानी रोड से आगे बढ़ते हुए आप अंडरपास से टर्मिनल जाने की कोशिश करते हैं लगभग कई छोटे वेंडर जो गोल गप्पे से लेकर दाबेली और मोजों से लेकर गैजेट्स तक बेच रहे होते हैं, आप को रास्ते और सीढ़ियों तक पर मिलते हैं. इतने सारे वेंडरों का इतनी सी जगह पर निर्धारित स्थान पर रोज़ मिलना मात्र एक संयोग नहीं हो सकता.

 

 

ज़ाहिर है कि इतने व्यस्त जगह पर दुकान लगाना वह भी सीढ़ियों पर किसी भी अवांछित दुर्घटना की तैयारी है. प्रशासन इस तरह के रुकावटों पर काम कर के यात्रियों के लिए आवागमन आसान बना सकता है. किसी यात्री या दुकानदार की गलती एक भयंकर और भगदड़ को आमंत्रित कर सकती है. छोटे दुकानदारों को एक अलग स्थान दे कर या कड़े निर्देश के साथ हटाकर अधिकारी अपने कर्तव्य का सही तरह से निर्वहन कर सकते हैं. जहाँ हर दिन इतनी ज़्यादा मात्रा में लोगो को आना जाना हो वहां के व्यस्त और संकरे रास्ते और रुकावट से अगर कोई घटना नहीं हुई तो इसमें प्रशासन की कुशलता नहीं बल्कि यात्रियों की किस्मत ही है.

 

 

3) प्लेटफॉर्म : अंडरपास और अन्य रास्तों से होते हुए आप प्लेटफॉर्म पर आते हैं, ट्रेन से सुरक्षित दूरी को चिन्हित करने वाली कोई पीली लाइन वहां है ही नहीं. ऊपर से कुछ बैठने के लिए सीट पाने के उत्साहित लोग ट्रेन रुकने से पहले दौड़ कर चढ़ने का प्रयास करते हैं. लोग ट्रेन के काफ़ी करीब होते हैं और ऐसे में किसी भी प्रकार की धक्का मुक्की क्या प्रभाव डाल सकती है, आप समझ सकते हैं. 

 

 

 

4) ओवरब्रिज का अभाव : प्लेटफॉर्म 1 और 2 के बीच ओवर ब्रिज नहीं है. जानकर आश्चर्य होगा कि यहां स्टेशन से बाहर आने का रास्ता, हाल ही में हुई दुर्घटना स्थल पर ही खुलता है. लोकल ट्रेन यूं तो हर 3- 4 मिनट में आती जाती रहती है और लोग उसमे से चढ़ कर प्लेटफॉर्म बदलते हैं पर कई यात्री लोग ट्रेन की अनुपस्थिति में पटरियों से गुजरने में भी परहेज नहीं करते. खुलेआम मौत को आमंत्रण देने से रोकने के लिए रेलवे का कोई कर्मचारी वहां होता भी नहीं. स्थिति हास्यास्पद के साथ चिंताजनक भी है की मुंबई जैसे शहर में जहाँ लोकल ट्रैन उसकी लाइफलाइन कही जाती है.

 

5) दिव्यांगो की दुविधा : यूं तो हर लोकल में दिव्यांग डिब्बा आरक्षित है और डिब्बे के समीप प्लेटफॉर्म पर एक बीप ध्वनि संयंत्र भी लगाया हुआ है किन्तु स्टेशन के प्रवेश और निकास प्वाइंट दिव्यांग फ्रेंडली नहीं है.  उचित ढलान वाले रैंप, रेलिंग, ब्रेल आदि स्टेशन के हर प्रवेश निकास बिंदु पर नहीं है. मतलब की लोकल पर चढ़ने के लिए आपको सुविधा दी जाती है मगर प्लेटफार्म तक खुद से पहुँचने के लिए कोई इंतज़ाम नहीं है. 

 

 

टेक टाइल मैपिंग, जो आप आजकल मेट्रो स्टेशन पर दिव्यांग को प्रवेश से निकास तक बिना किसी अन्य मदद के लिए सहयोगी होता है, भी इस हेरिटेज स्टेशन पर अभी तक स्थापित नहीं किए गए हैं. कई स्थानों जैसे रेलवे प्लैटफॉर्म और ट्रेन के मध्य लेवल का अंतर भी उन्हें किसी अन्य यात्री से मदद लेने के लिए बाध्य करता है जो कई स्वाभिमानी दिव्यांग के लिए अपमानजनक तो है ही अपितु उन्हें किसी संभावित दुर्घटना के लिए भी एक्सपोज करता है.

समय और ज़रूरत है कि चरणबद्ध तरीके से सारे लोकल स्टेशन पर कुछ अंतर्राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से बदलाव किये जाएँ जिससे, हर वर्ग के यात्रियों के लिए यह एक आसान सफर हो न कि केवल आम जनता के लिए.

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल भारत के ऐतिहासिक रेलवे स्टेशनों में से एक है और यूनेस्को ने भी इसे वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किया हुआ है. ऐसे में बुनियादी और तकनीक जरुरतों की अवहेलना के कारण, होने वाली दुखद घटनाएं निर्दोष मौतों के अलावा पूरे देश के लिए भी शर्मिंदगी का सबब बनती है. तर्कसंगत रेल्वे और अन्य संबंधित विभागों से इस लेेख और ऐसे कई दुर्घटना संभावित स्थानों पर संज्ञान लेने की अपील करता है.

 

वास्तुविद सुलभ जैन  ने इस लेख के माध्यम से प्रशासन और लोगों का ध्यान इस ओर खींचना चाहा है जिससे भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सके.    

 

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