पर्यावरण

रिसर्च रिपोर्ट: 100 करोड़ भारतीयों को कम पानी वाले क्षेत्र में रहना पड़ रहा है

तर्कसंगत

Image Credits: Samacharnama

March 25, 2019

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22 मार्च को दुनिया भर में ‘विश्व जल दिवस’ के रूप में मनाया गया, जिसका उद्देश्य इस प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण करना है. हाल के एक रिसर्च में पानी की कमी की निराशाजनक स्थिति का पता चला है जो भारत के लिए अच्छी बात नहीं है. जहाँ हमारा शरीर 70% से अधिक पानी से बना है, लेकिन वही पानी हम 100 करोड़ भारतीयों के लिए उपलब्ध नहीं है, इकनॉमिक टाइम्स ने इसका खुलासा किया.

एक गैर-लाभकारी संगठन वाटरएड द्वारा आयोजित एक रिपोर्ट, “बिनीथ द सरफेस : स्टेट ऑफ़ द वर्ल्डस वॉटर  2019”, ने आगे बताया कि इन 100 करोड़ भारतीयों में से 60 करोड़ भारतीय ऐसे जगह पर रहते हैं जहाँ पानी की किल्लत सब से ज़्यादा है. जल गुणवत्ता सूचकांक में देश अब 122 देशों में 120 वें स्थान पर है. रिपोर्ट में जल संसाधनों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि और जलवायु और जनसंख्या परिवर्तन के कारण देश में पानी की कमी हुई है.

 

चावल और गेहूं की खेती बंद करें

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत में जबतक कृषि से जुड़े समस्याओं का समाधान नहीं निकलेगा देश के पानी की कमी का समाधान नहीं किया जा सकता. रिपोर्ट में कहा गया है कि गेहूं और चावल देश की दो सबसे महत्वपूर्ण फसलें हैं और इसके लिए बहुत अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है. इसने सुझाव दिया कि देश को इन दोनों फसलों को मक्का, बाजरा, ज्वार जैसी फसलों से बदला जा सकता है. ऐसा करने से पानी की मांग एक तिहाई कम हो जाएगी. गेहूं और चावल दोनों के लिए आवश्यक पानी की मात्रा को समझाने के लिए, रिपोर्ट में कहा गया है कि एक किलो गेहूं के लिए औसतन 1,654 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, और एक किलो चावल के लिए औसतन 2,800 लीटर पानी की आवश्यकता होती है. “2014-15 में, भारत ने 37.2 लाख टन बासमती का निर्यात किया. इस चावल को निर्यात करने के लिए, देश ने लगभग 10 ट्रिलियन लीटर पानी का उपयोग किया, जिसका अर्थ है कि भारत ने लगभग 10 ट्रिलियन लीटर पानी का निर्यात किया है, “रिपोर्ट में कहा गया है.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि खाद्य और कपड़े का आयात करने वाले धनी पश्चिमी देश सीमांत समुदायों के लिए दैनिक स्वच्छ पानी की आपूर्ति के लिए कठिनाई पैदा कर रहे हैं. इसका मतलब है कि ये देश उन उत्पादों का आयात करते हैं जो उत्पाद के उत्पादन के दौरान पानी की एक महत्वपूर्ण मात्रा का उपयोग करते हैं.

 

दुनिया भर में पानी की कमी

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि भविष्य में दुनिया में पानी की भारी कमी होगी. इसमें कहा गया है कि अभी तक 400 करोड़ लोग पानी के संकट वाले क्षेत्रों में रहते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह आंकड़ा 2050 तक 500 करोड़ लोगों तक बढ़ सकती है. इसने कहा कि 2040 तक 33 देशों में पानी के अत्यधिक तनाव का सामना करने की संभावना है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2000 और 2010 के बीच 22% पानी की तुलना में भूजल से निकाले गए पानी की मात्रा में वृद्धि हुई है.

तर्कसंगत अपने सभी पाठकों से कुशलतापूर्वक पानी का उपयोग करने के लिए आग्रह करता है. ग्राउंड वाटर को बचाने और बनाये रखने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग की स्थापना एक आवश्यक काम है. हम अपने पाठकों से यह आग्रह करना चाहेंगे कि शावर के बदले बाल्टी का उपयोग करें, घर के RO फ़िल्टर के वेस्ट वाटर का उपयोग साफ़ सफाई के काम में करें, रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अपने घर और हाउसिंग सोसाइटी में बढ़ावा दें.

 

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