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बिग फैट वेडिंग्स के दौर में, कर्नाटक के भाजपा विधायक ने एक साधारण सामूहिक विवाह में बेटे की शादी की

तर्कसंगत

March 25, 2019

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कर्नाटक के थिरथाहल्ली से विधायक अरगा ज्ञानेंद्र ने एक साधारण सामूहिक विवाह में अपने बेटे का विवाह कराया. यह कार्यक्रम सामुहिक विवाह संचालना समिति द्वारा आयोजित किया गया था, जो सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने के लिए काम करता है.

उनका बेटा अभिनंदन सामूहिक विवाह में शादी करने वाले पांच दूल्हों में से एक था. तीर्थहल्ली तालुका पंचायत के सदस्य प्रशांत कुक्के भी दूल्हे में से एक थे.

 

कुवेम्पु का मंत्र मंगलमय

अभिनंदन एमबीए करने बाद, बेंगलुरु की एक निजी फर्म के लिए काम करते हैं और श्रुति एचएस तीर्थहल्ली तालुका के बसावनी गांव की मूल निवासी हैं जो शिवमोग्गा में एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में गेस्ट लेक्चरर हैं.

 

 

तर्कसंगत के साथ बात करते हुए, जनानेद्रण ने कहा, “बहुत बार माता-पिता अपनी सभी बचत का उपयोग करते हैं, और विवाह करने के लिए ऋण लेते हैं. इन खर्चों पर रोक लगाने की जरूरत है. इस सामूहिक विवाह में लगभग 10,000 लोगों ने भाग लिया था. शादी में विभिन्न जातियों और समुदायों के व्यक्तियों ने भाग लिया, और इस जोड़े को आशीर्वाद दिया. हमें खुशी है कि हमारा बेटा और बहू इतने लोगों के आशीर्वाद से अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी शुरू करने जा रहा हैं, इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता.

 

 

उन्होंने आगे कहा कि शादी के लिये कोई निमंत्रण कार्ड वितरित नहीं किए गए थे और मेहमानों को सोशल मीडिया के माध्यम से निमंत्रण भेजा गया था.

 

 

इस शादी में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा और बीवाई राघवेंद्र और शोभा करंदाराजे जैसे पार्टी नेता शामिल हुए. चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता का अनुपालन चेक करने के लिये कार्यक्रम स्थल पर एक उड़न दस्ते और एक वीडियो निगरानी दल की प्रतिनियुक्ति भी की थी.

जानेन्द्र राज्य के प्रतिष्ठित साहित्यकार कुवेम्पु के सिद्धांतों के  एक कट्टर विश्वासी हैं और उन्होंने कवि द्वारा “मंत्र मंगलाय” को अपने जीवन में यथार्थ अपनाया है. 2017 में, उन्होंने अपनी बेटी को भी इसी तरह मंत्र मंगलाय विवाह में ही विवाहित किया था.

कुवेम्पु द्वारा विवाह का एक अतभुत आदर्श मंत्र मंगलाय विकसित किया गया था. यह विश्वमानवा (सार्वभौमिक पुरुष) में उनके आदर्श का विस्तार था. यह लोगों को दुनिया अपनी नज़र से देखने को कहते है, ना कि दुनियावी सामुदायिक पहचान के जरिए और ना ही संकीर्ण विचारों के ज़रिये.

यह शादी दहेज की अवधारणा को हटाती है और अंतर-जाति और अंतर-धर्म विवाह पर विचार करती है. कोई कुंडली मिलान नहीं है और पूर्ण तपस्या मनाया जाता है. एक पुजारी की आवश्यकता को परिवार के बुजुर्गों और अन्य शुभचिंतकों द्वारा समारोह में पूरा किया जाता है.

 

तर्कसंगत का तर्क 

विवाह को हमेशा लोगों के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण घटना मन गया है. परिवार अपनी जीवन की सारी कमाई को इसे बढ़ा चढ़ा कर दिखाने के लिये, मेहनत से कमाए पैसे को खर्च करते है, जो की असल में इसके महत्व को कम करता है एवं रिसोर्स का दुरुपयोग होता है.

हाल ही में सेलिब्रिटी और वीआईपी शादियों में धन का व्यापक प्रदर्शन चौंकाने वाला रहा है. हालाँकि, हम यह महसूस नहीं होता कि कोई व्यक्ति अपने जीवन में सिर्फ एक घटना के लिए दिवालिया हो जाना चाहिए. इस तरह की चीजो को पूरा करने के लिए जीवन में और भी बेहतर और अनेक प्रकार के दूसरे रास्ते भी है.

अपने बेटे को एक सामुदायिक विवाह में विवाहित करने के अरगा जानेंद्र के फैसले से न केवल सादगी का संदेश मिलता है, बल्कि साथ ही साथ विभिन्नता और विविधता का भी संदेश जाता है. तर्कसंगत को उम्मीद है कि दूसरे लोग भी इस पर ध्यान देंगे.

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