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“एक नई दुनिया की शुरुआत”: इस गैर सरकारी संगठन ने वंचित बच्चों तक ‘स्टोरी टेलिंग’ को पहुँचाया है

तर्कसंगत

March 25, 2019

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शुरू में यह अभियान सिर्फ़ यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था कि वंचित बच्चों को स्कूलों में किताबें उपलब्ध करायी जा सके, लेकिन अब यह एक संगठन के रूप में आगे बढ़ चुका हैं, जिसका उद्देश्य पढ़ने के माध्यम से शिक्षा में क्रांति लाना है. “शेयर ए बुक, इंडिया” समुदाय, हमारे राष्ट्र के युवा के दिमाग में कहानियों को बुनने और एक कम उम्र से अच्छी पढ़ने की आदतों को शामिल करके उनकी सोच को व्यापक बनाने का प्रयास कर रहा है. इस सेल्फ़-सस्टेनेबल पुस्तकालय के पीछे का मुख्य उद्देश्य, शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समानता को प्राप्त करना है.

बच्चों के लिए सीखना, आसान बनाने के उद्देश्य से, यह गैर-लाभकारी संगठन हमारे देश में पढ़ने की संस्कृति को बदलने के लिए कार्यरत है. लगभग दो साल पूरे करने के बाद, वह अब तक 4 शहरों में 18 स्कूलों तक पहुँच चुके हैं, लगभग 2398 बच्चे इस अनुभव से लाभान्वित हो रहे हैं. इस संगठन से संबंधित वालंटियर्स, विभिन्न बैकग्राउंड से आते हैं और वह अपनी लगन और मेहनत से शिक्षा में क्रांति लाने का नेतृत्व कर रहे हैं.

 

 

“यह उनके लिए एक पूरी नई दुनिया है”

शेयर ए बुक की सह-संस्थापक प्रीति ने बेहद दिल को छुने वाली घटना सुनाई, हम कुछ दिन पहले एक स्कूल में गए जहाँ हमने सिंड्रेला की कहानी सुनाई. छात्र बहुत घुलमिल गये और कहानी में खो गये थे. यह उनके लिए पूरी तरह से एक नई दुनिया थी. उन्होंने आगे कहा कि इसका प्रभाव ऐसा था, कि उन्होनें उस कहानी की सीख खुद से बताई.”

 

 

पढ़ने के सत्रों के बारे में उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए, आनंद भगत नाम के एक वालंटियर कहते हैं, “आज 5वीं कक्षा के बच्चों को कहानी की किताबें मिलीं. एक लड़की शब्दों को पढ़ने और उच्चारण करने में सक्षम नहीं थी. लेकिन एक स्टोरीबुक ने उसकी पढ़ने और समझने की इच्छा को उजागर कर दिया. वह संघर्ष कर रही है लेकिन वह कोशिश कर रही है. हा, यही सबिया में हमारा उदेश्य रहता है. हमें यकीन है कि वह आने वाले दिनों में पढ़ेगी और लिखेगी. उसने अभी अपनी यात्रा शुरू की है और हम जरुरत पड़ने पर उसके साथ पूरे सफ़र में साथ देंगे. इन छोटे बच्चों की आकर्षक ऊर्जा इन वालंटियर्स को पूरे जोश के साथ, हर शनिवार को नई कहानियों के साथ वापस आने पर मजबूर कर देता है.

 

 

अब तक, उन्होंने भारत के दस स्कूलो में टीच फॉर इंडिया के सहयोग से पुणे, कोटा में तीन सरकारी स्कूलों को गोद लिया है, और उन्होंने एक्शन फॉर एक्सीलेंस फॉर चिल्ड्रन एंड वूमेन फाउंडेशन, दिल्ली से समाज के वंचितों के लिए पढाई को सुलभ बनाने के लिये खुद को जोड़कर भी रखा है. इसके पीछे का विचार यह है कि पढाई को केवल लक्ज़री के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि बच्चों के लिए एक आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए. प्रत्येक स्कूल में दो वालंटियर्स को नामांकित किया जाता है और उनकी भूमिका एक प्रबंधक, एक शिक्षक, एक कहानीकार से लेकर एक काउंसलर तक की हो सकती है. कहानियों को पढ़कर सुनाने की आवश्यकता, जिससे विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों की कल्पना शक्ति को प्रेणना दी जाती है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है. अक्सर, कथाएँ उन्हें अलग-अलग दुनिया में ले जाती हैं और यह उनकी जिज्ञासा और कल्पना को उत्तेजित करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है.

 

जो लोग वालंटियर्स के रूप में इस अद्भुत एनजीओ का हिस्सा बनना चाहते हैं या इस नेक काम के लिए किताबें दान में देना चाहते हैं, वह [email protected] पर एक मेल के जरिये संपर्क कर सकते हैं.

 

लेख स्रोत: द लॉजिकल इंडियन | लेखक: अंकिता सिंह

 

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