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भारत के लिये गौरवमयी पल : अबू धाबी में विशेष ओलंपिक 2019 में हासिल किये 368 पदक

तर्कसंगत

Image Credits: All India Radio/Twitter

March 25, 2019

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आईपीएल शुरू होने से पहले इस तथ्य को ज़्यादा लोग नहीं जानते कि भारतीय एथलीट स्पेशल ओलंपिक में इतिहास रच दिया है. देश ने कुल मिलकर 368 पदक हासिल किये हैं. 14 मार्च से शुरू हुआ यह टूर्नामेंट अबू धाबी में आयोजित किया जा रहा है जो 21 मार्च तक चला. देश ने 24 में से 14 खेलों में भाग लेकर 85 स्वर्ण, 153 रजत और 124 कांस्य पदक जीते हैं.

भारतीय एथलीटों ने एथलेटिक्स, अक्वास्टिक्स, साइक्लिंग, जूडो, वेटलिफ्टिंग, टेबल टेनिस, रोलर स्केटिंग, बैडमिंटन, बास्केटबॉल ट्रेडिशनल, हैंडबॉल ट्रेडिशन और 7-साइड फुटबॉल (फीमेल) में बाजी मारी.

192 देशों के 7500 से अधिक एथलीट ने इस 15 वीं स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड समर गेम्स में हिस्सा लिया जिसका संरक्षण अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और यूएई के सशस्त्र बलों के उप सर्वोच्च कमांडर, महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कर रहे थे. इस साल के विशेष ओलंपिक को ‘विशेष ओलंपिक आंदोलन’ के इतिहास में सबसे एकीकृत खेलों में से एक माना गया है. साल 2015 में अमेरिका में हुए विशेष ओलंपिक में भारत ने 173 पदक जीतने में कामयाबी हासिल की थी.

 

रोलर स्केटिंग में उत्तम प्रदर्शन

रोलर स्केटिंग में भारतीय एथलीट की प्रतिभायें असाधारण रही. देश ने 19 मार्च को अबू धाबी राष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र (ADNEC) में हुई रोलर स्केटिंग स्पर्धा में 49 पदक जीते. देश ने रोलर स्केटिंग स्पर्धा में सबसे अधिक 13 स्वर्ण पदक जीते हैं इसके आलावा 20 रजत और 16 कांस्य पदक भी अपने नाम किये. भारत ने पहली बार जूडो और फुटसल में भाग लिया जिसमें क्रमशः 4 और 7 पदक हासिल किये.

 

19 साल के गरीब ने जीता स्वर्ण पदक

19 वर्षीय जितेंद्र पवल सभी के लिए प्रेरणा बन गये. अत्यंत गरीबी से जूझते हुये एथलिट बने जितेंद्र ने 17 मार्च को 200 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता. एक इंटरव्यू में पवल के कोच हरीश ने बताया “पवल ने कभी भी विश्व खेलों में भाग लेने की उम्मीद नहीं छोड़ी. भगवान ने इन एथलीटों को कई अद्वितीय और विशेष क्षमताओं के साथ-साथ दृढ़ संकल्प से भी भर दिया है.”

द लॉजिकल इंडियन देश भर के उन सभी एथलीटों को सलाम करता है जिन्होंने वैश्विक खेलों में भाग लिया है और हजारों को प्रेरित किया है. हम अपने सभी पाठकों से उनके खेल को अपनाने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिये कहते हैं क्योंकि इससे उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद मिलती है.

 

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