मेरी कहानी

मेरी कहानी: जब भारतीय सेना राजनेताओं के कपड़े नहीं पहनती तो राजनेता सेना के कपड़े क्यों पहनते हैं?

तर्कसंगत

Image Credits: Latestly

March 26, 2019

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लेफ्टिनेंट कर्नल संदीप अहलावत, एक भारतीय सेना अधिकारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर वोट हासिल करने के लिए सैन्य वर्दी का उपयोग करने वाले राजनेताओं से खेद प्रकार किया है. अहलावत का मानना है कि एक वर्दी खरीदी जा सकती है लेकिन सैनिक का दिल नहीं.

मेरे प्रिय राजनेताओं,

एक सैन्य जैकेट आत्मविश्वास को प्रेरित करता है, भारत के लोग अपने जीवन में सैनिक पर भरोसा करते हैं. फौज आपको एक साफ़ सुथरी व्यक्तित्व की पहचान देता है जिससे आप अजेय महसूस करते हैं. यह आपको एक शक्तिशाली “प्रभारी व्यक्तित्व” बनाता है. एक फैशन स्टेटमेंट के रूप में कार्गो ट्राउजर कुछ किशोरों द्वारा पहनना अच्छी तरह से समझा में आता है. लेकिन एक राजनीतिक रैली में एक राजनीतिज्ञ को सैन्य जैकेट पहने हुए देखना अपमानजनक है. आप एक दुकान से कुछ फैंसी मिलिट्री वियर खरीद सकते हैं, लेकिन आपको उस सैनिक जैसा दिल ,ज़ज़्बा कहाँ से मिलेगा, जिसका दिल भारत के लिए धड़कता है? आप अमेज़न ऐप से एक सैनिक के ज़ज़्बात आर्डर नहीं कर सकते !!

राजनेता ऑनलाइन भारतीय सेना की टोपी बेचते हैं या छलावरण सैन्य शर्ट / जैकेट दान करते हैं (विशेषकर राजनीतिक रैलियों के दौरान) का अर्थ है: –

1 . आप अपने राजनीतिक लाभ के लिए सेनाओं की वीरता का इस्तेमाल कर रहे हैं.
2. आप नकली राष्ट्रवाद को बेचकर मुनाफाखोरी कर रहे हैं.
3. आप सैन्य सामान को बेचकर अवैध गतिविधि को बढ़ावा दे रहे हैं.
4. कुछ भी उचित नहीं है सेना के सेवारत और बुजुर्ग समुदाय दोनों ही गुस्से में हैं.
5. कॉम्बैट अपियरेंस एक कॉम्बैट ज़ोन में अच्छा लगता है और दिल्ली के आरामदायक इलाकों में बाइक रैली में नहीं !! अपने माथे पर तिलक के साथ कॉम्बैट पहनना देखावा है.
6. आप भारतीय सशस्त्र बलों को एक राजनीतिक विवाद में घसीट रहे हैं, जो उनकी इच्छा के विरुद्ध और उनकी सहमति के बिना भी.
7. भारतीय सशस्त्र बल 130 करोड़ भारतीयों के हैं और फौजियों को केवल भारत के लोगों, भारत के संविधान और भारतीय गणराज्य के प्रति अपनी निष्ठा का सम्मान है !!

 

शामिल होइये ! प्रशिक्षित होइये ! प्रतिज्ञा लीजिये ! खून बहाइये ! अपने अंगों की आहुति दीजिये ! अपने प्राण त्यागिये! अपने भाई को मरते देखिये ! पीड़ित PTSD! छुट्टी पर आके दोबारा से वर्दी पहनिए  लेकिन वोटों के लिए भीख माँगने के लिए नहीं !!

“शपथ” के बिना यह सब बकवास है !!

कृपया इस तथ्य का सम्मान करें कि सैनिकों ने कभी भी आपकी कुर्ता पायजामा या खादी को विनियोजित नहीं किया है !!
और हाँ नेहरू जैकेट या बरबेरी जैकेट कुर्ता पायजामा के साथ अच्छा लग रहा है, न कि सेना के जैकेट के साथ !!

राजनेताओं को केवल साधारण जैकेट पहनना चाहिए, मैं फिर से दोहराता हूं …… .आप एक सैन्य जैकेट आर्डर कर सकते हैं लेकिन आप अमेज़न से एक सैनिक का दिल आर्डर नहीं कर सकते.

आशा है कि आप बात को समझेंगे.

INDIAN ARMY DOES NOT TALK/WEAR/PRACTICE POLITICS, WHY SHOULD POLITICIANS TALK/WEAR/PRACTICE INDIAN ARMY!!My Dear…

Posted by Sandeep Ahlawat on Thursday, 14 March 2019

 

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