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26 साल का युवा नौकरी छोड़ नोएडा के जल निकायों की कायाकल्प कर रहा है.

तर्कसंगत

March 27, 2019

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दो साल पहले, जब अमित कुमार को कैंपस प्लेसमेंट से आकर्षक नौकरी के प्रस्ताव मिले तो उन्होंने इसे लेने से मना कर दिया और आज 26 साल के अमित और उनकी नौ लोगो की टीम ग्रेटर नोएडा में भूमिगत जल की कायाकल्प कर रहे हैं.

 

सिविल इंजीनियरिंग का उपयोग

2017 के बाद से, टीम ने ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और उसके आसपास के 10 तालाबों का कायाकल्प किया है. टीम ने सफलतापूर्वक भूमिगत जल के निचले स्तर को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है. तर्कसंगत से बात करते हुये अमित कुमार ने बताया “मैं एक कॉरपोरेट कार्यालय में काम नहीं करना चाहता था और हमेशा भारत में मरते हुये जल निकायों को फिर से जीवत करने के लिए अपने कौशल का उपयोग करना चाहता था.”

 

 

सिविल इंजीनियर ने अपने एक दोस्त के साथ गेटर नोएडा के ऐमनाबाद में एक तालाब पर एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया. Research & Development के बाद, यह जोड़ी तालाब को उसके पुराने रूप में लाने करने में सफल रही. बस अमित की परियोजना वहां से चल पड़ी और फिर क्या था दो की एक टीम से 10 की एक टीम में विस्तार हो गया जो अब “Sap Executioners’ के बैनर तले काम करती है. न केवल वे तालाबों का कायाकल्प करते हैं बल्कि भूजल बहाली परियोजनाओं, उनका सौंदर्यीकरण, अनुसंधान और बारिश के पानी को इकठ्ठा करने का कार्य भी करते हैं.

अमित बताते हैं “जब हमने काम शुरू किया तब पड़ताल में पाया कि तालाब के कायाकल्प की प्रक्रिया में लगभग 70 दिन लगते हैं. यह तालाब के आकार या क्षति की सीमा के बावजूद है.” सिविल इंजीनियरिंग के अपने हुनर का उपयोग करते हुये अमित और उनकी टीम ने भूजल को फिर से जिन्दा करने के लिए आर्टिफीसियल रिचार्ज सिस्टम तैयार किया. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक रूप से भूजल को फिर से भरने की कोई उचित तकनीक नहीं है – भूमिगत जल एक ऐसा संसाधन जिसका लोगों ने लगातार शोषण किया है.

 

भूजल को फिर से भरना

अमित ने बताया कि ग्रामीणों और निवासियों ने सभी प्रकार के कचरे को जमा करके अधिकांश तालाबों को डंप यार्ड में बदल दिया है. अमित ने ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भूजल स्तर का एक अध्ययन किया, जिसमें पता चला कि भूजल सालाना 1 मिमी की दर से घट रहा है.

समस्या से निपटने के लिए अमित ने भूजल को फिर से भरने के लिए मशीनों का उपयोग किया. संगठन भूजल स्तरों पर नज़र रखने के लिए नियमित जाँच और निगरानी भी करता है. इस प्रक्रिया के बारे अमित ने बताया “सबसे पहले हम एक ऐसे तालाब की पहचान करते हैं जिसे मदद की ज़रूरत है. उसके बाद हम पहले De-Weed करते हैं, फिर De-Water और अंत में De-Slit. हम अतिरिक्त पानी रखने के लिए संरचनाओं का निर्माण भी करते हैं और भूजल स्तर को भी बदलते हैं.”

 

 

एक बार प्रक्रिया समाप्त होने के बाद टीम के लोग चेकअप करने के लिए तालाब पर जाते हैं. अमित ने बताया “काम पूरा होने के बाद हम भूजल के स्तर और तालाब की स्थिति की जांच के लिए हर 45 दिनों में तालाबों का दौरा करते हैं.” पीजोमीटर (भूजल के स्तर की जांच करने का यंत्र) का उपयोग करके हमें पता चला है कि टीम के प्रयासों से इतने दिनों में कितने सकारात्मक परिणाम आये हैं.”

ये संगठन गाँवों के निवासियों के लिए जागरूकता रैली और कार्यक्रम भी आयोजित करता है जिससे तालाबों में जाने वाली गन्दगी को रोका जा सके. उन्होंने बताया “गांवों में कायाकल्प परियोजना शुरू करने से ठीक पहले हम गाँव और गाँव के प्रधानों के साथ सत्र आयोजित करते हैं. हम भूजल के गुणों और इस प्राकृतिक संसाधन की सुरक्षा की आवश्यकता के बारे में बताते हैं .

अमित ने बताया ”ग्रामीणों ने भी टीम के प्रयासों में बहुत उत्साह दिखाया है. कभी-कभी हम काम में ग्रामीणों की मदद करते हैं और उन्हें समझाते हैं. शायद, अपनेपन की भावना लोगों को क्षेत्र में कूड़े रखने से रोक सकती है.” अमित देश के अन्य हिस्सों में अपने काम का विस्तार करना चाहते हैं. हरियाणा और अन्य जगहों पर परियोजनाएं शुरू भी कर चुके हैं.

पानी एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है क्योंकि पानी की मात्रा आपार है इसकी कोई सीमा नहीं है. तर्कसंगत अमित कुमार के प्रयत्नों की प्रशंसा करता है और लोगों को इसके प्रति जागरूक रहने की अपील करता है.

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